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पुराने हैदराबाद के फुटपाथ पर सजी सिक्कों की अनूठी दुनिया, 1818 की ईस्ट इंडिया कंपनी से लेकर निज़ाम काल का दुर्लभ इतिहासकल्चर
9 सित॰ 2026, 1:28 pm (49 दिन पहले)· 5

पुराने हैदराबाद के फुटपाथ पर सजी सिक्कों की अनूठी दुनिया, 1818 की ईस्ट इंडिया कंपनी से लेकर निज़ाम काल का दुर्लभ इतिहास

हैदराबाद की व्यस्त सड़कों पर एक संग्रहकर्ता पिछले 22 सालों से 1818 की ईस्ट इंडिया कंपनी और निज़ाम दौर की दुर्लभ मुद्राओं को सहेज रहे हैं। उनका मानना है कि सिक्का संग्रहण न केवल इतिहास सीखने का बेहतरीन जरिया है, बल्कि यह बिना किसी नुकसान का एक सुरक्षित निवेश भी है।

हैदराबाद की आधुनिकता और रोज़मर्रा की भागदौड़ के बीच, शहर के ऐतिहासिक कोने में इतिहास को नए सिरे से जीवित रखने की एक अनूठी कोशिश जारी है। यहाँ पिछले 22 सालों से एक संग्रहकर्ता सड़क किनारे दुर्लभ सिक्कों का एक छोटा लेकिन बेहद समृद्ध खजाना सजाकर लोगों को इतिहास से जोड़ रहे हैं। यह कोई पारंपरिक या भव्य संग्रहालय नहीं है, बल्कि फुटपाथ पर सजी एक ऐसी नुमाइश है जहाँ 1818 की ईस्ट इंडिया कंपनी के दौर से लेकर हैदराबाद के निज़ाम शासनकाल तक की ऐतिहासिक मुद्राएं आसानी से देखी जा सकती हैं।

1818 के टोकन से लेकर निज़ाम काल तक का दुर्लभ खजाना

इस अनूठे संग्रह में कई ऐसी दुर्लभ मुद्राएं मौजूद हैं, जिन्हें आज के दौर में देख पाना बेहद कठिन माना जाता है। इनके कलेक्शन में सबसे प्रमुख आकर्षणों में से एक वर्ष 1818 का ईस्ट इंडिया कंपनी का विशेष टोकन सिक्का है। इसके अलावा, ब्रिटिश शासनकाल के दौरान इस्तेमाल होने वाले सिक्के, स्वतंत्रता के बाद के ब्रिटिश इंडिया का हाफ पैसा और कई विदेशी राष्ट्रों की ऐतिहासिक मुद्राएं भी इस संग्रह की शोभा बढ़ा रही हैं। यह संग्रह केवल धातुओं का टुकड़ा नहीं है, बल्कि अलग-अलग दौर के आर्थिक और सामाजिक इतिहास की एक जीवित झांकी पेश करता है।

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हाथ से ढाले गए 'मुद्दा पैसा' की ऐतिहासिक विशेषता

ऐतिहासिक सिक्कों की बारीकियों और उनकी बुनावट के बारे में जानकारी साझा करते हुए संग्रहकर्ता बताते हैं कि पुराने जमाने में हाथ से बनाए गए सिक्कों को 'मुद्दा पैसा' कहा जाता था। निज़ाम और उनके पूर्ववर्ती दौर में सिक्का ढलाई की अपनी खास व्यवस्था होती थी। उस समय यदि हाथ से तैयार किया गया यह सिक्का सोने का होता था, तो उसे 'अशर्फी' कहा जाता था, जो सर्वोच्च मूल्य की मुद्रा मानी जाती थी। वहीं, अगर यही ढला हुआ सिक्का चाँदी का होता था, तो उसे 'रुपया' के नाम से जाना जाता था। उनके पास वर्तमान में जो मुद्दा पैसा मौजूद है, वह तांबे की धातु से निर्मित है और उस दौर की दस्तकारी का उत्कृष्ट नमूना पेश करता है।

बिना घाटे का सुरक्षित निवेश और जीवन भर की हॉबी

लगभग वर्ष 2005 से इस विधा में पूरी लगन के साथ जुड़े इस शख्स का मानना है कि सिक्का संग्रहण दुनिया के सबसे शानदार और ज्ञानवर्धक शौक में से एक है। वे इसे महज एक दिल बहलाने वाला शौक नहीं मानते, बल्कि वित्तीय दृष्टिकोण से बिना किसी घाटे का एक बेहद सुरक्षित निवेश भी करार देते हैं। उनका कहना है कि जब आप दुर्लभ सिक्कों को जमा करते हैं और उन्हें सही तरीके से संभाल कर रखते हैं, तो समय के साथ उनका ऐतिहासिक मूल्य बढ़ता जाता है। भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर इन सिक्कों को बेचकर अपनी वित्तीय जरूरतों को बिना किसी नुकसान के आसानी से पूरा किया जा सकता है।

युवा पीढ़ी के लिए सकारात्मक दिशा और प्रेरणादायक संदेश

आज की युवा पीढ़ी के लिए यह संग्रहकर्ता एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विचारणीय संदेश प्रस्तुत करते हैं। उनका कहना है कि आजकल कई युवा सिगरेट पीने जैसी हानिकारक, फालतू और स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाने वाली आदतों को अपना शौक समझ बैठते हैं। इसके विपरीत, पुराने सिक्कों और मुद्राओं को एकत्र करना एक अत्यंत शैक्षणिक और बौद्धिक हॉबी है। जब कोई व्यक्ति पुराने सिक्के जमा करता है, तो वह केवल धातु का टुकड़ा अपने पास नहीं रखता, बल्कि उस कालखंड के इतिहास, अर्थव्यवस्था और संस्कृति को करीब से पढ़ता और समझता है। यह पहल केवल पुरानी मुद्राओं के संकलन तक सीमित नहीं है, बल्कि आज के युवाओं को अपनी समृद्ध विरासत से जोड़ने और उन्हें जीवन में सही दिशा की ओर अग्रसर करने की प्रेरणा देती है।

सवाल-जवाब

संग्रहकर्ता के पास कौन-कौन से मुख्य दुर्लभ सिक्के मौजूद हैं?
उनके संग्रह में 1818 की ईस्ट इंडिया कंपनी का टोकन सिक्का, निज़ाम काल के हाथ से बने सिक्के, ब्रिटिश इंडिया का हाफ पैसा और विदेशी सिक्के शामिल हैं।
'मुद्दा पैसा' किसे कहा जाता था?
पुराने समय और निज़ाम दौर में हाथ से ढाले गए सिक्कों को 'मुद्दा पैसा' कहा जाता था। सोने के सिक्के को अशर्फी, चाँदी के सिक्के को रुपया और तांबे के सिक्के को मुद्दा पैसा कहा जाता था।
सिक्का संग्रह को बिना घाटे का निवेश क्यों माना गया है?
सिक्कों को संभाल कर रखने से समय के साथ उनका ऐतिहासिक मूल्य बढ़ता है, जिससे भविष्य में जरूरत पड़ने पर बिना किसी नुकसान के उन्हें बेचकर वित्तीय आवश्यकताएं पूरी की जा सकती हैं।
संग्रहकर्ता का युवा पीढ़ी के लिए क्या मुख्य संदेश है?
वे युवाओं को सिगरेट पीने जैसी नुकसानदायक आदतों से दूर रहकर पुराने सिक्के जमा करने जैसी शैक्षणिक और ज्ञानवर्धक हॉबी अपनाने की सलाह देते हैं।
यह संग्रहकर्ता कितने समय से सिक्के सहेजने का काम कर रहे हैं?
यह संग्रहकर्ता हैदराबाद की सड़कों पर लगभग वर्ष 2005 से पिछले 22 सालों से लगातार ऐतिहासिक सिक्कों को सहेजने का काम कर रहे हैं।
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