नागपुर के कॉलेज में छात्रा को आपत्तिजनक संदेश भेजने का आरोप, पिता ने प्रोफेसर पर उठाया हाथशारदीय नवरात्रि की महाअष्टमी पर मां महागौरी और तुलसी पूजा का विशेष महत्व, जानें शुभ मुहूर्त और स्वास्थ्य लाभवेस्टइंडीज सीरीज में बाहर बैठे रहे वैभव सूर्यवंशी, कप्तान श्रेयस अय्यर ने बताई प्लेइंग इलेवन की हकीकतसाप्ताहिक राशिफल 18 से 24 अक्टूबर 2026: इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, नौकरी में पदोन्नति और धन लाभ के प्रबल योगमूलांक 9 राशिफल 18 अक्टूबर 2026: बातचीत में बढ़ेगा आपका प्रभाव, जल्दबाजी में बड़े वादे करने से बचेंबेंगलुरु टी20 में बारिश के व्यवधान के बीच भारतीय बल्लेबाजों ने 17 गेंदों में ठोकी तूफानी फिफ्टीमुंबई के विद्याविहार ब्रिज के नामकरण पर छिड़ी सियासत, उद्धव गुट और बीजेपी आमने-सामनेकिचन के लिए मसाले खरीदते समय न हों धोखे का शिकार, शुद्धता जांचने के लिए ध्यान रखें ये 7 महत्वपूर्ण बातेंझांसी की कल्पना ने आजीविका मिशन से मदद न मिलने पर खोली कपड़ों की दुकान, बनीं आत्मनिर्भरअष्टमी-नवमी पर कन्या पूजन के लिए बनाएं एकदम मुलायम काले चने, नोट करें पारंपरिक आसान विधि
गाजीपुर की चार सदी पुरानी रामलीला में रायबरेली के कलाकारों का जलवा, बाल कलाकार रौनक बने राम और राजा भैया बने रावणकल्चर
18 अक्तू॰ 2026, 10:11 am (2 घंटे पहले)· 0

गाजीपुर की चार सदी पुरानी रामलीला में रायबरेली के कलाकारों का जलवा, बाल कलाकार रौनक बने राम और राजा भैया बने रावण

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में चार सौ साल से आयोजित हो रही ऐतिहासिक रामलीला में रायबरेली के कलाकार अपने अभिनय से जान फूंक रहे हैं, जहां नन्हे कलाकार से लेकर तीन दशक पुराने मंझे हुए अभिनेता मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में चार शताब्दियों से निरंतर चली आ रही पारंपरिक रामलीला आज भी अपनी भव्यता और विशिष्ट मंचन शैली के चलते देशभर में अलग पहचान बनाए हुए है। इस ऐतिहासिक प्रस्तुति की आत्मा वे कलाकार हैं जो केवल मंच पर अभिनय नहीं करते, बल्कि उन पौराणिक पात्रों के आचार-विचार को अपने दैनिक आचरण में भी उतार लेते हैं। इस पारंपरिक आयोजन को जीवंत बनाने के लिए रायबरेली से आए कलाकार लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इस वर्ष भी मुख्य भूमिकाओं में शामिल बाल कलाकार रौनक तिवारी, अनुभवी अभिनेता राजा भैया तिवारी और नन्हे राज तिवारी की कलाकारी दर्शकों के दिलों को छू रही है।

नन्हे रौनक की मर्यादा और राम का स्वरूप

भगवान श्रीराम के स्वरूप में मंच पर उतरने वाले रौनक तिवारी की आयु केवल 12 से 14 वर्ष के बीच है। इतनी कम उम्र होने के बावजूद जब वे रंगमंच पर आते हैं, तो उनकी भाव-भंगिमा और संवाद अदायगी किसी मंझे हुए मंचीय कलाकार जैसी नजर आती है। वे पिछले 3 वर्षों से लगातार प्रभु श्रीराम का पात्र निभाते आ रहे हैं। इस भूमिका में गहराई लाने के लिए वे अपने गुरु से विशेष तौर पर संस्कृत श्लोकों का शुद्ध उच्चारण और उनका सस्वर पाठ सीखते हैं, जिससे मंच पर उनकी वाणी का प्रभाव अत्यंत गहरा पड़ता है।

ये भी पढ़ें

रौनक बताते हैं कि प्रभु श्रीराम सत्य, धर्म और मर्यादा के सर्वोच्च आदर्श हैं, इसलिए वे अपने निजी जीवन में भी अनुशासित और मर्यादित रहने का पूरा प्रयास करते हैं। कई बार ऐसा होता है कि मंचन समाप्त होने के बाद जब वे आम लोगों के बीच जाते हैं, तो दर्शक उन्हें श्रद्धावश नमन करने लगते हैं और असल जीवन में भी सम्मान देते हैं। इस आदर के कारण उनके ऊपर अपने आचरण को सदैव मर्यादित बनाए रखने का एक स्वाभाविक दायित्व आ जाता है। शुरुआत में इस गंभीर और पवित्र पात्र को निभाना उनके लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण था, परंतु निरंतर अभ्यास और गुरु के मार्गदर्शन ने अब इसे काफी सहज बना दिया है।

तीन दशकों का अनुभव और रावण का गूंजता अट्टहास

मंच पर लंकापति रावण की गर्जना करने वाले राजा भैया तिवारी इस रामलीला के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित कलाकारों में गिने जाते हैं। पिछले 25 से 30 वर्षों से लगातार रावण की भूमिका निभा रहे राजा भैया का अभिनय बहुआयामी रहा है। उन्होंने समय-समय पर मंथरा, भगवान परशुराम और माता शबरी जैसे बेहद कठिन और परस्पर भिन्न किरदारों को भी उतनी ही स्वाभाविकता के साथ मंच पर साकार किया है। उनका कहना है कि वे मंच पर भले ही अहंकारी राक्षसराज का रूप धरते हैं, किंतु उनके अंतर्मन में केवल भगवान राम के प्रति अगाध श्रद्धा वास करती है। रावण के अभिनय का मूल संदेश ही यही है कि अहंकार का अंत निश्चित होता है, और इसी भाव को वे पूरी शिद्दत से दर्शकों के सामने रखते हैं।

राजा भैया की भारी आवाज और उनका विशिष्ट अट्टहास इस रामलीला का सबसे प्रमुख आकर्षण माना जाता है। उनके इस खूंखार ठहाके की लोकप्रियता इतनी अधिक है कि पिछले 3 वर्षों से उनकी इस हंसी को बाकायदा स्टूडियो में रिकॉर्ड किया जाने लगा है। विजयादशमी यानी दशहरे के अंतिम दिन जब ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर उनकी गरजती हुई आवाज गूंजती है, तो समूचा वातावरण थर्रा उठता है और रावण के वध का दृश्य दर्शकों के लिए अत्यंत रोमांचकारी बन जाता है।

माता सीता का भावपूर्ण अभिनय और वनगमन का प्रसंग

मंच पर माता जानकी का पावन चरित्र निभाने वाले राज तिवारी उम्र में रौनक से करीब दो से तीन साल छोटे हैं। वे भी पिछले 3 वर्षों से इस महत्वपूर्ण दायित्व को पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं। अभिनय की शुरुआत में लंबे संवादों को कंठस्थ करना और स्त्री पात्र के कोमल हाव-भाव को अपनाना उनके लिए आसान नहीं था। इसके लिए उन्हें कड़ा अभ्यास करना पड़ा, जिसके बाद अब वे बहुत ही स्वाभाविक तरीके से सीता के चरित्र को मंच पर उतार पाते हैं।

राज तिवारी का कहना है कि पूरी रामलीला में उन्हें प्रभु श्रीराम के वनगमन का दृश्य सबसे ज्यादा भावुक और प्रिय लगता है। अयोध्या से विदा लेते समय के इस प्रसंग को करते हुए उनके भीतर एक गहरा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव पैदा होता है। यह अनुभव उन्हें अपनी सनातन परंपराओं, पारिवारिक संस्कारों और लोक संस्कृति के और अधिक निकट ले जाता है। इस तरह रायबरेली के इन कलाकारों की निष्ठा गाजीपुर की चार सौ साल पुरानी इस ऐतिहासिक धरोहर को लगातार समृद्ध कर रही है।

सवाल-जवाब

गाजीपुर की यह रामलीला कितने साल पुरानी है?
गाजीपुर की यह ऐतिहासिक रामलीला लगभग 400 साल पुरानी समृद्ध परंपरा का हिस्सा है।
भगवान राम की भूमिका कौन निभा रहे हैं और उनकी उम्र क्या है?
भगवान राम का किरदार 12 से 14 वर्ष के युवा कलाकार रौनक तिवारी निभा रहे हैं।
रावण का किरदार निभाने वाले राजा भैया तिवारी का कितना अनुभव है?
राजा भैया तिवारी पिछले 25 से 30 वर्षों से लगातार रावण की भूमिका निभा रहे हैं।
रावण के अट्टहास को लेकर क्या विशेष व्यवस्था की जाती है?
उनकी गर्जना जैसी हंसी को पिछले 3 वर्षों से स्टूडियो में रिकॉर्ड कर दशहरे के दिन लाउडस्पीकर पर बजाया जाता है।
माता सीता का किरदार कौन निभा रहे हैं?
माता सीता की भूमिका पिछले 3 वर्षों से युवा कलाकार राज तिवारी निभा रहे हैं।
राज तिवारी को रामलीला का कौन सा दृश्य सबसे ज्यादा प्रिय है?
राज तिवारी को भगवान राम के वनगमन का दृश्य सबसे अधिक भावुक और प्रिय लगता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Amit Patel@amit-patel·28 मिनट पहले

सिर्फ बारह साल की उम्र में राम का किरदार निभाना और इतने अनुशासन में रहना वाक़ई कमाल है।

Nyra Kaif@nyra-kaif·48 मिनट पहले

12 साल के बच्चे को असल ज़िंदगी में भी राम समझकर लोग नमन करने लगें, यह थोड़ा अजीब और डरावना दोनों है। इतने छोटे दिमाग पर इतना बोझ डालना ठीक नहीं, मंच का अभिनय मंच पर ही रहना चाहिए।

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·45 मिनट पहले

न्यरा, बच्चों के लिए कला से जुड़ना मानसिक अनुशासन सिखाता है, इसे इतना बड़ा बोझ क्यों मान रही हो?

Priya Sharma@priya-sharma·1 घंटे पहले

सिर्फ चौदह साल का बच्चा और पिछले तीन साल से राम का रोल कर रहा है! इतनी कम उम्र में डायलॉग डिलीवरी और वो भी संस्कृत के श्लोक याद रखना वाकई बड़ी बात है।

Neha Verma@neha-verma·1 घंटे पहले

प्रिया जी, सच कहा आपने! पिछले साल जब मैंने खुद इस रामलीला को देखा था, तो नन्हें रौनक के अभिनय ने मुझ पर भी ऐसा ही गहरा असर छोड़ा था।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp