अजमेर जिले से लगभग 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित धार्मिक नगरी पुष्कर में हर साल लगने वाला अंतरराष्ट्रीय मेला इस बार बिल्कुल नए और अनूठे आयोजनों के साथ सैलानियों को आकर्षित करने की तैयारी में है। यह मेला अपनी गहरी धार्मिक आस्था, समृद्ध राजस्थानी लोक संस्कृति, विशाल पशु मेलों और रंग-बिरंगे कार्यक्रमों के कारण दुनियाभर में अपनी एक खास पहचान रखता है। इस बार के आयोजन को खास तौर पर यादगार बनाने के लिए वर्ष 2026 को अंतरराष्ट्रीय महिला कृषक दिवस के रूप में मनाने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। मेले के इतिहास में पहली बार ऐसा होगा जब पशुपालन से जुड़ी महिलाएं अपनी बैलगाड़ियों के साथ भव्य परेड में हिस्सा लेती हुई नजर आएंगी, जो इस बार के पूरे आयोजन का सबसे बड़ा और अनूठा आकर्षण साबित हो सकता है।
ग्रामीण संस्कृति को मिलेगा वैश्विक मंच
पशु चिकित्सा विभाग के निदेशक डॉ. नवीन परिहार ने इस अनूठी पहल के बारे में विस्तार से जानकारी साझा करते हुए बताया कि पुष्कर के अलावा तबीजा और डुमाड़ा सहित आसपास के तमाम ग्रामीण इलाकों में महिलाएं रोजमर्रा के कामकाज के रूप में अपनी गायों और भैंसों के वास्ते बैलगाड़ियों पर सवार होकर चारा लाने का काम करती हैं। ग्रामीण अंचल की इसी बेहद सहज और पारंपरिक जीवनशैली को अब अंतरराष्ट्रीय पुष्कर मेले के बड़े मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा। इन ग्रामीण महिलाओं द्वारा निकाली जाने वाली बैलगाड़ियों की यह विशाल परेड प्रदेश की कृषि व्यवस्था और पशुपालन से जुड़ी समृद्ध संस्कृति की बेहद अनूठी झलक देश-विदेश से आने वाले मेहमानों के सामने पेश करेगी।
मारवाड़ी घोड़ों की रेवाण चाल प्रतियोगिता बनेगी आकर्षण
इस बार के पुष्कर मेले में मारवाड़ी नस्ल के घोड़ों की विशेष रेवाण चाल प्रतियोगिता भी सैलानियों और पशुपालकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र रहने वाली है। मारवाड़ी घोड़ों की अपनी एक बेहद विशिष्ट और अनूठी पहचान होती है तथा इनकी चाल को रेवाण चाल के नाम से जाना जाता है। अब तक इस तरह की विशिष्ट प्रतियोगिता का आयोजन पुष्कर मेले में इतने बड़े पैमाने पर पहले कभी नहीं किया गया था। पहली बार इस प्रकार की प्रतियोगिता को आधिकारिक रूप से आयोजित करने की पूरी तैयारियां चल रही हैं, जिससे देश भर से आने वाले घोड़ा प्रेमियों के साथ-साथ आम पर्यटकों को भी एक बिल्कुल नया और रोमांचक अनुभव प्राप्त होगा।
शो जंपिंग और टेंट पेगिंग में दिखेगा राष्ट्रीय कौशल
मेले के दौरान हर वर्ष आयोजित होने वाली पारंपरिक शो जंपिंग और टेंट पेगिंग प्रतियोगिताओं को इस बार और अधिक भव्य और बड़े स्तर पर संपन्न कराया जाएगा। आयोजकों की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक इस बार राष्ट्रीय स्तर के कई नामचीन खेल प्रतिभागियों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर के जाने-माने शो जंपर्स के भी पुष्कर पहुंचने की पूरी संभावना है। विभिन्न खेल अकादमियों और प्रतिभागियों ने भी इस प्रतिष्ठित मेले में अपनी घुड़सवारी की कला का प्रदर्शन करने के लिए गहरी रुचि दिखाई है। इन तमाम रोमांचक घुड़सवारी मुकाबलों के जुड़ जाने से इस बार मेले का उत्साह और उमंग कई गुना बढ़ जाने की उम्मीद है।
परंपरा और नवाचार का अनूठा संगम
धार्मिक मान्यताओं और पुरानी परंपराओं को सहेजते हुए इस बार पुष्कर मेले के आयोजकों का पूरा जोर नए प्रयोगों और नवाचारों पर है। ग्रामीण महिलाओं की बैलगाड़ी परेड, मारवाड़ी घोड़ों की रेवाण चाल और उच्च स्तर पर आयोजित होने वाले घुड़सवारी के मुकाबले इस बार के उत्सव को पिछले सभी संस्करणों से ज्यादा भव्य और आकर्षक रूप दे रहे हैं। हर साल देश के कोने-कोने से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी भारी संख्या में सैलानी पुष्कर की यात्रा पर आते हैं, और इन नए व अनोखे आयोजनों के जुड़ जाने से इस बार पर्यटकों की उत्सुकता और भीड़ में जबरदस्त बढ़ोतरी होने की पूरी संभावना है।



















