मुंबई की सड़कों पर हुई एक दर्दनाक दुर्घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है, जहां एक तेज रफ्तार वाहन ने कई राहगीरों को अपनी चपेट में ले लिया। इस भीषण हादसे में दो लोगों की जान चली गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के तुरंत बाद जब स्थानीय लोग और पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लेकर पुलिस स्टेशन पहुंचे, तो वहां का माहौल देखकर उनका आक्रोश और अधिक भड़क उठा। आरोप है कि खाकी वर्दी ने कानून का पालन कराने के बजाय आरोपी को आरामदायक सुविधाएं मुहैया कराईं और उसे बचाने का प्रयास किया गया।
मामलतदार वाडी सिग्नल के पास हुआ खौफनाक हादसा
यह दुखद घटना 30 अगस्त 2026 की रात लगभग 8:00 बजे एस.वी. रोड पर मामलतदार वाडी सिग्नल के पास घटी। मालाड सबवे की तरफ से आ रही एक तेज रफ्तार कार, जिसका नंबर MH 02 GJ 2722 था, अचानक पूरी तरह से अनियंत्रित हो गई। वाहन ने सड़क पर चल रहे निर्दोष लोगों को बेरहमी से कुचल दिया, जिससे मौके पर अफरातफरी और चीख-पुकार मच गई। इस वीभत्स दुर्घटना में मालाड वेस्ट की रहने वाली महिला वकील प्रियंका मयंक सत्रा की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इसके अलावा एक अन्य व्यक्ति ने भी अपनी जान गंवा दी और एक नागरिक के सिर पर गंभीर चोट आने के कारण 20 टांके लगाए गए।
पुलिस स्टेशन के भीतर कथित वीआईपी मेहमाननवाजी
जब मृतका के परिजन, परिचित और स्थानीय नागरिक रात करीब 11:30 बजे अपनी शिकायत दर्ज कराने मालाड वेस्ट पुलिस स्टेशन पहुंचे, तो वहां का दृश्य देखकर वे हैरान रह गए। परिजनों की ओर से यह गंभीर आरोप लगाया गया कि पुलिस गंभीर धाराओं में कार्रवाई करने के बजाय आरोपी के आवभगत में जुटी हुई थी। चश्मदीदों के बयानों के अनुसार, आरोपी को थाने के भीतर फोन चलाने की पूरी छूट दी गई थी और उसे बैठने के लिए कुर्सी भी उपलब्ध कराई गई थी। रात करीब 1:20 बजे वर्सोवा क्षेत्र से एक महिला पुलिस अधिकारी भी थाने में दाखिल हुईं। इसके बाद मेडिकल जांच का हवाला देकर आरोपी को लॉकअप से बाहर निकाला गया और थाने के पिछले हिस्से में बने एक एयर-कंडीशंड कमरे में सुकून से बैठाया गया। जब परिजनों ने इस बारे में पूछताछ की, तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें यह कहकर टाल दिया कि आरोपी को अस्पताल ले जाया गया है।
कार्रवाई और पारदर्शिता की उठी मांगें
चूंकि आरोपी वर्सोवा और अंधेरी इलाके का रहने वाला बताया जा रहा है, इसलिए स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर गहरे सवालिया निशान लग गए हैं। लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या किसी रसूख के दबाव में आकर मामले को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। इस घटना के बाद जनता और पीड़ित परिवारों ने प्रशासन के सामने तीन मुख्य मांगें रखी हैं। पहली मांग यह है कि आरोपी पर कठोरतम धाराओं के तहत मुकदमा चलाया जाए। दूसरी मांग यह है कि आरोपी को विशेष सुविधाएं देने वाले पुलिसकर्मियों की उच्चस्तरीय जांच हो और उन्हें तुरंत निलंबित किया जाए। तीसरी मांग यह है कि उस रात के सभी सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक किए जाएं ताकि सच्चाई सबके सामने आ सके।


















