जापान का केंद्रीय बैंक दिसंबर में बढ़ा सकता है ब्याज दरें, अर्थशास्त्रियों के नए सर्वेक्षण में बड़े नीतिगत बदलाव के संकेतरक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं, भाई की कलाई पर रक्षासूत्र सजाने से पहले करें यह विशेष पूजनबैंक ऑफ कनाडा की ब्याज दरों में तेज बढ़ोतरी की उम्मीदें अत्यधिक, स्टैंडर्ड चार्टर्ड का दावाक्लाउड क्षमता जुटाने में एंथ्रोपिक को आ रही दिक्कतें, टेक दिग्गजों से तनातनी बढ़ीऑस्ट्रेलियाई रिज़र्व बैंक के हॉसर ने महंगाई अनुमान बिगड़ने की दी चेतावनी, वैश्विक बाज़ारों में ऑस्ट्रेलियन डॉलर चढ़ाकोडरमा में हीरो ग्लैमर एक्स बनी युवाओं की पसंद, कम खर्च और डिजिटल खूबियों की बदौलत खरीदार संतुष्टकमजोर और खोखली हो रही हड्डियां बन सकती हैं गंभीर खतरा, जानिए ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण और बचावधनिष्ठा के प्रभाव में शमी पूजन और विनायक मंत्रों से संवारें अपना कल, जानिए अचूक अनुष्ठानएंथ्रोपिक में एरिक श्मिट की एक प्रतिशत हिस्सेदारी ला सकती है बीस अरब डॉलर का अप्रत्याशित मुनाफाअहम महंगाई आंकड़ों और बैंक ऑफ जापान की बैठक से पहले 158 के दायरे में फंसा जापानी येन
दशहरे के दिन क्यों खाई जाती है जलेबी, जानिए इस परंपरा के पीछे की दिलचस्प वजहकल्चर
21 अक्तू॰ 2026, 5:17 am (1 घंटे पहले)· 2

दशहरे के दिन क्यों खाई जाती है जलेबी, जानिए इस परंपरा के पीछे की दिलचस्प वजह

दशहरे के पावन अवसर पर जलेबी और इमरती खाने का चलन देश भर में देखा जाता है। रावण पर विजय के बाद भगवान श्रीराम की पसंद से जुड़ी कथाओं और बदलते मौसम के बीच इस अनोखे मिष्ठान प्रेम के पीछे कई दिलचस्प कहानियां जुड़ी हैं।

बुधवार को पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ विजयादशमी का पर्व मनाया जा रहा है। शाम के समय बुराई के प्रतीक रावण के पुतला दहन को देखने के लिए मैदानों में भारी भीड़ जुटती है। इस खास मौके पर पारंपरिक व्यंजनों का लुत्फ उठाने का भी एक अलग ही दौर रहता है। भारत के तमाम हिस्सों में दशहरे के खास दिन पर जलेबी और इमरती का सेवन करने की परंपरा बरसों से चली आ रही है। मगर क्या कभी आपने इस बात पर विचार किया है कि आखिर इस पर्व पर विशेष तौर पर इन रसीली मिठाइयों को खाने का चलन क्यों है?

धार्मिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम से जुड़ी एक प्रचलित कहानी इस दिन जलेबी खाने के चलन को रेखांकित करती है। ऐसा माना जाता है कि प्रभु श्रीराम को शशकुली नामक एक मिष्ठान बेहद प्रिय था, जिसे आज के समय में जलेबी का प्राचीन रूप माना जाता है। लंकापति रावण का वध करने के पश्चात अपनी इस ऐतिहासिक जीत की खुशी जाहिर करने के लिए मिठाई बांटने और खाने के रिवाजों से इसे जोड़ा जाता है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि इस प्रसंग को किसी अकाट्य ऐतिहासिक प्रमाण के बजाय मुख्य रूप से एक लोककथा और धार्मिक आस्था के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

ये भी पढ़ें

विजयादशमी का यह पावन पर्व मुख्य रूप से बुराई पर अच्छाई की चिरंतन विजय का संदेश देता है। ऐसे में इस खास दिन पर मीठा मुंह करना अपनी प्रसन्नता व्यक्त करने और एक-दूसरे के जीवन में मिठास घोलने का एक अनूठा माध्यम बन चुका है। यही मुख्य वजह है कि आज भी देश के अनगिनत परिवारों में रावण दहन का कार्यक्रम देखने के बाद अपने घरों को लौटते वक्त ताजी जलेबी खरीदने की पुरानी रवायत पूरी शिद्दत से निभाई जाती है।

इमरती की अपनी एक अलग पहचान है जो इसे इस त्योहार के दौरान लोगों की खास पसंद बनाती है। इस पारंपरिक मिष्ठान को मुख्य रूप से उड़द दाल के बैटर को तैयार करके बनाया जाता है और फिर इसे मीठी चाशनी में डुबोया जाता है। इसकी आकर्षक बनावट और मनमोहक रंग रूप इसे काफी खास बनाते हैं। हालांकि, जलेबी की भांति इमरती का भी कोई विशेष धार्मिक इतिहास सीधे तौर पर दशहरे से जुड़ा हुआ नहीं मिलता है। देश के विभिन्न इलाकों में इसे मेलों और पारिवारिक आयोजनों के दौरान बड़े चाव से खाया जाता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इसका सेवन मुख्य रूप से स्थानीय खानपान की पसंद पर आधारित है।

इस पर्व का आगमन आमतौर पर सितंबर या अक्टूबर के महीनों में होता है, जिस दौरान मौसम में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलता है। चिलचिलाती गर्मी से हल्की ठंडक की ओर बढ़ता यह सुहाना मौसम त्योहार के उल्लास को और अधिक बढ़ा देता है। इस समय बाजारों में सजी हुई मिठाइयों की दुकानें और मेलों में उमड़ने वाली भीड़ उत्सव के माहौल को जीवंत कर देती है। गरमागरम जलेबी का आनंद लेना हो या फिर चाशनी से भरपूर इमरती का स्वाद चखना हो, यह सब इस त्योहार का अभिन्न हिस्सा बन जाता है।

भारत एक सांस्कृतिक विविधता वाला देश है जहाँ विजयादशमी को मनाने के तौर-तरीके हर क्षेत्र में भिन्न होते हैं। उत्तर भारत में जहां रामलीला मंचन और पुतला दहन को प्रमुखता दी जाती है, वहीं अन्य प्रांतों में स्थानीय परंपराएं और खानपान की शैलियां अलग होती हैं। यही कारण है कि देश के हर कोने में जलेबी खाना अनिवार्य नहीं माना जाता है, बल्कि जिन स्थानों पर यह चलन लोकप्रिय है, वहां धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय स्वाद का एक अनूठा संगम देखने को मिलता है।

सवाल-जवाब

दशहरे पर कौन सी मिठाइयां सबसे ज्यादा खाई जाती हैं?
दशहरे के पावन अवसर पर देश के कई हिस्सों में जलेबी और इमरती खाने की पुरानी परंपरा है।
भगवान श्रीराम से कौन सी मिठाई का संबंध जोड़ा जाता है?
कहा जाता है कि श्रीराम को शशकुली नामक मिठाई पसंद थी, जिसे जलेबी का प्राचीन रूप माना जाता है।
इमरती मुख्य रूप से किस चीज से बनाई जाती है?
इमरती आमतौर पर उड़द की दाल के घोल से तैयार की जाती है और इसे चाशनी में डुबोया जाता है।
दशहरा मुख्य रूप से किस बात का प्रतीक है?
दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है जिस दिन रावण दहन किया जाता है।
क्या हर जगह दशहरे पर जलेबी खाना अनिवार्य है?
नहीं, भारत में दशहरा अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है और हर क्षेत्र की अपनी अलग स्थानीय परंपराएं होती हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Nyra Kaif@nyra-kaif·49 मिनट पहले

दशहरे पर गरमागरम जलेबी का स्वाद और क्रंची इमरती के बिना तो त्योहार का मज़ा ही आधा लगता है, कल शाम ही पक्का प्लान है मेरा!

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·49 मिनट पहले

अरे नायरा, बात तो सही है पर इतनी चाशनी देखकर मेरी कैलोरी काउंट वाली चिंता जाग जाती है, एक पीस से ज़्यादा हिम्मत नहीं होगी!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp