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जेएनयू परिसर में दीवारों पर विवादित नारों और सावरकर के चित्र पर आपत्तिजनक टिप्पणी से नया विवाददिल्ली
25 अक्तू॰ 2026, 12:27 am (50 मिनट पहले)· 1

जेएनयू परिसर में दीवारों पर विवादित नारों और सावरकर के चित्र पर आपत्तिजनक टिप्पणी से नया विवाद

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में दीवारों पर उमर खालिद और नक्सलबाड़ी से जुड़े नारों के साथ वीर सावरकर के चित्र पर आपत्तिजनक टिप्पणी दिखने के बाद एबीवीपी ने वामपंथी संगठनों पर शैक्षणिक माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया है।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के परिसर में दीवारों और सार्वजनिक स्थानों पर लिखे गए आपत्तिजनक और भड़काऊ राजनीतिक नारों को लेकर एक बार फिर तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। हालिया सामने आई तस्वीरों में विश्वविद्यालय परिसर की दीवारों पर “फ्री उमर खालिद” और “लॉन्ग लिव नक्सलबाड़ी” जैसे नारे लिखे हुए पाए गए हैं। इसके अलावा, परिसर में स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर के चित्र के साथ भी आपत्तिजनक लेखन किया गया है, जिसके लिए वामपंथी छात्र संगठन आइसा (AISA) के कैडर पर आरोप लग रहे हैं। इन गतिविधियों के सामने आने के बाद संस्थान के भीतर स्वस्थ लोकतांत्रिक संवाद के बजाय टकराव और उकसावे की राजनीति को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

दीवारों पर लिखे नारों और आयोजनों को लेकर उपजा रोष

परिसर की इमारतों पर उमर खालिद की रिहाई की मांग वाले नारों के साथ-साथ उग्र राजनीतिक विचारों से जुड़े नारों का लिखा जाना चर्चा का केंद्र बना हुआ है। उल्लेखनीय है कि आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा द्वारा विभिन्न खुले मंचों पर उमर खालिद के समर्थन में लगातार नारेबाजी की जाती रही है, जिस पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। अब विश्वविद्यालय की सार्वजनिक दीवारों पर इस प्रकार के नारों का उकेरा जाना परिसर के शांतिपूर्ण और शैक्षणिक वातावरण के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। उमर खालिद वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों से संबंधित कथित राष्ट्रविरोधी षड्यंत्र के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के तहत न्यायिक हिरासत में हैं।

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एबीवीपी का तीखा विरोध और प्रशासन से कार्रवाई की मांग

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की जेएनयू इकाई ने वामपंथी छात्र संगठनों और वामपंथी नेतृत्व वाले जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के रुख पर कड़ा एतराज जताया है। छात्र संगठन का कहना है कि विद्यार्थियों के कल्याण और वास्तविक शैक्षणिक समस्याओं को उठाने के स्थान पर परिसर में विभाजनकारी और हिंसक प्रतीकों को बढ़ावा देना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। संगठन ने रेखांकित किया कि जेएनयू विभिन्न वैचारिक दृष्टिकोणों और स्वस्थ विमर्श का केंद्र है, परंतु अभिव्यक्ति की आड़ में सार्वजनिक संपत्ति को विकृत करना, राष्ट्रीय महापुरुषों के चित्रों का अपमान करना और उग्र राजनीतिक विचारधाराओं का महिमामंडन करना कतई स्वीकार्य नहीं हो सकता। ऐसी हरकतें विद्यार्थियों के शांत वातावरण में अध्ययन करने के बुनियादी अधिकार को सीधे तौर पर चोट पहुंचाती हैं।

छात्र प्रतिनिधियों के बयान

एबीवीपी जेएनयू के अध्यक्ष मयंक पंचाल ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वैचारिक स्वतंत्रता का अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि किसी को भी राष्ट्रीय व्यक्तित्वों के प्रति अपमानजनक आचरण की खुली छूट मिल जाए। उन्होंने जोर देकर कहा,

"वीर सावरकर जैसे स्वतंत्रता सेनानी के चित्र के साथ आपत्तिजनक लेखन और परिसर की दीवारों पर उग्र राजनीतिक नारे लिखना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के वातावरण को दूषित करने का प्रयास है।"
मयंक पंचाल ने आगे स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय का आम छात्र वर्ग ऐसी अराजक राजनीति को खारिज करता है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि वह इन घटनाओं का तुरंत संज्ञान ले, जिम्मेदार लोगों की पहचान करे और परिसर की शैक्षणिक गरिमा को सुरक्षित रखने के लिए कड़ी कार्रवाई अमल में लाए।

वहीं, जेएनयू मंत्री प्रवीण पीयूष ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा कि वामपंथी संगठनों द्वारा लगातार संस्थान का सौहार्द बिगाड़ने की चेष्टा की जा रही है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय किसी एक विचारधारा की जागीर नहीं है। असहमति प्रकट करने का अधिकार प्रत्येक नागरिक के पास है, लेकिन सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाकर, राष्ट्रीय नायकों की छवि को ठेस पहुंचाकर और भड़काऊ नारों के जरिए तनाव उत्पन्न करके छात्र हितों की रक्षा नहीं की जा सकती। गौरतलब है कि इससे पूर्व भी जेएनयू के मुख्य द्वार पर छात्रों और दिल्ली पुलिस के बीच गंभीर झड़प की घटना देखने को मिली थी, जिसमें विरोध प्रदर्शन के दौरान एक-दूसरे पर कई गंभीर आरोप लगे थे।

सवाल-जवाब

जेएनयू परिसर की दीवारों पर कौन से विवादित नारे लिखे गए हैं?
परिसर की दीवारों पर 'फ्री उमर खालिद' और 'लॉन्ग लिव नक्सलबाड़ी' जैसे नारे लिखे गए हैं, साथ ही वीर सावरकर के चित्र पर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई है।
इन नारों को लिखने का आरोप किस छात्र संगठन पर लगाया गया है?
एबीवीपी ने इन नारों और आपत्तिजनक लेखन के लिए वामपंथी छात्र संगठन आइसा (AISA) के कैडर को जिम्मेदार ठहराया है।
उमर खालिद वर्तमान में किस मामले को लेकर न्यायिक हिरासत में हैं?
उमर खालिद वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े कथित षड्यंत्र के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर न्यायिक हिरासत में हैं।
एबीवीपी ने विश्वविद्यालय प्रशासन से क्या मांग की है?
एबीवीपी ने प्रशासन से मामले का संज्ञान लेने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों की पहचान करने और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 मिनट पहले

परिसर की दीवारों पर ऐसे नारे लिखकर पढ़ाई का माहौल खराब करना बिल्कुल ठीक नहीं है।

Divya Reddy@divya-reddy·1 मिनट पहले

अर्जुन जी, आपकी बात सही है। जब मैं जेएनयू में पढ़ती थी, तब भी चुनाव के समय दीवारों पर ऐसे नारों से हॉस्टल की दीवारें गंदी हो जाती थीं और पढ़ाई का माहौल बिगड़ता था।

Karan Malhotra@karan-malhotra·18 मिनट पहले

हर बार दीवारों पर ऐसा लिखकर माहौल खराब करने के पीछे सिर्फ छात्र संगठनों की हरकत है या इसके पीछे कोई और भी है?

Rohan Verma@rohan-verma·18 मिनट पहले

करण भाई, जेएनयू में चुनाव नजदीक आते ही दीवारों पर ऐसे नारे दिखना आम बात हो गई है। राजनीति चमकाने का पुराना तरीका है।

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