जापान के केंद्रीय बैंक की तरफ से मौद्रिक नीतियों को सख्त करने की दिशा में अगला कदम दिसंबर के महीने में उठाया जा सकता है। अर्थशास्त्रियों के एक व्यापक सर्वेक्षण से यह निष्कर्ष निकला है कि बैंक ऑफ जापान अपनी आगामी अक्टूबर की बैठक में नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा, लेकिन साल के अंत तक यानी दिसंबर की समीक्षा बैठक में उधारी लागत में वृद्धि कर सकता है। यदि ऐसा होता है, तो जून के बाद से यह बैंक की तीसरी दर वृद्धि होगी। दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव, विशेषकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव तथा रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर चुकी हैं। इस वैश्विक उथल-पुथल ने ऊर्जा के आयात पर अत्यधिक निर्भर रहने वाले जापान के लिए महंगाई का नया दबाव खड़ा कर दिया है, जिससे निपटने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी जरूरी मानी जा रही है।
अर्थशास्त्रियों की राय और नीतिगत फैसलों का समय
सर्वेक्षण में शामिल किए गए कुल 78 बाजार विश्लेषकों में से 54 का यह स्पष्ट मानना है कि बैंक ऑफ जापान दिसंबर में अपनी प्रमुख ब्याज दरों में बढ़ोतरी का फैसला लेगा। दूसरी तरफ, अधिकांश जानकारों का यह भी आकलन है कि अक्टूबर की नीतिगत बैठक में केंद्रीय बैंक वर्तमान दरों को यथावत बनाए रखेगा। केंद्रीय बैंक के आंतरिक सूत्रों से मिले संकेतों से पता चलता है कि बैंक ऑफ जापान के कई वरिष्ठ अधिकारी जल्दबाजी में कदम उठाने के बजाय कुछ और आर्थिक आंकड़ों का इंतजार करना चाहते हैं। वे विशेष रूप से यह देखना चाहते हैं कि पूर्व में की गई दर वृद्धियों ने देश की वित्तीय परिस्थितियों, बैंकिंग तंत्र और औद्योगिक गतिविधियों पर क्या असर डाला है। इसके अतिरिक्त, कई पूर्वानुमानकर्ताओं का यह भी अनुमान है कि जापान को बढ़ती कीमतों और अपनी राष्ट्रीय मुद्रा येन की कमजोरी से निपटने के लिए वर्ष 2027 में भी कम से कम दो बार ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं।
अल्ट्रा लूज मौद्रिक नीति से सख्त रुख तक का सफर
बैंक ऑफ जापान देश का शीर्ष केंद्रीय बैंक है, जिसकी मुख्य जिम्मेदारी मौद्रिक नीति तय करना, बैंक नोट जारी करना और मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए मुद्रा की आपूर्ति को नियंत्रित करना है। बैंक का प्रमुख लक्ष्य देश में लगभग 2 प्रतिशत की मुद्रास्फीति दर बनाए रखना है। जापान लंबे समय तक अपस्फीति और सुस्त आर्थिक वृद्धि से जूझता रहा, जिसके कारण वर्ष 2013 में केंद्रीय बैंक ने अल्ट्रा लूज मौद्रिक नीति की शुरुआत की थी। इस आक्रामक रणनीति के तहत बैंक ने क्वांटिटेटिव एंड क्वालिटेटिव ईजिंग यानी क्यूक्यूई का सहारा लिया, जिसके अंतर्गत बड़े पैमाने पर नोट छापकर सरकारी और कॉरपोरेट बॉन्ड खरीदे गए ताकि वित्तीय प्रणाली में तरलता बनी रहे। वर्ष 2016 में बैंक ने अपनी रणनीति को और आक्रामक बनाते हुए पहले नकारात्मक ब्याज दरें लागू कीं और फिर 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड को नियंत्रित करने की नीति अपनाई। हालांकि, वैश्विक परिस्थितियों में आए भारी बदलाव के बाद मार्च 2024 में बैंक ऑफ जापान ने आखिरकार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की और दशक भर पुरानी अपनी अल्ट्रा लूज मौद्रिक नीति से पीछे हटने का औपचारिक फैसला लिया।
कमजोर येन और आयातित महंगाई का दोहरा संकट
केंद्रीय बैंक द्वारा वर्षों तक जारी रखे गए भारी मौद्रिक प्रोत्साहन का नकारात्मक असर राष्ट्रीय मुद्रा येन पर पड़ा और यह दुनिया की अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले लगातार कमजोर होती चली गई। यह स्थिति वर्ष 2022 और 2023 में तब और ज्यादा गंभीर हो गई, जब पश्चिमी देशों के प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने दशकों की सबसे भीषण महंगाई को नियंत्रित करने के लिए तेजी से ब्याज दरें बढ़ाईं, जबकि बैंक ऑफ जापान अपनी बेहद ढीली नीति पर अड़ा रहा। इस नीतिगत अंतर के चलते वैश्विक निवेशकों ने येन से दूरी बनाई और मुद्रा का मूल्य तेजी से गिरा। हालांकि वर्ष 2024 में जब बैंक ने अपनी इस नीति को त्यागने का रुख किया, तब येन में कुछ सुधार देखने को मिला। इसके बावजूद, कमजोर मुद्रा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल सहित ऊर्जा उत्पादों की ऊंची कीमतों ने मिलकर जापानी अर्थव्यवस्था में आयातित महंगाई को बढ़ावा दिया, जिसके चलते मुद्रास्फीति बैंक के 2 प्रतिशत के तय लक्ष्य से ऊपर निकल गई। इसके साथ ही जापान में वेतन वृद्धि की मजबूत संभावनाओं ने भी महंगाई के दबाव को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
वैश्विक वित्तीय बाजारों में हलचल और तकनीकी संपत्तियों की स्थिति
मुद्रा बाजार के दैनिक कारोबार में विभिन्न संपत्तियों के भीतर मिला-जुला रुख देखने को मिला है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान मंगलवार को यूएसडी जेपीवाई की जोड़ी 158.50 के आसपास स्थिर बनी रही। विदेशी मुद्रा कारोबारी शुक्रवार को जारी होने वाले जापान के राष्ट्रीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक मुद्रास्फीति आंकड़ों से पहले किसी बड़े जोखिम से बचते हुए प्रतीक्षा की मुद्रा में दिखे। वहीं अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तर ने जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर को समर्थन प्रदान किया। दूसरी तरफ, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत बढ़त हासिल की और यह 0.7000 के पार निकलकर 0.7017 के दो सप्ताह के उच्च स्तर तक पहुंच गया। यह उछाल अमेरिकी डॉलर की व्यापक कमजोरी के कारण आया, जबकि उस दौरान अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया दोनों के आर्थिक कैलेंडर में महत्वपूर्ण आंकड़ों की कमी थी।
कमोडिटी और डिजिटल परिसंपत्तियों के क्षेत्र में भी उतार-चढ़ाव जारी रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें मंगलवार को किसी स्पष्ट दिशा के बिना लगभग 4,170 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के दायरे में घूमती रहीं। सोमवार की गिरावट के बाद पीली धातु में तेजी की रफ्तार धीमी रही, हालांकि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट और डॉलर इंडेक्स के फिसलने से इसे कुछ सहारा मिला। डिजिटल संपत्तियों में बिटकॉइन का नैस्डैक के साथ सह-संबंध फिर से बढ़ता हुआ देखा गया। पिछले सप्ताह तकनीकी शेयरों में आई बिकवाली के बाद बिटकॉइन पर दबाव बना था और वृहद आर्थिक परिस्थितियों के चलते इसके 82,500 डॉलर के समर्थन स्तर के टूटने का जोखिम मंडरा रहा था। के33 रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि पिछले सप्ताह की गतिविधियों के बाद बिटकॉइन ने प्रौद्योगिकी केंद्रित नैस्डैक इंडेक्स के साथ अपनी चाल का तालमेल फिर से शुरू कर दिया है। कॉरपोरेट जगत में एलन मस्क द्वारा स्थापित स्पेसएक्स के मंगलवार के सत्र के बाद तीसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी होने हैं। निवेशकों की नजर नतीजों के अलावा उस स्थिति पर टिकी है जब बृहस्पतिवार को कर्मचारियों और शुरुआती निवेशकों द्वारा रखे गए लगभग 1.3 अरब शेयर बिक्री के लिए पात्र हो जाएंगे।
















