दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में छात्रों से भरी एक पीजी बिल्डिंग के रविवार को अचानक ढह जाने के बाद अपने परिजनों को खोने वाले परिवार लगातार राष्ट्रीय राजधानी पहुंच रहे हैं। इस दुखद और भीषण हादसे के बीच मोतीलाल नेहरू कॉलेज के दो प्रोफेसरों ने मानवता की एक अनूठी मिसाल पेश की है। ये दोनों शिक्षक रविवार से ही लगातार राहत कार्यों और छात्रों की देखरेख में पूरी तत्परता से जुटे हुए हैं। घटना के बाद शुरुआती दो दिनों तक यानी रविवार और सोमवार को दोनों ने अपनी सुध-बुध खोकर बिना कुछ खाए-पिए सिर्फ अपने सभी विद्यार्थियों की सलामती और भलाई की कामना की। उन्होंने एक-एक छात्र को फोन करके उनका कुशलक्षेम जाना और यह सुनिश्चित किया कि कोई भी छात्र अनजाने में किसी बड़ी मुसीबत में न फंसा हो।
मोतीलाल नेहरू कॉलेज के तीन छात्रों का मामला
इस हादसे का शिकार हुई पीजी बिल्डिंग में मोतीलाल नेहरू कॉलेज के कुल तीन छात्र रह रहे थे। इनमें से एक छात्र की हालत इस समय बेहद गंभीर बनी हुई है और उसका इलाज अस्पताल में चल रहा है। दूसरा छात्र घटना के वक्त सरोजिनी नगर बाजार में कपड़े खरीदने गया हुआ था, जिसके कारण वह बाल-बाल बच गया और पूरी तरह सुरक्षित है। वहीं तीसरे छात्र को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है। मानवीय दृष्टिकोण दिखाते हुए इन दोनों प्रोफेसरों ने कॉलेज के प्रिंसिपल के पूरे सहयोग से संस्थान के अंदर ही प्रभावित और डरे हुए बच्चों के लिए ठहरने, खाने और पीने के सभी जरूरी इंतजाम पुख्ता किए हैं। इसके अलावा हादसे के खौफ से गहरे सदमे में पहुंचे छात्रों की नियमित काउंसलिंग भी करवाई जा रही है, ताकि वे मानसिक तनाव से उबर सकें।
प्रोफेसर प्रदीप और प्रोफेसर कान्हा राम मीणा की भूमिका
मानवता का परिचय देने वाले इन दोनों शिक्षकों के नाम प्रोफेसर प्रदीप और प्रोफेसर कान्हा राम मीणा हैं। वे दोनों घटना की सूचना मिलते ही उसी दिन तुरंत दुर्घटना स्थल पर पहुंच गए थे। उन्होंने जब उस जर्जर इमारत में रहने वाले अपने तीनों छात्रों को फोन मिलाया, तो उन्हें घटना की वास्तविकता का पता चला। एक छात्र को मलबे या इमारत से निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया जा चुका था, दूसरा बाजार में होने के कारण सुरक्षित था, जबकि तीसरा अभी भी उपचाराधीन है। प्रोफेसरों का कहना है कि इस इलाके के आसपास रहने वाले तमाम बच्चों के मन में इस हादसे के बाद भारी डर और दहशत बैठ गई है। वे लगातार छात्रों से संपर्क बनाए हुए हैं और इस बात पर जोर दे रहे हैं कि इस क्षेत्र की अधिकांश पीजी इमारतें बेहद जर्जर अवस्था में पहुंच चुकी हैं, जिस पर शासन और प्रशासन को तुरंत गंभीर संज्ञान लेना चाहिए।
कॉलेज परिसर में ही आश्रय और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
प्रोफेसर प्रदीप ने मीडिया से बातचीत में साझा किया कि वे दुर्घटना के पहले दिन से ही मौके पर मौजूद रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ निरीक्षण के दौरान भी घटनास्थल का दौरा किया था और उन्हें इस स्थिति से जुड़ी तमाम जरूरी जानकारियां मुहैया कराई थीं। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि सत्य निकेतन जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में छात्र बाहर से आकर किराए पर रहते हैं, इसलिए इलाके की सभी इमारतों का भौतिक सत्यापन होना चाहिए ताकि यह जांचा जा सके कि छात्र जिन आवासों में रह रहे हैं, उनकी संरचनात्मक स्थिति कैसी है।
वर्तमान में जो छात्र इस भयानक हादसे के बाद अत्यधिक भयभीत हैं या जो अन्य जर्जर हॉस्टलों व कमरों में रहने को मजबूर थे, उनके लिए मोतीलाल नेहरू कॉलेज के भीतर ही भोजन और आवास की सुरक्षित व्यवस्था कर दी गई है। कॉलेज के शिक्षक लगातार इन बच्चों के संपर्क में हैं। जो छात्र अभी गंभीर हालत में अस्पताल में है, उसकी स्वास्थ्य स्थिति पर हर पल नजर रखी जा रही है। जो छात्र अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुका है और जो सरोजिनी नगर में खरीदारी की वजह से सुरक्षित बच गया था, दोनों से लगातार संवाद किया जा रहा है। कॉलेज प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि उनका कोई भी विद्यार्थी इस खौफनाक और डरावने माहौल के साये में न जिए।




















