रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के अधिकारी हॉसर ने देश की अर्थव्यवस्था में महंगाई को लेकर चिंताजनक परिदृश्य पेश किया है। उनके आकलन के अनुसार वर्तमान मुद्रास्फीति की स्थिति अनुमान से अधिक गंभीर दिख रही है और यह केंद्रीय बैंक के पिछले आकलनों की तुलना में कुछ अधिक बनी हुई है। व्यापारिक जगत में लगातार बढ़ रही उत्पादन लागत कंपनियों के लिए सबसे बड़ी परेशानी साबित हो रही है। लंबे समय से उच्च स्तर पर अटकी महंगाई के कारण रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के नीति निर्माताओं के सामने मौद्रिक नीति को संतुलित रखने की जटिल चुनौती खड़ी हो गई है। आगामी ब्याज दरों पर निर्णय लेने से पहले बोर्ड के स्तर पर पूर्वानुमानों को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जिससे भविष्य के कदमों को लेकर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
क्षमता की कमी और आपूर्ति झटकों का असर
हॉसर ने स्पष्ट किया कि ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था में क्षमता की सीमाएं और अड़चनें उम्मीद से कहीं अधिक तीव्र साबित हुई हैं। लगातार आ रहे आपूर्ति झटकों के बीच मुद्रास्फीति की दीर्घकालिक अपेक्षाओं को निर्धारित लक्ष्य सीमा में बांधे रखना बेहद जरूरी हो गया है। कंपनियों की ओर से लागत दबावों को प्रमुख चिंता बताए जाने के कारण तिमाही ट्रिम्ड मीन मुद्रास्फीति के पिछले अनुमानों को पार कर जाने की पूरी संभावना बन रही है। हॉसर के अनुसार, यद्यपि कोई भी केंद्रीय बैंक केवल तात्कालिक मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए नीति नहीं बना सकता, फिर भी वर्तमान मूल्य वृद्धि के आंकड़े नीतिगत प्राथमिकताओं में अत्यधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मौद्रिक नीति अब तक अर्थव्यवस्था में प्रभावी रही है, लेकिन आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं और लगातार बने हुए लागत दबावों ने मुद्रास्फीति के दृष्टिकोण को और कमजोर कर दिया है। केंद्रीय बैंक के अधिकारियों का मानना है कि यदि आपूर्ति झटकों से निपटने के लिए उचित नीतिगत कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में मुद्रास्फीति की अपेक्षाओं के अनियंत्रित होने का गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। इसी वजह से ब्याज दरों को लेकर आने वाले फैसले अत्यधिक संवेदनशील हो चुके हैं।
श्रम बाज़ार में सुस्ती और आवास क्षेत्र के संकेत
आर्थिक संकेतकों के हालिया विश्लेषण से पता चलता है कि ऑस्ट्रेलियाई रोज़गार और आवास बाज़ार में नरमी के स्पष्ट लक्षण दिखाई देने लगे हैं। सितंबर माह की श्रम रिपोर्ट उम्मीद की तुलना में कुछ कमजोर दर्ज की गई थी। हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर बेरोज़गारी दर अब भी ऐतिहासिक रूप से निचले पायदान पर बनी हुई है, लेकिन समग्र श्रम बाज़ार में धीरे-धीरे लचीलापन और सुस्ती देखी जा रही है। रोज़गार सृजन की रफ्तार धीमी पड़ने और रियल एस्टेट क्षेत्र में नरमी आने के बावजूद, मूल्य स्थिरता बहाल करना केंद्रीय बैंक के लिए प्राथमिक लक्ष्य बना हुआ है।
नीति निर्माताओं का ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि गिरती रोज़गार गतिशीलता और बनी हुई महंगाई के बीच कैसे संतुलन बनाया जाए। हॉसर ने संकेत दिया कि अर्थव्यवस्था के कुछ हिस्सों में मांग घट रही है, लेकिन लागत वृद्धि का दबाव अभी भी कंपनियों के लाभ मार्जिन और उपभोक्ता कीमतों को प्रभावित कर रहा है। इसी कारण ब्याज दरों में कटौती या वृद्धि को लेकर केंद्रीय बैंक का बोर्ड सभी पहलुओं का गहराई से पुनर्मूल्यांकन कर रहा है।
रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया का नीतिगत ढांचा और कार्यप्रणाली
ऑस्ट्रेलिया में ब्याज दरों के निर्धारण और समग्र मौद्रिक नीति के संचालन की जिम्मेदारी रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के पास है। इस संस्था के नीतिगत निर्णय बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा लिए जाते हैं, जिनकी नियमित रूप से वर्ष में 11 बैठकें आयोजित होती हैं। इसके अतिरिक्त गंभीर आर्थिक परिस्थितियों में आवश्यकता पड़ने पर आपातकालीन बैठकें भी बुलाई जा सकती हैं। रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया का प्राथमिक संवैधानिक दायित्व देश में मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करना है, जिसका मानक 2 प्रतिशत से 3 प्रतिशत की वार्षिक मुद्रास्फीति दर बनाए रखना तय किया गया है।
मूल्य स्थिरता के अतिरिक्त, केंद्रीय बैंक का दायित्व राष्ट्रीय मुद्रा की स्थिरता बनाए रखना, पूर्ण रोज़गार को बढ़ावा देना और ऑस्ट्रेलियाई जनता की आर्थिक समृद्धि एवं सामाजिक कल्याण में योगदान देना भी है। इन सभी उद्देश्यों की पूर्ति के लिए केंद्रीय बैंक का सबसे मुख्य साधन आधिकारिक नकद दर को घटाना या बढ़ाना है। जब ब्याज दरों को अपेक्षाकृत उच्च स्तर पर रखा जाता है, तो ऑस्ट्रेलियन डॉलर को मजबूती मिलती है, जबकि दरों में कटौती से मुद्रा पर दबाव बनता है। ब्याज दरों के अलावा केंद्रीय बैंक आवश्यकता पड़ने पर गैर-पारंपरिक नीतिगत साधनों जैसे क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग का भी उपयोग करता है।
आधुनिक वित्तीय व्यवस्था में मुद्रास्फीति और मुद्रा विनिमय दर का संबंध
पारंपरिक अर्थशास्त्र में लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि मुद्रास्फीति किसी भी देश की मुद्रा के मूल्य को घटाती है, क्योंकि बढ़ती कीमतें पैसे की क्रय शक्ति को सीधे तौर पर कम कर देती हैं। हालांकि आधुनिक वित्तीय प्रणाली और सीमा पार पूंजी प्रवाह पर से नियंत्रण हटने के बाद यह समीकरण पूरी तरह बदल चुका है। वर्तमान दौर में जब किसी विकसित अर्थव्यवस्था में मध्यम से उच्च मुद्रास्फीति देखी जाती है, तो वहां का केंद्रीय बैंक कीमतों पर लगाम लगाने के लिए अपनी ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है।
उच्च ब्याज दरों के कारण वैश्विक निवेशकों को उस देश में अपनी पूंजी जमा करने पर बेहतर प्रतिफल प्राप्त होता है। अंतरराष्ट्रीय निवेशक अधिक लाभ कमाने के उद्देश्य से उस देश की ओर पूंजी प्रवाहित करते हैं, जिससे स्थानीय मुद्रा की कुल मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हो जाती है। ऑस्ट्रेलिया के संदर्भ में भी यही स्थिति लागू होती है, जहां उच्च मुद्रास्फीति के कारण केंद्रीय बैंक द्वारा सख्त नीति अपनाने की संभावना वैश्विक बाज़ार में ऑस्ट्रेलियन डॉलर की खरीदारी को प्रोत्साहित करती है।
क्वांटिटेटिव ईजिंग बनाम क्वांटिटेटिव टाइटनिंग की प्रक्रिया
जब सामान्य आर्थिक संकट के दौरान केवल ब्याज दरों में कटौती करना वित्तीय प्रणाली में ऋण प्रवाह को बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं होता, तब केंद्रीय बैंक क्वांटिटेटिव ईजिंग का सहारा लेते हैं। इस प्रक्रिया के अंतर्गत रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया नई मुद्रा सृजित करके वित्तीय संस्थानों से सरकारी और कॉर्पोरेट बॉन्ड खरीदता है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली में तरलता का संचार करना होता है ताकि वाणिज्यिक बैंक बाज़ार में आसानी से ऋण उपलब्ध करा सकें। अर्थव्यवस्था में अतिरिक्त नकदी आने के कारण क्वांटिटेटिव ईजिंग का परिणाम आमतौर पर ऑस्ट्रेलियन डॉलर में कमजोरी के रूप में सामने आता है।
इसके विपरीत, जब अर्थव्यवस्था में सुधार आ जाता है और मुद्रास्फीति बढ़ने लगती है, तब क्वांटिटेटिव टाइटनिंग की प्रक्रिया शुरू की जाती है। इस चरण में रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया वित्तीय संस्थानों से नई संपत्तियों की खरीद पूरी तरह बंद कर देता है। साथ ही, केंद्रीय बैंक अपने पास रखे परिपक्व हो चुके बॉन्ड के मूलधन का पुनर्निवेश करना भी रोक देता है। इस तरह वित्तीय प्रणाली से अतिरिक्त नकदी वापस खिंच जाती है, जो ऑस्ट्रेलियन डॉलर के लिए सकारात्मक और तेजी लाने वाला कारक साबित होती है।
मैक्रोइकॉनॉमिक आंकड़ों की भूमिका
किसी भी देश की मुद्रा का वास्तविक मूल्य वहां की अर्थव्यवस्था के बुनियादी स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। वैश्विक निवेशक अस्थिर और सिकुड़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं के बजाय सुरक्षित और विस्तार कर रही अर्थव्यवस्थाओं में अपना पैसा लगाना पसंद करते हैं। जब किसी देश में विदेशी पूंजी का आगमन बढ़ता है, तो घरेलू मुद्रा की कुल मांग और उसके विनिमय मूल्य में मजबूती आती है।
सकल घरेलू उत्पाद, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज़ पीएमआई, रोज़गार के आंकड़े और उपभोक्ता भावना सर्वेक्षण जैसे प्रमुख संकेतक सीधे तौर पर ऑस्ट्रेलियन डॉलर को दिशा प्रदान करते हैं। यदि आर्थिक आंकड़े मजबूती प्रदर्शित करते हैं, तो रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया को मौद्रिक सख्ती जारी रखने का आधार मिलता है, जिससे मुद्रा बाज़ार में स्थानीय मुद्रा को सीधा समर्थन प्राप्त होता है।
वैश्विक वित्तीय बाज़ारों में वर्तमान हलचल
हॉसर की टिप्पणियों और अमेरिकी डॉलर में आई व्यापक कमजोरी के बीच मुद्रा बाज़ार में ऑस्ट्रेलियन डॉलर ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ठोस बढ़त दर्ज की। AUD/USD की जोड़ी 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करते हुए 0.7017 के दो सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गई, जबकि दिन के कारोबार में यह 0.45 प्रतिशत की बढ़त के साथ 0.7009 के करीब टिकी रही। ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका दोनों ही बाज़ारों में सीमित आर्थिक आंकड़ों के प्रकाशन के बावजूद मुद्रा में यह तेजी दर्ज की गई।
अन्य वैश्विक परिसंपत्तियों में, एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान मंगलवार को USD/JPY की विनिमय दर 158.50 के स्तर के आसपास स्थिर बनी रही। विदेशी मुद्रा कारोबारी शुक्रवार को जारी होने वाले जापान के राष्ट्रीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़ों से पहले बड़े सौदे करने से बचते दिखे। इस बीच, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई तेजी ने जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर को समर्थन प्रदान किया।
कमोडिटी बाज़ार में सोने की कीमतें मंगलवार को किसी स्पष्ट दिशा के बिना कारोबार करती रहीं। पीली धातु 4,170 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के दायरे में मंडराती रही और सोमवार की गिरावट के बाद बढ़त हासिल करने के लिए संघर्ष करती दिखी। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट और डॉलर के कमजोर होने का असर सोने के उतार-चढ़ाव में देखा गया।
क्रिप्टोकरेंसी बाज़ार में, प्रौद्योगिकी शेयरों के साथ पिछले सप्ताह की गिरावट के बाद बिटकॉइन का नैस्डैक सूचकांक के साथ सहसंबंध फिर से बढ़ गया है। मैक्रोइकॉनॉमिक दबावों के चलते बाज़ार में 82,500 डॉलर का समर्थन स्तर जोखिम में दिखाई दे रहा है। के33 रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, तकनीकी शेयरों पर आधारित नैस्डैक की चाल के साथ बिटकॉइन का तालमेल फिर से मजबूत हुआ है।
इधर कॉर्पोरेट जगत में, एलन मस्क द्वारा स्थापित स्पेसएक्स मंगलवार के कारोबारी सत्र के समापन के बाद अपने तीसरे तिमाही के नतीजों की घोषणा करने जा रही है। नतीजों की घोषणा के बाद दूसरे पूर्ण कारोबारी दिवस यानी गुरुवार को कर्मचारियों और शुरुआती निवेशकों द्वारा रखे गए लगभग 1.3 अरब शेयर बिक्री के लिए पात्र हो जाएंगे, जिस पर पूरे वित्तीय बाज़ार की नजर टिकी हुई है।


















