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उज्जैन में महाकाल के प्रसाद के रूप में प्रसिद्ध हुई 75 साल पुरानी भांग, सावन में 50 फीसदी बढ़ती है मांगकल्चर
8 अग॰ 2026, 9:39 pm (82 दिन पहले)· 0

उज्जैन में महाकाल के प्रसाद के रूप में प्रसिद्ध हुई 75 साल पुरानी भांग, सावन में 50 फीसदी बढ़ती है मांग

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर के पास स्थित 75 साल पुरानी 'श्री महाकाल भांग घोटा' दुकान अपने खास मसालों और स्वाद के लिए दुनिया भर में जानी जाती है।

धर्म नगरी उज्जैन में भगवान महाकालेश्वर के दर्शन करने के साथ-साथ यहां की कई अनोखी परंपराओं का हिस्सा बनने की भी खास प्रथा है। मंदिर में दर्शन के समय भक्त आमतौर पर लड्डू, भुने चने और चिरौंजी का प्रसाद चढ़ाते हैं। लेकिन पूजा-अर्चना के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां की प्रसिद्ध भांग का स्वाद चखना नहीं भूलते। इस खास पेय को किसी साधारण नशे की वस्तु के बजाय भगवान शिव का पवित्र प्रसाद माना जाता है। अपने अद्भुत स्वाद और मनमोहक सुगंध के कारण यह भांग न केवल भारत में, बल्कि विदेशों से आने वाले पर्यटकों के बीच भी काफी लोकप्रिय हो चुकी है।

गोपाल मंदिर के पास 75 साल पुराना प्रसिद्ध ठिकाना

महाकालेश्वर मंदिर के निकट गोपाल मंदिर के ठीक सामने स्थित 'श्री महाकाल भांग घोटा' नाम की दुकान पिछले 75 वर्षों से संचालित हो रही है। अपनी अनोखी बनावट और खास स्वाद के लिए पहचानी जाने वाली इस दुकान पर आम दिनों में रोजाना 10 से 15 किलो तक भांग की बिक्री होती है। महाशिवरात्रि, होली और विशेष रूप से सावन के पावन महीने के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। सावन के दिनों में इस दुकान पर भांग की कुल बिक्री में 50 प्रतिशत तक की जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिलती है। दूर-दूर से आने वाले भक्त न केवल यहां रुककर इसका आनंद लेते हैं, बल्कि अपने परिजनों के लिए भी इसे पैक करवाकर ले जाते हैं।

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मसाले, मेवे और भांग से बने विविध व्यंजन

यहां तैयार की जाने वाली ठंडाई की खासियत इसमें मिलाए जाने वाले दर्जनों खास मसाले और अन्य सामग्रियां हैं। इसमें ताजे फलों के रस, गाढ़ा दूध, दही, मलाईदार रबड़ी और छाछ का संतुलन बनाया जाता है, जिसके साथ प्रचुर मात्रा में सूखे मेवे मिलाए जाते हैं। ठंडाई के अलावा, इस दुकान पर भांग से तैयार कई अन्य उत्पाद भी मिलते हैं, जिनमें भांग की गोलियां, स्वादिष्ट गुलकंद और पारंपरिक पुड़िया शामिल हैं। मंदिर दर्शन के बाद भक्त इसे प्रसाद स्वरूप ग्रहण करना अपनी यात्रा का मुख्य हिस्सा मानते हैं।

औषधीय गुण और अत्यधिक सेवन के खतरे

दुकान के संचालक रमेश शर्मा के अनुसार, धार्मिक मान्यताओं में यह उल्लेख मिलता है कि भगवान शिव भांग का उपयोग एक औषधि के रूप में करते थे। यदि सीमित और उचित मात्रा में इसका सेवन पारंपरिक तरीके से किया जाए, तो यह पाचन तंत्र को मजबूत करने और कई छोटी-मोटी शारीरिक समस्याओं को दूर रखने में मदद कर सकती है। हालांकि, रमेश शर्मा यह भी आगाह करते हैं कि बिना आदत के पहली बार अत्यधिक मात्रा में या केवल नशे के उद्देश्य से इसका सेवन करना सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है और व्यक्ति को बीमार भी कर सकता है।

सवाल-जवाब

उज्जैन में प्रसिद्ध भांग की दुकान का नाम क्या है?
गोपाल मंदिर के सामने स्थित इस 75 साल पुरानी दुकान का नाम 'श्री महाकाल भांग घोटा' है।
श्री महाकाल भांग घोटा पर रोजाना कितनी भांग बिकती है?
आम दिनों में यहां रोजाना करीब 10 से 15 किलो भांग बिक जाती है।
सावन के महीने में भांग की मांग कितनी बढ़ जाती है?
सावन के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण भांग की बिक्री में 50 प्रतिशत तक का इजाफा होता है।
भांग की ठंडाई में कौन-कौन सी सामग्रियां मिलाई जाती हैं?
इसमें खास मसाले, दूध, दही, रबड़ी, छाछ, फलों के रस और सूखे मेवे मिलाए जाते हैं।
क्या सीमित मात्रा में भांग का सेवन सेहत के लिए फायदेमंद है?
दुकानदार के अनुसार सीमित और पारंपरिक तरीके से सेवन करने पर यह पाचन सुधारने में मदद करती है, लेकिन अत्यधिक सेवन नुकसानदेह हो सकता है।
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