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ओडिशा के पुरी में सोने की मूर्ति और गहनों के लालच में खौफनाक वारदात, चारपाई से बांधकर शख्स को जिंदा जलाया; तीन गिरफ्तारअपराध
24 अग॰ 2026, 10:25 pm (1 दिन पहले)· 0

ओडिशा के पुरी में सोने की मूर्ति और गहनों के लालच में खौफनाक वारदात, चारपाई से बांधकर शख्स को जिंदा जलाया; तीन गिरफ्तार

ओडिशा के पुरी जिले में सोने की मूर्ति और गहनों के लालच में एक व्यक्ति की हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस क्रूर वारदात में शामिल तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

ओडिशा के पुरी जिले से एक अत्यंत विचलित करने वाली और खौफनाक आपराधिक वारदात सामने आई है। यहाँ के कनास इलाके में सोने की मूर्ति और कीमती गहनों के लालच में एक व्यक्ति को बेहद बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया। अपराधियों ने हद पार करते हुए पीड़ित के हाथ-पैर एक चारपाई से कसकर बांध दिए और फिर उसे जिंदा ही आग के हवाले कर दिया। इस सनसनीखेज हत्याकांड के खुलासे के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कुल तीन आरोपियों को धर दबोचा है। इस क्रूरता का शिकार हुए मृतक की पहचान परशुराम प्रधान के रूप में की गई है, जिनके साथ हुई इस घटना ने पूरे इलाके को दहला कर रख दिया है।

घटना का पूरा घटनाक्रम और तारीख

स्थानीय पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी वीभत्स घटना 11 अगस्त को कनास थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मंदराबस्त गाँव में घटी थी। शुरुआती पुलिस जाँच और सबूतों से यह बात सामने आई है कि आरोपियों ने अपनी साजिश को अंजाम देने के लिए सबसे पहले परशुराम के हाथ और पैर एक चारपाई से मजबूती से बाँधे। इसके बाद उन लोगों ने पीड़ित के ऊपर केरोसिन यानी मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा दी, जिससे उसकी जलकर मौत हो गई। इस हत्याकांड के आरोप में पुलिस ने जिन तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें खुर्दा जिले के तापंग निवासी राजकिशोर साहू और सुरेश साहू के साथ-साथ केंद्रापड़ा निवासी सत्यव्रत मल्लिक शामिल हैं। पुलिस अब इस मामले की तह तक जाने के लिए आरोपियों की सटीक भूमिका और इस खौफनाक वारदात से पहले तथा बाद की हर एक गतिविधि की कड़ियों को आपस में जोड़ने में जुटी हुई है।

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विवाद की शुरुआत और सोने का लालच

पुलिस की अब तक की विस्तृत जाँच में यह खुलासा हुआ है कि इस पूरे मामले की जड़ में एक बिल्कुल अलग पारिवारिक या आपसी विवाद था। शुरुआती दौर में मुख्य आरोपी राजकिशोर साहू ने परशुराम प्रधान से संपर्क किया था और अपने भाई के प्रेम संबंध को खत्म करवाने के लिए उससे मदद माँगी थी। इस निजी काम में सहयोग करने के एवज में राजकिशोर ने परशुराम को 19 हजार रुपये का भुगतान भी किया था। लेकिन इस शुरुआती लेन-देन के बाद इस पूरे प्रकरण में सोने की मूर्ति और गुप्त रूप से छिपे गहनों का लालच जुड़ गया, जिसने इस विवाद को एक खूनी मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया।

पुरी के पुलिस अधीक्षक प्रतीक सिंह द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, इस शुरुआती लेन-देन के कुछ समय बाद परशुराम ने राजकिशोर को यह मनगढ़ंत और लुभावनी बात बताई कि एक खास जमीन के टुकड़े में एक बर्तन दबा हुआ है। उस बर्तन के भीतर सोने की मूर्ति और कई सारे कीमती आभूषण रखे हुए हैं। परशुराम के इस दावे के झाँसे में आकर राजकिशोर उस जमीन से छिपे हुए सामान को निकलवाने के लिए पूरी तरह तैयार हो गया। इस सिलसिले में परशुराम ने राजकिशोर से अलग-अलग समय पर कुल करीब 2 लाख रुपये ले लिए। राजकिशोर को पूरी उम्मीद थी कि जमीन के भीतर से सोने की मूर्ति और गहने हाथ लगते ही उसे बहुत बड़ा वित्तीय लाभ मिल जाएगा।

खुदाई के बाद बढ़ा विवाद और हत्या की योजना

हालांकि, जब बताए गए उस निश्चित स्थान पर जमीन की खुदाई की गई, तो वहाँ से किसी भी प्रकार की सोने की मूर्ति या गहने बरामद नहीं हुए। इस नाकामी के बाद राजकिशोर को एहसास हुआ कि उसके साथ धोखा हुआ है और उसने परशुराम से अपने पैसे वापस लौटाने की लगातार माँग करनी शुरू कर दी। पुलिस का कहना है कि परशुराम उस भारी-भरकम रकम को वापस करने में पूरी तरह असमर्थ साबित हुआ, जिसके कारण दोनों पक्षों के बीच आपसी तनाव और विवाद काफी ज्यादा बढ़ गया।

जब परशुराम ने पैसे वापस करने से इनकार कर दिया या वह लाचार हो गया, तब राजकिशोर ने अपने साथियों सुरेश साहू और सत्यव्रत मल्लिक के साथ मिलकर परशुराम को रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश रची। पुलिस के अनुसार, ये तीनों आरोपी योजना के तहत परशुराम के पास पहुँचे। उन्होंने वहाँ पहुँचकर कथित तौर पर पीड़ित के हाथ और पैर एक चारपाई से कसकर बाँध दिए। इसके बाद बेरहमी की सारी हदें पार करते हुए उस पर केरोसिन छिड़का गया और आग लगा दी गई, जिसके चलते भीषण दर्द के बीच परशुराम की मौत हो गई।

पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारियाँ

पुरी में हुई इस जघन्य वारदात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अपनी जाँच का दायरा बढ़ाया और इस घटना से जुड़े तमाम लोगों के साथ-साथ पूरे घटनाक्रम की बारीक जानकारी जुटाई। जैसे-जैसे पुलिस की जाँच आगे बढ़ी, अधिकारियों ने मामले से जुड़े तीन संदिग्ध आरोपियों की पहचान पुख्ता की और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुरी के एसपी प्रतीक सिंह ने बताया कि हत्या के इस मामले की छानबीन के दौरान ही इन तीनों आरोपियों की शिनाख्त संभव हो पाई, जिसके बाद पुलिस ने बिना देर किए इन्हें धर दबोचा।

फिलहाल पुलिस इस पूरी हत्या की गुत्थी को सुलझाने के लिए हर एक कड़ी को जोड़ने का प्रयास कर रही है। कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ इस बात का गहराई से पता लगा रही हैं कि इस वीभत्स हत्या की योजना आखिर कब, कहाँ और कैसे तैयार की गई थी तथा इस पूरी वारदात में इन तीनों आरोपियों की व्यक्तिगत तौर पर क्या-क्या भूमिका रही है। पुलिस की शुरुआती जाँच यही इशारा करती है कि पैसों के लेन-देन और कथित सोने की मूर्ति तथा गहनों के झूठे लालच से उपजा यह विवाद धीरे-धीरे इतना अधिक हिंसक हो गया कि बात सीधे हत्या तक जा पहुँची। वर्तमान में पुलिस तीनों गिरफ्तार आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ कर रही है और घटना के सही क्रम तथा प्रत्येक आरोपी के गुनाह की गहराई से जाँच जारी है।

सवाल-जवाब

यह घटना किस जिले में हुई?
यह खौफनाक वारदात ओडिशा के पुरी जिले के कनास इलाके में हुई।
मृतक की पहचान किस रूप में हुई है?
मृतक की पहचान परशुराम प्रधान के रूप में हुई है।
हत्या का मुख्य कारण क्या था?
हत्या का कारण सोने की मूर्ति और गहनों के झूठे लालच के बाद पैसों की वापसी को लेकर उपजा विवाद था।
पुलिस ने इस मामले में कितने लोगों को गिरफ्तार किया है?
पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
घटना किस तारीख को हुई थी?
यह घटना 11 अगस्त को हुई थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

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