हरियाणा के अंबाला शहर में सफाई कर्मचारियों की चल रही हड़ताल अब अपने 26वें दिन में पहुंच चुकी है, जिसके कारण पूरे शहर की साफ-सफाई व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है। पिछले लंबे समय से कर्मचारियों के काम पर न लौटने की वजह से शहर के तमाम इलाकों में कचरे के बड़े-बड़े ढेर जमा हो गए हैं। सोमवार को आंदोलन कर रहे कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों के समर्थन में विरोध का एक अलग ही रास्ता चुना, जिससे शहर की प्रमुख सड़कें कूड़े से पट गईं। प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम कार्यालय समेत विभिन्न स्थानों पर कचरा फैलाकर सरकार के विरुद्ध जमकर प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। सफाई कर्मचारियों का कहना है कि उनकी कुल 22 मांगों को लेकर प्रशासन और सरकार के साथ बातचीत का दौर चला था, जिसमें से 17 मांगों पर सहमति भी बन चुकी थी।
बावजूद इसके, काफी लंबा समय बीत जाने के बाद भी उन सहमति वाली मांगों को धरातल पर लागू नहीं किया गया है। कर्मचारियों का कड़ा आरोप है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद जब उनकी समस्याओं पर कोई ठोस प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्हें मजबूर होकर एक बार फिर से कड़े आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ा। सफाई कर्मचारी नेता शंकर पामा ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि पूरे प्रदेश में सफाई कर्मचारी संघ के बैनर तले कर्मचारी पिछले 25 दिनों से लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार द्वारा 22 में से 17 मांगें स्वीकार किए जाने के बावजूद उन्हें अमलीजामा नहीं पहनाया गया, जिससे कर्मचारियों का गुस्सा सोमवार को पूरी तरह फूट पड़ा और उन्होंने कचरा उठाकर सीधे शहर की सड़कों पर डाल दिया। हालांकि, इस दौरान कर्मचारी नेता ने इस असुविधा के लिए शहर के आम नागरिकों से माफी भी मांगी।
शंकर पामा के मुताबिक, कर्मचारियों की प्रमुख और पुरानी मांगों में सिविल कर्मचारियों को नियमित करना और ठेका प्रथा को पूरी तरह समाप्त करना शामिल है। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक उनका यह आंदोलन लगातार जारी रहेगा। इसके साथ ही, कर्मचारियों ने शाम के वक्त मशाल यात्रा निकालकर भी अपना विरोध दर्ज कराने की योजना बनाई है। एक तरफ जहां कर्मचारी अपनी मांगों मनवाने के लिए सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नगर निगम प्रशासन ने इस आक्रामक प्रदर्शन पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। निगम प्रशासन का कहना है कि हड़ताल के दौरान शहर से कचरा साफ करने के लिए ड्यूटी पर भेजी जा रही गाड़ियों को कुछ प्रदर्शनकारी कर्मचारियों द्वारा रोकने का प्रयास किया गया।
नगर निगम कमिश्नर वीरेंद्र सहरावत ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ लोगों ने कचरा उठाने वाली गाड़ियों में तोड़फोड़ की और गाड़ियों के ऊपर चढ़कर उनमें मौजूद कचरे को सड़कों पर जानबूझकर फैला दिया। निगम कमिश्नर ने इस पूरी हरकत को सीधे तौर पर सरकारी काम में बाधा डालने की श्रेणी में रखा है। नगर निगम प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नियमित और रोल पर काम करने वाले लगभग 350 कर्मचारियों में से यदि कोई भी कर्मचारी इस तरह की गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है, तो उसके खिलाफ स्थापित सर्विस रूल्स के तहत कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
निगम प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में दोबारा कचरा उठाने वाले वाहनों को रोकने का प्रयास किया गया या सरकारी कार्यों में किसी भी प्रकार की बाधा डाली गई, तो स्थानीय पुलिस प्रशासन की पूरी मदद ली जाएगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित व्यक्ति को हिरासत में लेकर उसके खिलाफ सख्त धाराओं में एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकती है। एक तरफ कर्मचारी अपनी मांगों के हक में सरकार पर शिकंजा कस रहे हैं, तो दूसरी तरफ इस लंबी हड़ताल और विरोध प्रदर्शनों के बीच सबसे भारी मुसीबत शहर के आम नागरिकों को उठानी पड़ रही है। जगह-जगह कचरा जमा होने की वजह से लोगों को भारी गंदगी, बदबू और आवारा पशुओं की बढ़ती समस्याओं से दो-चार होना पड़ रहा है।


















