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किताबों और अपनी शायरी की कमाई से तैयार की गई हैदराबाद की 125 साल पुरानी हवेली अज़ीज़ बाग की दास्तानकल्चर
3 सित॰ 2026, 12:49 pm (55 दिन पहले)· 1

किताबों और अपनी शायरी की कमाई से तैयार की गई हैदराबाद की 125 साल पुरानी हवेली अज़ीज़ बाग की दास्तान

हैदराबाद में स्थित 125 साल पुरानी ऐतिहासिक हवेली अज़ीज़ बाग नवाब अज़ीज़ जंग बहादुर की काव्य प्रतिभा की अनूठी निशानी है, जिसे उन्होंने किसी शाही खजाने के बजाय अपनी प्रकाशित शायरी की किताबों की बिक्री से मिली राशि से बनवाया था।

भारत की सांस्कृतिक विरासत में कई ऐतिहासिक इमारतों की अपनी खास कहानी होती है, लेकिन तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में स्थित अज़ीज़ बाग हवेली का इतिहास सबसे अलग और अनूठा माना जाता है। दो-मंज़िला यह भव्य इमारत न केवल 19वीं सदी के अंतिम दौर के आवासीय स्थापत्य की सुंदर झलक प्रस्तुत करती है, बल्कि यह दक्कन की गंगा-जमुनी तहज़ीब का एक जीवंत प्रतीक भी है। वर्ष 1899 में निर्मित यह धरोहर पिछले 125 से अधिक वर्षों से अपनी स्थापत्य कला, पुरानी भव्यता और समृद्ध परंपरा को संजोए हुए सीना ताने खड़ी है।

साहित्यिक कमाई से निर्मित अनूठा आशियाना

अज़ीज़ बाग की स्थापना की कहानी इसे दुनिया की अन्य शाही हवेलियों से बिल्कुल अलग बनाती है। आमतौर पर रजवाड़ों के दौर में बड़े महलों और हवेलियों का निर्माण सरकारी खजाने, रियासती फंड या बड़े व्यापारिक मुनाफे के ज़रिये किया जाता था। हालांकि, अज़ीज़ बाग के मामले में ऐसा नहीं हुआ। इस हवेली के निर्माता नवाब अज़ीज़ जंग ने अपनी इस सपनों की इमारत के निर्माण के लिए किसी शाही खजाने या रियासती धन की मदद नहीं ली। उन्होंने अपनी प्रकाशित शायरी की किताबों की बिक्री से जो आमदनी जुटाई, उसी पूरी राशि से अपने परिवार के लिए इस आलीशान आवास का निर्माण करवाया। यह तथ्य न केवल उनकी उत्कृष्ट काव्य क्षमता को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि साहित्य और शायरी के बल पर भी एक ऐतिहासिक ढांचा खड़ा किया जा सकता है।

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नवाब अज़ीज़ जंग और निज़ाम दरबार में उनका रुतबा

हवेली के संस्थापक नवाब अज़ीज़ जंग बहादुर को अहमद अब्दुल अज़ीज़ तथा ख़ान बहादुर शम्स-उल-उलमा के नाम से भी प्रसिद्धि प्राप्त थी। वे हैदराबाद रियासत के छठे निज़ाम मीर महबूब अली ख़ान के शासनकाल में दरबार के सबसे प्रमुख और प्रतिष्ठित दरबारियों में गिने जाते थे। नवाब अज़ीज़ जंग फ़ारसी और उर्दू भाषा के प्रकांड विद्वान होने के साथ-साथ एक बेहद लोकप्रिय शायर भी थे। उनकी विद्वता, साहित्यिक कार्यों और दरबारी प्रतिष्ठा ने अज़ीज़ बाग को केवल एक पत्थर और गारे का ढांचा न बनाकर एक सांस्कृतिक और साहित्यिक केंद्र का दर्जा भी दिलाया।

सात पीढ़ियों का आवास और प्रशासनिक योगदान

निर्माण के बाद से ही अज़ीज़ बाग जंग परिवार का मुख्य रिहाइशी ठिकाना रहा है। इस ऐतिहासिक हवेली की एक खास बात यह भी है कि इसमें जंग परिवार की लगातार सात पीढ़ियां निवास कर चुकी हैं। इस परिवार का योगदान केवल प्रशासनिक सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हैदराबाद के सामाजिक, शैक्षणिक और साहित्यिक विकास में भी परिवार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नवाब अज़ीज़ जंग के इंतकाल के बाद यह ऐतिहासिक विरासत उनके पुत्र नवाब दीन यार जंग को मिली। नवाब दीन यार जंग निज़ाम कालीन हैदराबाद के एक प्रभावशाली प्रशासनिक अधिकारी थे और वर्ष 1948 से पहले वे हैदराबाद के कोतवाल पद पर कार्यरत रहे। भारत के एकीकरण और स्वतंत्रता के उपरांत उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा में अपनी सेवाएं जारी रखीं और महानिदेशक के शीर्ष पद तक पहुंचे।

यूरोपीय और स्थानीय स्थापत्य कला का भव्य संगम

वास्तुकला की दृष्टि से अज़ीज़ बाग नियोक्लासिकल और गोथिक रिवाइवल शैलियों का एक मनमोहक मिश्रण पेश करता है। हवेली के मुख्य प्रवेश द्वार पर आयोनिक स्तंभों के सहारे टिका एक विशाल पोर्टिको है, जो यूरोपीय क्लासिकल स्थापत्य का प्रतिनिधित्व करता है। इस यूरोपीय प्रभाव को स्थानीय भारतीय निर्माण शैलियों के साथ बड़ी निपुणता से जोड़ा गया है। इमारत के भीतरी हिस्से में चमचमाते संगमरमर के फर्श लगाए गए हैं, जबकि छत का निर्माण मद्रासी शैली में किया गया है। यह ऊंची छत मजबूत लकड़ी के बीमों पर टिकी हुई है, जो इमारत को टिकाऊपन प्रदान करने के साथ-साथ पारंपरिक वास्तुकला की मजबूती को भी दर्शाती है।

सवाल-जवाब

अज़ीज़ बाग हवेली का निर्माण कब और किसने करवाया था?
अज़ीज़ बाग हवेली का निर्माण वर्ष 1899 में नवाब अज़ीज़ जंग बहादुर ने करवाया था, जो हैदराबाद के छठे निज़ाम मीर महबूब अली ख़ान के प्रमुख दरबारी थे।
अज़ीज़ बाग के निर्माण के लिए धन कहाँ से जुटाया गया था?
इस हवेली का निर्माण नवाब अज़ीज़ जंग ने किसी सरकारी या शाही खजाने के बजाय अपनी प्रकाशित शायरी की किताबों की बिक्री से हुई कमाई से करवाया था।
अज़ीज़ बाग में जंग परिवार की कितनी पीढ़ियां रह चुकी हैं?
इस ऐतिहासिक हवेली में जंग परिवार की लगातार सात पीढ़ियां निवास कर चुकी हैं।
अज़ीज़ बाग की वास्तुकला की मुख्य विशेषताएं क्या हैं?
यह हवेली नियोक्लासिकल और गोथिक रिवाइवल शैली का संगम है, जिसमें आयोनिक स्तंभों वाला पोर्टिको, संगमरमर का फर्श और मद्रासी शैली की ऊंची छतें शामिल हैं।
नवाब दीन यार जंग कौन थे और उनका क्या योगदान था?
वे नवाब अज़ीज़ जंग के बेटे थे, जिन्होंने 1948 से पहले निज़ाम काल में हैदराबाद के कोतवाल के रूप में सेवा दी और बाद में भारतीय पुलिस सेवा में महानिदेशक बने।
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