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गया के बैदा गांव में ताजिया की चमक, मोहम्मद मोइनुद्दीन का परिवार चार पीढ़ियों से संभाल रहा यह हुनरकल्चर
26 जून 2026, 12:05 am (46 दिन पहले)· 4

गया के बैदा गांव में ताजिया की चमक, मोहम्मद मोइनुद्दीन का परिवार चार पीढ़ियों से संभाल रहा यह हुनर

बिहार के गया जिले के आमस प्रखंड के बैदा गांव में मोहम्मद मोइनुद्दीन अंसारी का परिवार चार पीढ़ियों से ताजिया बनाने का काम कर रहा है। कभी 40 रुपये में बनने वाली ताजिया की कीमत आज हजारों में पहुंच चुकी है।

मुहर्रम का महीना आते ही बिहार के गया जिले के आमस प्रखंड के बैदा गांव में एक घर की रौनक बढ़ जाती है। यहां रहने वाले मोहम्मद मोइनुद्दीन अंसारी और उनका परिवार बांस, लोहे के फ्रेम, रंगीन कपड़े और रोशनी से वो ताजिया तैयार करता है, जिसकी मांग आसपास के कई गांवों में रहती है। खास बात यह है कि यह हुनर इस परिवार में किसी एक पीढ़ी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि चौथी पीढ़ी तक पहुंच चुका है।

क्या होती है ताजिया और क्यों बनती है

मुहर्रम इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना है और इसे इस्लाम के सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। यह महीना सिर्फ नए साल की शुरुआत नहीं, बल्कि सब्र, त्याग, न्याय और इमाम हुसैन की शहादत की याद में आत्मचिंतन, शोक और इबादत का प्रतीक है। मुहर्रम की दसवीं तारीख को कर्बला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत की याद में ताजिया जुलूस निकाला जाता है। बांस, लकड़ी, रंगीन कागज और कपड़े से बने इमाम हुसैन के मकबरे के प्रतीकात्मक मॉडल को ही ताजिया कहा जाता है।

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चार पीढ़ियों की विरासत

गया जिले में ताजिया बनाने वाले कई कुशल कारीगर हैं, लेकिन बैदा गांव के मोहम्मद मोइनुद्दीन अंसारी का परिवार इनमें खास पहचान रखता है। इस काम की शुरुआत मोइनुद्दीन के दादा सुखाड़ी मियां ने की थी, फिर उनके पिता रसूल अंसारी ने इस हुनर को आगे बढ़ाया और अब मोइनुद्दीन के बच्चे भी इसमें माहिर हो चुके हैं। हर साल मुहर्रम में आसपास के करीब आधा दर्जन गांवों से इनके पास ताजिया बनाने के ऑर्डर पहुंचते हैं।

40 रुपये से हजारों तक का सफर

करीब 40 साल पहले मोइनुद्दीन एक ताजिया महज 40 रुपये में बनाते थे, लेकिन आज एक ताजिया बनाने के बदले इन्हें करीब 5 से 7 हजार रुपये मिलते हैं। वहीं एक पूरी ताजिया तैयार करने में करीब 20 हजार रुपये तक का खर्च आ जाता है। इसे बनाने में लोहे का फ्रेम, बांस, रंगीन कपड़े और लाइट जैसी चीजों का इस्तेमाल होता है। पिछले 40 साल से मोइनुद्दीन आसपास के गांवों के लिए लगातार ताजिया बनाते आ रहे हैं।

इस साल कहां-कहां से आए ऑर्डर

इस बार भी मोइनुद्दीन को चार से पांच जगहों से ताजिया के ऑर्डर मिले हैं। इनमें हमजापुर, शेरघाटी मियां बाड़ा, वारिस नगर, लगन तकिया और नई बाजार शेरघाटी शामिल हैं। मोइनुद्दीन बताते हैं कि एक ताजिया बनाने में 6 से 7 दिन लग जाते हैं। असल में वे पेशे से दर्जी हैं और कपड़े सिलाई का काम करते हैं। ताजिया बनाने का हुनर उन्होंने अपने दादा और पिता से सीखा था और आज पूरे इलाके में वे जाने-माने कारीगर हैं, जिन्हें ऑर्डर देकर लोग ताजिया बनवाते हैं।

खूबसूरत फिनिशिंग और रंग-बिरंगी रोशनी

मोइनुद्दीन अंसारी पूरे शेरघाटी अनुमंडल समेत जिले भर में ताजिया बनाने के लिए मशहूर हैं। इनके हाथों की कारीगरी और फिनिशिंग बेहद खूबसूरत मानी जाती है। यही वजह है कि शेरघाटी के जितने भी बड़े अखाड़े हैं, जहां से ताजिया निकाली जाती है, वे सभी अपनी ताजिया मोइनुद्दीन से ही बनवाते हैं। ताजिया की चमक और रोशनी के लिए वे उसमें इलेक्ट्रिक कनेक्शन भी देते हैं, जिससे यह रंग-बिरंगी लाइटों से जगमगा उठती है।

अब कम कर दी ताजिया की संख्या

मोइनुद्दीन बताते हैं कि पहले परिवार के लोग मिलकर 15 से 20 दिनों में छोटी-बड़ी 50 से ज्यादा ताजिया बना लेते थे। लेकिन अब उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता, इसलिए उन्होंने ताजिया बनाने की संख्या घटा दी है। अब वे सिर्फ शेरघाटी क्षेत्र के बड़े अखाड़ों की ताजिया ही बनाते हैं, जबकि पहले जिले से बाहर जाकर भी यह काम करते थे।

सवाल-जवाब

मोहम्मद मोइनुद्दीन अंसारी कौन हैं?
वे बिहार के गया जिले के आमस प्रखंड के बैदा गांव के रहने वाले हैं और चार पीढ़ियों से ताजिया बनाने वाले परिवार से ताल्लुक रखते हैं। पेशे से वे दर्जी भी हैं।
उनके परिवार में ताजिया बनाने का काम किसने शुरू किया?
इसकी शुरुआत मोइनुद्दीन के दादा सुखाड़ी मियां ने की थी, फिर उनके पिता रसूल अंसारी ने इसे आगे बढ़ाया और अब उनके बच्चे भी यह काम करते हैं।
एक ताजिया बनाने में कितना खर्च और कितनी कमाई होती है?
एक ताजिया बनाने के बदले उन्हें करीब 5 से 7 हजार रुपये मिलते हैं, जबकि एक पूरी ताजिया तैयार करने में करीब 20 हजार रुपये तक का खर्च आता है।
40 साल पहले एक ताजिया की कीमत कितनी थी?
करीब 40 साल पहले मोइनुद्दीन एक ताजिया महज 40 रुपये में बनाते थे।
एक ताजिया बनाने में कितना समय लगता है?
एक ताजिया बनाने में करीब 6 से 7 दिन लग जाते हैं।
इस साल उन्हें किन जगहों से ऑर्डर मिले हैं?
इस बार उन्हें हमजापुर, शेरघाटी मियां बाड़ा, वारिस नगर, लगन तकिया और नई बाजार शेरघाटी से ऑर्डर मिले हैं।
अब उन्होंने ताजिया बनाने की संख्या क्यों कम कर दी है?
उनका स्वास्थ्य अब ठीक नहीं रहता, इसलिए वे सिर्फ शेरघाटी क्षेत्र के बड़े अखाड़ों की ही ताजिया बनाते हैं, जबकि पहले जिले से बाहर भी जाते थे।
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