राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल पुष्कर में विदेशी पर्यटकों का भारतीय संस्कृति के प्रति लगाव एक बार फिर देखने को मिला है। इटली से भारत यात्रा पर आए मार्टिना और टोमस नाम के कपल ने पुष्कर के पवित्र कृष्ण घाट पर पूरे हिंदू विधि-विधान के साथ शादी रचाई। अग्नि को साक्षी मानकर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दोनों ने सात फेरे लिए और जीवनभर एक-दूसरे का साथ निभाने का संकल्प लिया। घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की भीड़ ने इस भव्य विवाह समारोह का गवाह बनकर नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद दिया और इस यादगार पल को अपने कैमरों में दर्ज किया।
इंटरनेट पर शोध से लेकर पुष्कर पहुंचने तक का सफर
मार्टिना और टोमस पिछले कई वर्षों से एक-दूसरे को जानते हैं और लंबे समय से शादी के बंधन में बंधने की योजना बना रहे थे। भारत आने से पहले ही टोमस के मन में भारतीय परंपराओं और हिंदू धार्मिक स्थलों को लेकर गहरा आकर्षण था। उन्होंने इंटरनेट के माध्यम से हिंदू विवाह पद्धतियों, धार्मिक स्थलों और प्राचीन संस्कृति के बारे में व्यापक जानकारी जुटाना शुरू कर दिया था। इसी खोज के दौरान उनका संपर्क पुष्कर में 'द पुष्कर रूट' चलाने वाले स्थानीय गाइड मनीष पाराशर से हुआ। द पुष्कर रूट एक स्थानीय टूर एजेंसी है जो पर्यटकों को ब्रह्मा मंदिर, पुष्कर झील के 52 घाटों और स्थानीय सांस्कृतिक स्थलों की आध्यात्मिक सैर कराती है।
वाराणसी और जोधपुर की यात्रा के बाद चुना पुष्कर
भारत पहुंचने के बाद इतालवी युगल ने देश के कई प्रसिद्ध सांस्कृतिक शहरों का भ्रमण किया। उन्होंने वाराणसी और जोधपुर जैसे ऐतिहासिक नगरों का दौरा किया और वहां की विरासत को करीब से देखा। हालांकि, अलग-अलग स्थानों पर घूमने के बावजूद पुष्कर का शांत और आध्यात्मिक माहौल उनके दिल को सबसे ज्यादा भाया। इसके बाद उन्होंने मनीष पाराशर से पुष्कर में ही पूर्ण हिंदू रीति-रिवाज के साथ विवाह करने की इच्छा जाहिर की। दंपति की सहमति के बाद विवाह की तैयारियां शुरू की गईं और पवित्र पुष्कर झील के कृष्ण घाट को शादी के स्थल के रूप में चुना गया।
गूगल ट्रांसलेट और पद्म पुराण के जरिए समझे विवाह के नियम
शादी की रस्मों को केवल औपचारिक रूप से पूरा करने के बजाय, विदेशी युगल इन रस्मों के आध्यात्मिक महत्व को भी गहराई से समझना चाहता था। मनीष पाराशर ने पुष्कर के धार्मिक महत्व और पद्म पुराण में वर्णित पौराणिक मान्यताओं के बारे में जोड़े को विस्तार से जानकारी दी। भाषा की बाधा को दूर करने के लिए उन्होंने गूगल ट्रांसलेट तकनीक की सहायता ली, जिसके जरिए सभी धार्मिक सिद्धांतों और विवाह के वचनों को अंग्रेजी और इटैलियन भाषा में अनुदित करके समझाया गया। परंपराओं के अर्थ और सात फेरों के वचनों का महत्व समझ में आने के बाद मार्टिना और टोमस ने बिना किसी संदेह के यहीं शादी करने का अंतिम फैसला किया।
डेढ़ घंटे चला हवन और निभाई गई सिंदूरदान की रस्म
विवाह का आयोजन पूर्ण वैदिक रीति-रिवाज और धार्मिक नियमों के अनुसार संपन्न कराया गया। पुष्कर के पंडित वीरेंद्र पाराशर ने विधि-विधान से पूजा कराकर हवन कुंड की स्थापना की। संस्कृत के श्लोकों और मंत्रोच्चार के बीच मार्टिना और टोमस ने लगभग एक से डेढ़ घंटे तक हवन कुंड में आहुतियां दीं। इसके बाद पवित्र अग्नि की परिक्रमा करते हुए दोनों ने सात फेरे लिए और एक-दूसरे के प्रति निष्ठा की शपथ ली। सात फेरे पूरे होने पर टोमस ने हिंदू परंपरा का पालन करते हुए मार्टिना की मांग में सिंदूर भरा। इस दौरान दंपती के चेहरों पर भारतीय संस्कृति को अपनाने का उत्साह और खुशी साफ देखी जा सकती थी।
यूरोपीय पर्यटकों के बीच बढ़ रहा है भारतीय परंपराओं का क्रेज
तीर्थराज पुष्कर हमेशा से दुनिया भर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा है, लेकिन बीते एक दशक में यूरोपीय देशों के नागरिकों के बीच इंटरनेट के माध्यम से हिंदू संस्कृति को जानने-समझने की उत्सुकता काफी बढ़ी है। पुष्कर में लगातार विदेशी जोड़ों द्वारा सनातन परंपरा के अनुसार विवाह रचाने के मामले सामने आ रहे हैं। इस सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में पुष्कर के स्थानीय निवासियों और गाइडों की भी अहम भूमिका रही है। दीपु महर्षि, मनीष पाराशर, दामोदर पाराशर और दामु सर जैसे स्थानीय गाइड विदेशी मेहमानों को यहां के पौराणिक इतिहास, घाटों के महत्व और धार्मिक परंपराओं से अवगत कराने का काम निरंतर कर रहे हैं।



















