फ्रेंच रिवेरा में कैटी पेरी और जस्टिन ट्रूडो का वेकेशन, सनस्क्रीन लगाते तस्वीरें वायरल होने से इंटरनेट पर बढ़ी हलचलनजफगढ़ के गैंगस्टर नंदू के खिलाफ बिना मौजूदगी के मुकदमा चलाने का रास्ता साफ, दिल्ली कोर्ट का ऐतिहासिक आदेशदिल्ली की नई लक्ष्मी योजना से महिलाओं को मिलेंगे ₹2,500 हर महीने, जानिए बचत से 3 साल में कैसे बनेगा ₹1 लाख का फंडकोचिंग सिटी कोटा में अब स्कूली शिक्षा भी बनी अभिभावकों की पहली पसंद, जानें वजहभारत में अप्रैल से जून की तिमाही में सोने की मांग 6 प्रतिशत घटी, ऊंची कीमतों से बदला गणितबंपर जैकपॉट की घोषणा, केरल राज्य ने जारी किए कारुण्य प्लस KN-634 के नतीजे जिसमें 1 करोड़ रुपये का पहला पुरस्कार शामिलगुजरात के हलोल में हाईवे होटल पर 5 युवकों का तांडव, लूटपाट के बाद मैनेजर को कार से कुचलने का प्रयासबिना अनुभव के भी फाइनल ईयर स्टूडेंट्स को मिल सकती है पहली इंटर्नशिप, अपनाएं ये 4 तरीकेमेष राशिफल 31 जुलाई 2026: मंगल का वाणी पर रहेगा प्रभाव, दोपहर बाद सुधरेंगे करियर और आर्थिक हालातबीकानेर के पांचू में इंस्टाग्राम पर पिस्तौल संग फोटो अपलोड करना रौनक बिश्नोई को पड़ा भारी, पुलिस ने किया गिरफ्तार
500 साल पुरानी तकनीक से बना हैदराबाद के गोलकुंडा किले का शाही हम्माम, जहां बिना बिजली मिलाया जाता था गर्म और ठंडा पानीकल्चर
29 जुल॰ 2026, 2:44 pm (1 दिन पहले)· 2

500 साल पुरानी तकनीक से बना हैदराबाद के गोलकुंडा किले का शाही हम्माम, जहां बिना बिजली मिलाया जाता था गर्म और ठंडा पानी

हैदराबाद का गोलकुंडा किला अपनी प्राचीन इंजीनियरिंग और शाही हम्माम के लिए जाना जाता है, जहाँ फारसी वास्तुकला और मिट्टी के पाइपों के जरिए बिना बिजली गर्म और ठंडे पानी का तापमान संतुलित किया जाता था।

हैदराबाद में स्थित ऐतिहासिक गोलकुंडा किला अपनी विशाल दीवारों और भव्य वास्तुकला के साथ प्राचीन भारत की उन्नत इंजीनियरिंग का एक उत्कृष्ट प्रतीक है। 16वीं और 17वीं शताब्दी के दौरान कुतुब शाही राजवंश के शासनकाल में निर्मित यह दुर्ग अपने समय से कई सदी आगे की तकनीकों के लिए दुनिया भर में पहचाना जाता है। इस किले के परिसर में एक विशेष शाही हम्माम यानी स्नानघर बनाया गया था, जो आधुनिक दौर के जकूजी की भांति कार्य करता था। यह प्राचीन संरचना दर्शाती है कि उस युग के कारीगरों और वास्तुकारों का जल प्रबंधन ज्ञान कितना समृद्ध था।

फारसी वास्तुकला से प्रेरित जल तापमान प्रणाली

शाही हम्माम का सबसे अद्भुत पहलू रानियों के लिए तैयार की गई स्नान व्यवस्था थी, जहाँ गर्म और ठंडे पानी को जरूरत के अनुसार नियंत्रित किया जाता था। स्थापत्य कला के विशेषज्ञों और पुरातत्वविदों के अध्ययन से पता चलता है कि इस स्नानघर की डिजाइनिंग पर फारसी वास्तुकला की गहरी छाप थी। जल के तापमान को संतुलित बनाए रखने के लिए विशेष प्रकार के आउटलेट और छिद्र बनाए गए थे। इनमें से एक तरफ की धारा से बिल्कुल उबलता गर्म पानी आता था और दूसरी तरफ के छेद से शीतल ठंडे पानी का प्रवाह होता था। दोनों धाराएं एक मुख्य टैंक में आकर मिलती थीं, जिससे स्नान के लिए पानी का तापमान बिल्कुल अनुकूल हो जाता था।

ये भी पढ़ें

मिट्टी की पाइपलाइनों का विशाल भूमिगत नेटवर्क

इस जटिल जल प्रणाली को निर्बाध रूप से संचालित करने के लिए पूरे किले के नीचे मिट्टी यानी टेराकोटा से बनी पाइपलाइनों का एक व्यापक भूमिगत नेटवर्क तैयार किया गया था। इस नेटवर्क की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि इसमें पानी के संचालन के लिए किसी भी प्रकार की आधुनिक मशीनों या बिजली की आवश्यकता नहीं पड़ती थी। पानी को निचले इलाकों में स्थित जल स्रोतों, जैसे कि दुर्गम चेरुवु, से लगभग 400 फीट की ऊंचाई पर बने महलों तक पहुँचाने के लिए गुरुत्वाकर्षण और साइफन के वैज्ञानिक सिद्धांतों का बेहद चतुराई से उपयोग किया गया था। इन मजबूत मिट्टी के पाइपों के माध्यम से पहले पानी को गर्म किया जाता था और फिर उसे पूरी सुरक्षा के साथ शाही स्नानघर तक पहुँचाया जाता था।

शोधकर्ताओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र

वर्तमान समय में जहाँ आधुनिक तकनीक के बिना आरामदायक जीवन की कल्पना करना कठिन है, वहीं लगभग 500 वर्ष पुरानी यह प्राकृतिक वॉटर सप्लाई व्यवस्था आज भी हर किसी को आश्चर्यचकित कर देती है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित गोलकुंडा किले का यह शाही हम्माम दुनिया भर से आने वाले शोधकर्ताओं, इतिहासविदों और पर्यटकों के बीच लगातार कौतूहल और चर्चा का विषय बना हुआ है। यह 500 साल पुरानी जल प्रबंधन प्रणाली इस बात का ठोस प्रमाण है कि मध्यकालीन भारत में स्थापत्य कला और जल विज्ञान अपने चरम पर था।

सवाल-जवाब

गोलकुंडा किले के शाही हम्माम की मुख्य खासियत क्या थी?
यह 500 साल पुराना शाही स्नानघर बिना किसी बिजली या आधुनिक मशीनरी के काम करता था और इसमें गर्म व ठंडे पानी को मिलाकर तापमान नियंत्रित करने की अनूठी व्यवस्था थी।
गोलकुंडा किले में पानी का तापमान कैसे नियंत्रित किया जाता था?
फारसी वास्तुकला पर आधारित इस प्रणाली में अलग-अलग आउटलेट से आने वाली गर्म और ठंडे पानी की धाराएं एक टैंक में मिलती थीं, जिससे पानी संतुलित रहता था।
निचले जल स्रोतों से 400 फीट ऊपर महलों तक पानी कैसे पहुंचाया जाता था?
दुर्गम चेरुवु जैसे स्रोतों से पानी को ऊपर उठाने के लिए मिट्टी की पाइपलाइनों के नेटवर्क, गुरुत्वाकर्षण और साइफन के सिद्धांतों का उपयोग किया जाता था।
गोलकुंडा किले का निर्माण किस काल में हुआ था?
गोलकुंडा किले का निर्माण 16वीं और 17वीं शताब्दी के दौरान कुतुब शाही राजवंश के शासनकाल में हुआ था।
वर्तमान में गोलकुंडा किले का रखरखाव कौन करता है?
गोलकुंडा किला और इसका ऐतिहासिक शाही हम्माम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित और प्रबंधित किया जाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR