कृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर: मेष से मीन तक जानिए सभी 12 राशियों का राशिफल और ग्रह प्रभावराहुल गांधी के वोट चोरी आरोपों और 7.8 प्रतिशत GDP आंकड़ों पर विशेषज्ञों की तीखी बहस, जानिए क्या हैं आर्थिक और राजनीतिक मायनेमध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिकी इन्वेंट्री में बड़ी गिरावट से क्रूड ऑयल छह हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुंचाआइची नागोया एशियन गेम्स 2026 के लिए खेल मंत्रालय ने 768 सदस्यीय भारतीय दल को दी मंजूरी, 503 खिलाड़ी भरेंगे हुंकारईरान पर नए सैन्य हमलों की चेतावनी के साथ डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान, वैश्विक बाजारों में बढ़ी हलचलजल संरक्षण में छत्तीसगढ़ बना देश का सिरमौर, कैच द रेन अभियान के तीसरे चरण में हासिल किया पहला स्थानमहिला एशिया कप में चमारी अटापट्टू का ऐतिहासिक कमाल, 5 रन देकर 7 विकेट झटक इंडोनेशिया को 49 रन पर समेटादिल्ली के अस्पताल में 20 साल की युवती की सर्जरी, पेट से निकला 1.16 किलोग्राम बालों का गोलामोस्तिक के नए गणितीय ब्रिज से छोटे एआई मॉडल पाएंगे बड़ी क्षमता, बिना टेक्स्ट जनरेशन के आपस में जुड़ेंगे एआईअमृतसर में मां को पति पर हुआ शक, घर के पीछे जेसीबी से खुदाई कराई तो गड्ढे से निकला गायब बेटी का शव
बिहार के जहानाबाद में मिट्टी और गारे से बना ऐतिहासिक सुपी गढ़ बदहाली की मार झेल रहा, ग्रामीणों ने की पुरातात्विक खुदाई की मांगकल्चर
2 सित॰ 2026, 11:20 pm (55 मिनट पहले)· 3

बिहार के जहानाबाद में मिट्टी और गारे से बना ऐतिहासिक सुपी गढ़ बदहाली की मार झेल रहा, ग्रामीणों ने की पुरातात्विक खुदाई की मांग

जहानाबाद जिले के सुपी गांव में स्थित सदियों पुराना गढ़ जल संरक्षण और सुरक्षा व्यवस्था का अद्भुत नमूना है। मुगलों और अंग्रेजों के ठिकाने रहे इस ऐतिहासिक स्थल को सहेजने के लिए ग्रामीणों ने व्यापक पुरातात्विक उत्खनन की गुहार लगाई है।

बिहार की राजधानी पटना और धार्मिक नगरी मोक्ष भूमि के बीच अवस्थित जहानाबाद जिले का इतिहास अत्यंत प्राचीन एवं गौरवशाली रहा है। जिले की ऐतिहासिक समृद्धता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां वाणावर पहाड़ की तलहटी में सम्राट अशोक के समय की गुफाएं विद्यमान हैं। इसके अतिरिक्त हुलासगंज प्रखंड के दावथू गांव और रतनी प्रखंड के घेजन गांव में मिली भगवान बुद्ध की प्रतिमाएं इस क्षेत्र की प्राचीनता को मजबूती से प्रमाणित करती हैं। इसी कड़ी में जिला मुख्यालय से मात्र 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सुपी गांव अपने भीतर मुगल काल से भी पुराना इतिहास संजोए हुए है। कालंतर में ब्रिटिश हुकूमत के दौर की यादें भी इस स्थान से जुड़ी रही हैं।

प्राचीन स्थापत्य और जल दुर्ग जैसी सुरक्षात्मक संरचना

सुपी गांव में बना विशाल गढ़ आज भले ही समय की थपेड़ों के कारण छिन्न-भिन्न हो चुका हो, लेकिन इसके ऐतिहासिक अवशेष आज भी स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। इस गढ़ की बनावट किसी जल दुर्ग की भांति तैयार की गई थी, जहां चारों तरफ नहर के आकार का एक बड़ा जलाशय निर्मित था और उसके ठीक बीच में मुख्य गढ़ स्थित था। विशेषज्ञों और स्थानीय निवासियों के अनुसार यह संपूर्ण संरचना बाहरी आक्रमणकारियों से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाई गई थी। निर्माण शैली की बात करें तो इसमें मुख्य रूप से मिट्टी, गारे और चूने के मिश्रण का प्रयोग किया गया था। स्थल पर मिलने वाले प्राचीन बर्तनों के टुकड़े और मिट्टी के अवशेष यह संकेत देते हैं कि इस स्थान की वास्तविक उत्पत्ति मुगल काल से भी काफी पहले हुई थी।

ये भी पढ़ें

मुगल और ब्रिटिश सैन्य रणनीति का केंद्र

ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार मुगलों ने इस गढ़ को अपनी सैन्य आवश्यकताओं के अनुरूप ढाला था। उस दौर में स्थानीय स्तर पर उठने वाले जन विद्रोहों से अपनी सेना को सुरक्षित रखने और निगरानी रखने के लिए मुगलों ने इसे अपना प्रमुख ठिकाना बनाया। बाद में भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान अंग्रेजी सिपाहियों ने भी इस स्थान का रणनीतिक उपयोग किया। गढ़ की विशिष्ट वास्तुकला सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद सटीक थी। इसकी चारों दिशाओं के कोनों पर ऊंचे वॉच टावर निर्मित थे, जहां चौबीसों घंटे पहरेदार तैनात रहते थे ताकि दूर से आने वाले किसी भी खतरे का समय रहते मुकाबला किया जा सके।

अस्तित्व का संकट और पुरातात्विक उत्खनन की गुहार

संरक्षण के अभाव में सुपी का यह ऐतिहासिक गढ़ धीरे-धीरे अपनी पहचान खोता जा रहा है। वर्तमान स्थिति यह है कि नई पीढ़ी के युवाओं को इस स्थल के ऐतिहासिक महत्व और इसके निर्माण के मूल उद्देश्यों की स्पष्ट जानकारी तक नहीं है। स्थानीय लोग जब भी इस क्षेत्र में भ्रमण करते हैं या सामान्य गतिविधियों के दौरान मिट्टी की आवाजाही होती है, तो मुगलकालीन और उससे भी पुराने अवशेष बाहर निकल आते हैं। यही कारण है कि स्थानीय निवासी लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण या राज्य सरकार द्वारा इस गढ़ की वैज्ञानिक खुदाई कराई जाए।

गांव के निवासी ललित शंकर बताते हैं कि यह स्थान प्राचीन मगध की धरोहर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ललित शंकर ने कहा, "इस ऐतिहासिक गढ़ की खुदाई कराकर मगध की पुरातात्विक पहचान वापस लाई जानी चाहिए ताकि पर्यटन के नए द्वार खुल सकें।" उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वर्तमान में आमस दरभंगा एक्सप्रेसवे इस गढ़ के बिल्कुल समीप से गुजर रहा है। यदि सरकार इस पुरातात्विक स्थल की खुदाई कराकर इसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करती है, तो सुगम सड़क कनेक्टिविटी के कारण यह पूरे बिहार के लिए एक प्रमुख ऐतिहासिक आकर्षण का केंद्र बन सकता है।

सवाल-जवाब

सुपी गांव जहानाबाद जिला मुख्यालय से कितनी दूरी पर स्थित है?
सुपी गांव बिहार के जहानाबाद जिला मुख्यालय से 14 किलोमीटर की दूरी पर बसा हुआ है।
सुपी गढ़ के निर्माण में किन सामग्रियों का उपयोग किया गया था?
सुपी गढ़ की संरचना का निर्माण मिट्टी, गारे और चूने का उपयोग करके किया गया था, जिसके अवशेष आज भी मौजूद हैं।
गढ़ के चारों तरफ नहर जैसा जलाशय क्यों बनाया गया था?
यह नहर आकार का जलाशय गढ़ को आक्रमणकारियों और शत्रु सैनिकों से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया था।
जहानाबाद जिले में सम्राट अशोक और भगवान बुद्ध से जुड़े कौन से ऐतिहासिक स्थल हैं?
जहानाबाद में वाणावर पहाड़ की तलहटी में सम्राट अशोक के काल की गुफाएं हैं, जबकि हुलासगंज के दावथू और रतनी के घेजन गांव में भगवान बुद्ध की मूर्तियां मौजूद हैं।
सुपी गढ़ के समीप से कौन सा प्रमुख एक्सप्रेसवे गुजर रहा है?
सुपी गढ़ के ठीक बगल से आमस दरभंगा एक्सप्रेसवे गुजर रहा है, जो इसे बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR