राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को बरी कर दिया है। अदालत ने इस मामले में सह-आरोपी और WFI के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को भी सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है। यह कानूनी मामला महिला एथलीटों द्वारा WFI प्रमुख के रूप में बृजभूषण शरण सिंह के कार्यकाल के दौरान कथित तौर पर हुए दुर्व्यवहार के संबंध में दर्ज कराया गया था। बंद कमरे में हुई लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष दोनों की अंतिम दलीलें सुनकर यह निर्णय दिया है।
बंद कमरे में हुई अदालती कार्यवाही और वकीलों की बहस
अदालत में इस संवेदनशील मामले की कार्यवाही इन-कैमरा यानी बंद कमरे के भीतर संचालित की गई थी। एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अश्वनी पंवार की पीठ ने दोनों पक्षों की विस्तृत और गहन कानूनी दलीलों को सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रखा था। सुनवाई प्रक्रिया के दौरान शिकायतकर्ता पहलवानों का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने रखा, जिन्होंने अदालत के सामने महिला एथलीटों के दावों की वकालत की। वहीं दूसरी तरफ, बचाव पक्ष की कानूनी टीम का नेतृत्व अधिवक्ता राजीव मोहन ने किया, जिसमें अधिवक्ता रेहान खान और ऋषभ भाटी भी शामिल थे। बचाव पक्ष ने 30 जून को अपनी अंतिम दलीलें पूरी कर ली थीं, जिसके बाद अदालत ने दोनों पक्षों के वकीलों को दो सप्ताह के भीतर लिखित दलीलें प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। इससे पहले मई महीने में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम के एक सदस्य और जांच अधिकारी के बयान भी दर्ज किए गए थे।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से लेकर 1,500 पन्नों की चार्जशीट तक
इस पूरे मामले की शुरुआत दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर देश की प्रमुख महिला पहलवानों द्वारा किए गए बड़े विरोध-प्रदर्शन से हुई थी। पहलवानों ने कुश्ती संघ के तत्कालीन अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने मामले की गहन छानबीन की और 15 जून 2023 को लगभग 1,500 पन्नों की एक विस्तृत चार्जशीट अदालत में दाखिल की थी। इस पुलिस चार्जशीट में भारतीय दंड संहिता की धारा 354, धारा 354A, धारा 354D और धारा 506(1) के तहत आपराधिक बल के प्रयोग, यौन उत्पीड़न, पीछा करने और आपराधिक धमकी जैसे गंभीर आरोप शामिल किए गए थे। WFI के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर पर भी इन अपराधों को बढ़ावा देने और सह-आरोपी होने के आरोप लगे थे।
बरी होने के बाद बृजभूषण शरण सिंह की प्रतिक्रिया
अदालत द्वारा सभी आरोपों से बरी किए जाने के बाद पूर्व WFI अध्यक्ष ने राहत व्यक्त की। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि अगर कोई भी आरोप साबित होता तो वह फांसी लगा लेते, लेकिन अदालत ने उन्हें सम्मान के साथ बरी कर दिया है। अपनी खुशी व्यक्त करते हुए उन्होंने इस फैसले को न्याय की जीत बताया। इस मामले से जुड़ी अपडेट ANI ने भी X पर साझा की, जिसमें फैसले के बाद की परिस्थितियों और प्रतिक्रियाओं का उल्लेख किया गया।



















