डिजिटल समाचार पोर्टल न्यूज़क्लिक (NewsClick) और उसके संस्थापक तथा मुख्य संपादक प्रबीर पुरकायस्थ से जुड़े संदिग्ध विदेशी फंड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया है. केंद्रीय जांच एजेंसी ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसके तहत दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज आपराधिक प्राथमिकी (एफआईआर) और उससे जुड़ी ईडी की मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) की कार्यवाही को पूरी तरह निरस्त कर दिया गया था. वित्तीय जांच एजेंसी का दावा है कि उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत बेहद महत्वपूर्ण सबूतों और मुख्य तर्कों का गहराई से मूल्यांकन नहीं किया है.
हाईकोर्ट के राहत भरे फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील
प्रवर्तन निदेशालय की ओर से दाखिल विशेष अनुमति याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट के रुख पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. जांच एजेंसी ने सर्वोच्च अदालत से गुहार लगाई है कि उच्च न्यायालय के फैसले पर तुरंत रोक लगाई जाए और निरस्त की गई जांच प्रक्रिया को फिर से बहाल करने की अनुमति दी जाए. ईडी का मानना है कि हाईकोर्ट ने रिट याचिका पर फैसला सुनाते समय मामले के तथ्यों और कानूनी बारीकियों का ऐसा समय पूर्व मूल्यांकन कर दिया, जिससे एजेंसी के पास उपलब्ध वृहद साक्ष्यों की पूरी तरह अनदेखी हो गई. केंद्रीय एजेंसी के अनुसार, हाईकोर्ट का यह दृष्टिकोण गंभीर आर्थिक अपराधों की निष्पक्ष जांच के स्थापित मानकों के अनुकूल नहीं है.
एफआईआर का दायरा और 2020 की कानूनी कार्रवाई
इस पूरे विवाद की कानूनी शुरुआत दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा 26 अगस्त 2020 को दर्ज की गई एफआईआर से हुई थी. यह मामला न्यूज़क्लिक का संचालन करने वाली मूल कंपनी पीपीके न्यूज़क्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ दर्ज किया गया था. पुलिस ने अपनी जांच में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात), धारा 420 (धोखाधड़ी) और धारा 120B (आपराधिक साजिश) के तहत आरोप लगाए थे. इन धाराओं के आधार पर ही बाद में प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी समानांतर मनी लॉन्ड्रिंग जांच (ईसीआईआर) शुरू की थी, ताकि विदेश से आई रकम की वास्तविक प्रकृति और उसके इस्तेमाल की मंशा को उजागर किया जा सके.
विदेशी निवेश, शेयर दर और चीनी जुड़ाव के आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार, वर्ष 2018 के दौरान पीपीके न्यूज़क्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड को अमेरिका स्थित एक विदेशी संस्था से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के रूप में ₹9.60 करोड़ (जिन्हें विभिन्न दस्तावेजों में 9.59 करोड़ रुपये भी दर्शाया गया है) प्राप्त हुए थे. इस विदेशी फंड के बदले कंपनी ने अपने शेयर अत्यधिक ऊंची दर यानी 11,500 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से जारी किए थे. ईडी ने आरोप लगाया है कि इतनी अधिक कीमत पर शेयर जारी करने की प्रक्रिया सामान्य व्यावसायिक गणित से मेल नहीं खाती. एजेंसी का कहना है कि यह पूरा लेन-देन अमेरिकी नागरिक नेविल रॉय सिंघम के नेटवर्क से जुड़ा हुआ था और इसके जरिए देश में विचार-प्रचार और राजनीतिक नैरेटिव तैयार करने का प्रयास किया जा रहा था.
प्रवर्तन निदेशालय का पक्ष: सबूत और कानूनी दलीलें
सर्वोच्च अदालत के समक्ष अपनी याचिका में ईडी ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के समक्ष दिए गए बयानों, इलेक्ट्रॉनिक ईमेल संदेशों और वित्तीय हस्तांतरण के कागजात से विदेशी फंडिंग के पीछे की व्यापक साजिश उजागर होती है. ईडी ने यह प्रमुख कानूनी दलील दी कि धोखाधड़ी के किसी भी मामले की जांच केवल इसलिए बंद नहीं की जा सकती कि कथित निवेशक ने स्वयं नुकसान या ठगी की शिकायत दर्ज नहीं कराई है. एजेंसी के अनुसार, जब सरकारी या सार्वजनिक प्राधिकरणों के सामने तथ्यों का गलत विवरण प्रस्तुत किया जाता है और नियमों को दरकिनार कर विदेशी पूंजी लाई जाती है, तो यह कानून का गंभीर उल्लंघन है जिसकी जांच होनी आवश्यक है.
92 करोड़ रुपये की अतिरिक्त रकम और साकेत संपत्ति का विवाद
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के अलावा, जांच एजेंसियों का ध्यान न्यूज़क्लिक को मिली करीब 92 करोड़ रुपये की अतिरिक्त विदेशी धनराशि पर भी है. ईडी का आरोप है कि इस भारी-भरकम राशि को सेवाओं के निर्यात (एक्सपोर्ट ऑफ सर्विसेज) के बदले भुगतान के रूप में दिखाया गया था. हालांकि, जांच के दौरान यह पाया गया कि जिन सेवाओं का दावा किया जा रहा था, उनके वास्तविक अस्तित्व और उससे संबंधित दस्तावेजों पर गंभीर सवाल हैं. इतना ही नहीं, वित्तीय जांच एजेंसी का दावा है कि इस कथित विदेशी धन के एक हिस्से का इस्तेमाल प्रबीर पुरकायस्थ द्वारा दिल्ली के साकेत क्षेत्र में स्थित एक रिहायशी फ्लैट खरीदने में किया गया. इसी आधार पर ईडी ने करीब 4.93 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्ति को जब्त करने की कार्रवाई भी की थी.
दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणियां और निरस्तीकरण का आधार
दूसरी तरफ, 29 मई 2026 को इस मामले पर निर्णय सुनाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने न्यूज़क्लिक और प्रबीर पुरकायस्थ द्वारा दायर याचिकाओं को स्वीकार कर लिया था. उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में रेखांकित किया था कि यदि अभियोजन पक्ष द्वारा लगाए गए तमाम आरोपों को उनके पूर्ण रूप में सही मान भी लिया जाए, तब भी आईपीसी की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी या धारा 406 के तहत आपराधिक विश्वासघात के मूलभूत कानूनी मापदंड पूरा नहीं होते हैं. हाईकोर्ट के इसी निष्कर्ष के बाद ईओडब्ल्यू की मूल एफआईआर और उससे जुड़ी ईडी की पूरी मनी लॉन्ड्रिंग जांच निरस्त कर दी गई थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है.



















