कुख्यात गैंगस्टर हिमांशु भाऊ के आपराधिक नेटवर्क पर दिल्ली पुलिस ने एक बड़ा प्रहार किया है। अमेरिका में बैठकर आपराधिक सिंडिकेट चलाने वाले इस गैंगस्टर के चार गुर्गों को स्पेशल सेल की काउंटर इंटेलिजेंस यूनिट ने राजस्थान के कोटा से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई से गैंग की गतिविधियों को तगड़ा झटका लगा है। पकड़े गए आरोपियों में रमन उर्फ फौजी, करण, शेखर तिवारी और विनोद तिवारी शामिल हैं। इनमें से शेखर और विनोद आपस में सगे भाई हैं, जबकि रमन और करण कई सनसनीखेज हत्याकांडों और ताबड़तोड़ फायरिंग की वारदातों में लंबे समय से वांछित चल रहे थे। इन दोनों मुख्य शूटर्स पर दिल्ली के आया नगर में एक डेयरी कारोबारी की हत्या, मोहित डागर हत्याकांड के अलावा रोहतक और बुलंदशहर में हुई गोलीबारी की वारदातों को अंजाम देने के गंभीर आरोप हैं। विभिन्न राज्यों की पुलिस इनकी तलाश में जुटी हुई थी और इन पर इनाम भी घोषित किया गया था।
इंटेल इनपुट के आधार पर कोटा में हुई दबिश
दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, स्पेशल सेल की काउंटर इंटेलिजेंस टीम को पुख्ता तकनीकी और मानवीय खुफिया इनपुट मिला था कि हिमांशु भाऊ सिंडिकेट से जुड़े कुछ शातिर बदमाश राजस्थान के कोटा में शरण लिए हुए हैं। इस अहम सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने तुरंत जाल बिछाया और संबंधित इलाके में घेराबंदी कर चारों आरोपियों को धर दबोचा। शुरुआती तफ्तीश में सामने आया है कि रमन और करण इस पूरे सिंडिकेट के मुख्य शूटर के तौर पर काम करते थे, जबकि उनके साथ पकड़े गए दोनों सगे भाई शेखर तिवारी और विनोद तिवारी इन बदमाशों को सुरक्षित छिपने के लिए ठिकाने मुहैया कराते थे। इसके अलावा, ये दोनों भाई गैंग के अवैध धन और पैसों के लेनदेन को अलग-अलग माध्यमों तथा फर्जी खातों के जरिए इधर-उधर ठिकाने लगाने का काम भी संभालते थे। पुलिस अब इनके पूरे वित्तीय नेटवर्क और संपर्कों की गहराई से पड़ताल कर रही है ताकि इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके।
आया नगर में डेयरी कारोबारी पर बरसाई थीं 70 से ज्यादा गोलियां
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, बीते साल रमन और करण ने ही राजधानी दिल्ली के आया नगर इलाके में एक सनसनीखेज वारदात को अंजाम देते हुए डेयरी कारोबारी की हत्या की थी। यह खौफनाक घटना 30 नवंबर 2025 को सुबह के वक्त घटित हुई थी। उस दिन 52 वर्षीय डेयरी कारोबारी रतन लोहिया अपनी डेयरी की तरफ जा रहे थे, तभी घात लगाए बैठे हमलावरों ने उन पर अचानक अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम देने के लिए बदमाशों ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए 70 से ज्यादा राउंड गोलियां चलाई थीं। पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ था कि मृतक रतन लोहिया के शरीर में लगभग 69 गोलियां धंस गई थीं। पुलिस की तफ्तीश में यह बात भी सामने आई थी कि इस हाई-प्रोफाइल मर्डर को अंजाम देने के लिए रमन और करण को सुपारी दी गई थी, और तभी से दोनों आरोपी कानून की पकड़ से दूर फरार चल रहे थे।
मोहित डागर हत्याकांड में भी संलिप्त थे आरोपी
गिरफ्तार किए गए दोनों मुख्य शूटरों पर पिछले साल 4 अगस्त 2025 को दिल्ली के मोहन गार्डन और द्वारका मोड़ इलाके में हुए मोहित डागर हत्याकांड में भी संलिप्त होने के पुख्ता आरोप हैं। उस दिन 25 वर्षीय मोहित डागर जब अपने रास्ते पर था, तब मोटरसाइकिल पर सवार होकर आए तीन ताबड़तोड़ हमलावरों ने उसे घेर लिया और उस पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं, जिससे मौके पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई थी। इस दुस्साहसिक वारदात के तुरंत बाद सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से कुख्यात हिमांशु भाऊ गैंग ने इस हत्या की जिम्मेदारी खुलेआम ली थी। दिल्ली पुलिस की गहरी छानबीन में यह तथ्यात्मक पुष्टि हुई थी कि मोहित डागर को मौत के घाट उतारने वाले शूटर कोई और नहीं बल्कि यही रमन और करण ही थे, जो अब जाकर पुलिस के हत्थे चढ़े हैं।
रोहतक और बुलंदशहर की गोलीबारी में भी तलाश
रमन और करण की संलिप्तता केवल दिल्ली तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी कई वारदातों में शामिल रहे हैं। पुलिस के अनुसार, दिसंबर 2025 में हरियाणा के रोहतक जिले के रिटोली गांव में हुई ताबड़तोड़ फायरिंग की घटना में भी ये दोनों आरोपी थे। इस हमले का मुख्य निशाना हिमांशु भाऊ का कट्टर विरोधी सनी रिटोली था। उस गोलीबारी की घटना में एक निर्दोष व्यक्ति की जान चली गई थी, जबकि चार अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके अलावा, मई 2026 में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के ककोड़ थाना क्षेत्र में हुई फायरिंग के मामले में भी पुलिस को इनकी सरगर्मी से तलाश थी। उस मामले में रमन और करण ने गैंगस्टर नीरज फरीदपुरिया के विरोधी जितेंद्र उर्फ जीतू को अपना निशाना बनाकर गोलियां बरसाई थीं।
पलवल के सरपंच पर कार्बाइन से किया था हमला
आपराधिक वारदातों का दायरा बढ़ाते हुए करण ने दिसंबर 2024 में हरियाणा के पलवल जिले के महेशपुर गांव के मौजूदा सरपंच पर भी कातिलाना हमला किया था। इस सनसनीखेज हमले में आरोपियों ने आम हथियारों की बजाय एक ऑटोमैटिक कार्बाइन जैसे बेहद घातक और प्रतिबंधित हथियार का इस्तेमाल किया था, जिससे इलाके में दहशत फैल गई थी। रोहतक जिले में भी इन बदमाशों के खिलाफ कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। वहीं दूसरी तरफ, शूटर रमन उर्फ फौजी दिल्ली क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज किए गए आर्म्स एक्ट के एक मामले में भी लंबे समय से वांटेड चल रहा था। इन दोनों बदमाशों ने मिलकर मई 2024 में रेवाड़ी के मोहल्ला कुतुबपुर में शेखर राव के आवास पर भी ताबड़तोड़ फायरिंग की थी, जिसकी तलाश पुलिस को काफी समय से थी।
भाईयों ने संभाला था ठिकाना और पैसों का नेटवर्क
स्पेशल सेल की टीम अब शूटरों के साथ गिरफ्तार किए गए दोनों भाइयों शेखर तिवारी और विनोद तिवारी की आपराधिक पृष्ठभूमि और भूमिका की कड़ाई से जांच कर रही है। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के गोवर्धन इलाके के जिखान गांव के रहने वाले ये दोनों सगे भाई फरार चल रहे शूटर्स को सुरक्षित पनाहगाह और ठिकाने उपलब्ध करवाते थे। इसके अलावा, वे गैंग के पास आने वाले अवैध पैसों के लेनदेन का पूरा ढांचा संभालते थे। पुलिस इन्हें मनी म्यूल नेटवर्क का अहम हिस्सा मानकर तह तक जाने का प्रयास कर रही है। जांच में यह बात सामने आई है कि ये दोनों भाई अवैध वसूली और जबरन उगाही के पैसों को अलग-अलग बैंक खातों और विभिन्न वित्तीय माध्यमों के जरिए घुमाकर एक जगह से दूसरी जगह सुरक्षित पहुंचाने में मदद करते थे, जिससे गैंग का आर्थिक पहिया चलता रहता था।


















