जिस दिन कोई क्वांटम कंप्यूटर आपकी डिजिटल सिग्नेचर की हूबहू नकल बना लेगा, उस दिन आपके बिटकॉइन का क्या होगा? यही सवाल उस नई क्रिप्टोग्राफिक तकनीक की जड़ में है, जिसे सिक्योरिटी कंपनी प्रोजेक्ट इलेवन ने गुरुवार को पेश किया। कंपनी का दावा है कि उसने ऐसा रास्ता खोज लिया है, जिससे कोई भी यूजर अपने वॉलेट पर मालिकाना हक साबित कर सकेगा, फिर चाहे क्वांटम मशीनें इतनी ताकतवर क्यों न हो जाएं कि वे खुद ही प्राइवेट की निकाल लें और सही सिग्नेचर तैयार कर लें।
कंपनी के सीईओ एलेक्स प्रुडेन ने बुधवार को एक्स पर एक थ्रेड में अपनी बात रखी और क्वांटम बहस को एक नए नजरिए से देखा। प्रुडेन के मुताबिक असली मुश्किल वॉलेट को क्वांटम हमले से बचाना नहीं है। असली पेच तो यह पता लगाने में है कि जब ऐसे हमले सचमुच मुमकिन हो जाएं, तब वॉलेट का सही मालिक कौन है, यह कैसे साबित किया जाए।
प्रुडेन ने लिखा, "जब कोई क्वांटम कंप्यूटर आपके वॉलेट की सिग्नेचर बना सके, तो आप कैसे साबित करेंगे कि वॉलेट अब भी आपका ही है? क्यू-डे के बाद, जैसे ही कोई क्वांटम कंप्यूटर किसी पब्लिक की से ECC प्राइवेट की निकाल लेगा, तब एक सही सिग्नेचर भी मालिकाना हक का सबूत नहीं रह जाएगा। क्वांटम हमलावर और असली मालिक, दोनों एक जैसी सिग्नेचर बना सकेंगे।"
आखिर 'क्यू-डे' है क्या
'क्यू-डे' इंडस्ट्री में उस पल के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द है, जब कोई क्वांटम कंप्यूटर उस इलिप्टिक कर्व क्रिप्टोग्राफी को तोड़ने लायक हो जाएगा, जो बिटकॉइन ट्रांजैक्शन को सुरक्षित रखती है। पूरे सेक्टर की चिंता सीधी सी है: पर्याप्त रूप से उन्नत क्वांटम मशीन वाला कोई हमलावर किसी पब्लिक की से उल्टा चलकर उससे जुड़ी प्राइवेट की तक पहुंच सकता है। जैसे ही यह मुमकिन होगा, डिजिटल सिग्नेचर इस बात का भरोसेमंद सबूत नहीं रह जाएगी कि वॉलेट किसके काबू में है, क्योंकि हमलावर भी ठीक वही सिग्नेचर बना लेगा जो असली मालिक बनाता।
आम भाषा में कहें तो यह चोरी का दरवाजा खोल देता है। कोई हमलावर कमजोर वॉलेट को निशाना बना सकता है, उनकी सिग्नेचर की नकल कर सकता है और मालिक की इजाजत के बिना उनके अंदर पड़ा बिटकॉइन कहीं और भेज सकता है।
चाबी उजागर किए बिना मालिकाना हक साबित करना
प्रोजेक्ट इलेवन का जवाब वॉलेट के की डेरिवेशन पाथ पर टिका है। यह तकनीक किसी यूजर को यह दिखाने देती है कि वॉलेट की प्राइवेट की जिस पैरेंट की से बनी थी, उस पर उसका काबू है, और वह भी उस पैरेंट की को कभी सामने लाए बिना। चूंकि कोई क्वांटम कंप्यूटर उस पैरेंट की को दोबारा नहीं बना सकता, इसलिए कंपनी का कहना है कि उसकी यह विधि असली मालिक और नकली दावेदार में फर्क कर सकती है, तब भी जब वॉलेट की प्राइवेट की पहले ही टूट चुकी हो।
प्रुडेन ने लिखा, "तो क्यू-डे के बाद भी, जिस हमलावर ने आपके एड्रेस की प्राइवेट की तोड़ ली है, उसके पास वह सीड फ्रेज न तो है और न ही वह उसे निकाल सकता है, जिससे यह की बनी थी। उस पैरेंट की को जानते हुए भी उसे उजागर न करना, यह सिर्फ असली मालिक ही कर सकता है।"
इसे बनाया किसने
प्रुडेन ने बताया कि यह काम ओपन-सोर्स बिनियस जीरो-नॉलेज प्रूफ सिस्टम के लीड मेंटेनर जिम पोसेन के साथ मिलकर किया गया। यह "सिग्नेचर लिफ्टिंग" नाम के एक पुराने विचार पर आधारित है, जिसे सबसे पहले शोधकर्ता एलन सैटाथ और रॉबर्ट वायबोर्स्की ने पेश किया था। प्रोजेक्ट इलेवन ने पोसेन को इस तरीके को बिनियस के जरिए लागू करने के लिए फंडिंग दी। बिनियस एक ओपन-सोर्स प्रूफ सिस्टम है, जिसे उन क्रिप्टोग्राफिक कामों को तेज करने के लिए बनाया गया है जो बहुत ज्यादा हैशिंग पर निर्भर रहते हैं।
यह रिकवरी तरीका खास तौर पर उन यूजर्स के लिए है, जो भविष्य में क्वांटम-सेफ एड्रेस पर शिफ्ट होने से समय रहते चूक जाएंगे। यह ऐसे वक्त आया है, जब बिटकॉइन को पोस्ट-क्वांटम दुनिया के लिए तैयार करने की कोशिशें तेज हो रही हैं।
बिटकॉइन को क्वांटम-प्रूफ बनाने की दौड़
इसकी बुनियाद पूरे साल बनती रही है। फरवरी में बिटकॉइन डेवलपर्स ने बिटकॉइन इंप्रूवमेंट प्रपोजल BIP-360 को औपचारिक समीक्षा प्रक्रिया में आगे बढ़ाया, जिससे आगे चलकर क्वांटम-रेसिस्टेंट अपग्रेड की जमीन तैयार हुई। मार्च में बीटीक्यू टेक्नोलॉजीज ने अपने बिटकॉइन क्वांटम टेस्टनेट पर पहला काम करता हुआ इंप्लीमेंटेशन जारी किया, जिससे डेवलपर्स इस प्रस्ताव को परख सके, और साथ ही यह भी सामने आया कि पूरे नेटवर्क पर लागू होने वाले बदलाव के लिए सहमति बनाना कितना मुश्किल है।
जून में चेतावनियां और तेज हो गईं, जब कॉइनबेस की क्वांटम एडवाइजरी काउंसिल ने ब्लॉकचेन डेवलपर्स से अभी से पोस्ट-क्वांटम माइग्रेशन की योजना बनाने को कहा। काउंसिल ने आगाह किया कि करीब 7 मिलियन बिटकॉइन आगे चलकर क्वांटम हमलों की चपेट में आ सकते हैं, अगर उनके मालिकों ने अपने फंड को क्वांटम-सेफ एड्रेस पर नहीं भेजा। उसी महीने के आखिर में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कार्यकारी आदेशों पर दस्तखत किए, ताकि संघीय सरकार का पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी की ओर बदलाव तेज हो सके, जिससे क्यू-डे की तैयारी की बड़ी मुहिम को और रफ्तार मिली।
पीछे छूट जाने वालों के लिए एक सहारा
प्रुडेन के लिए यह प्रस्ताव सतर्क लोगों के बारे में कम और उन लोगों के बारे में ज्यादा है, जो कहीं छूट जाते हैं।
प्रुडेन ने लिखा, "मैं भले ही चाहूं कि पूरी दुनिया क्वांटम माइग्रेशन प्लान को गंभीरता से ले, लेकिन हकीकत यह है कि कुछ डिजिटल एसेट वॉलेट इस मौके से चूक जाएंगे। यह उन्हें एक सहारा देता है: सिग्नेचर से नहीं, बल्कि डेरिवेशन के जरिए मालिकाना हक साबित करो, तब भी जब वह मौका बीत चुका हो।"











