भरतपुर जिले के रुदावल क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध सिद्ध स्थल पर हर वर्ष आयोजित होने वाला पारंपरिक विशाल मेला इस बार भी भारी श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस आयोजन में हिस्सा लेने के लिए न केवल भरतपुर जिले बल्कि इसके आसपास के विभिन्न जिलों और अन्य पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक पहुंचे। सुबह से ही सिद्ध स्थल पर भक्तों का तांता लगा रहा और लोगों ने मंदिर में माथा टेककर पूजा-अर्चना की तथा अपने परिवार के लिए सुख-समृद्धि की कामना की।
स्थानीय स्तर पर रुदावल के इस सिद्ध स्थल को अगाध आस्था का मुख्य केंद्र माना जाता है। यहां हर साल लगने वाले इस वार्षिक मेले का स्थानीय लोगों को पूरे बारह महीने इंतजार रहता है। मेले के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों और आयोजनों के साथ-साथ कई तरह की अन्य गतिविधियां भी संचालित की जाती हैं, जो वहां आने वाले सभी लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनती हैं।
विशाल दंगल बना मेले का मुख्य आकर्षण
इस पूरे मेले का सबसे बड़ा और मुख्य आकर्षण यहां आयोजित होने वाला विशाल दंगल होता है। दंगल के मुकाबलों को देखने के लिए अखाड़े के चारों ओर भारी भीड़ जमा हो गई थी। इस कुश्ती प्रतियोगिता में राजस्थान के स्थानीय क्षेत्रों के अलावा हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों से भी नामी पहलवानों ने हिस्सा लिया। अखाड़े में उतरे पहलवानों ने अपनी कुश्ती कला के दौरान बेहतरीन दांव-पेंच और अपने शारीरिक दमखम का भरपूर प्रदर्शन किया, जिसे देखकर दर्शक दंग रह गए।
रोमांचक मुकाबलों ने बढ़ाया दर्शकों का उत्साह
जैसे ही पहलवान कुश्ती के मुकाबले के लिए अखाड़े में उतरे, वहां मौजूद दर्शकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया। दर्शक लगातार हूटिंग कर और तालियां बजाकर अपने पसंदीदा पहलवानों का हौसला बढ़ाते हुए नजर आए। कई मुकाबले इतने कांटे के और रोमांचक रहे कि दर्शकों की सांसे थम गईं, जहां पहलवानों ने अपनी अद्भुत ताकत, फुर्ती और पैंतरेबाजी का शानदार नमूना पेश किया। रुदावल का यह दंगल भरतपुर जिले के सबसे बड़े और प्रमुख दंगलों में शुमार किया जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें न केवल राजस्थान के कोने-कोने से बल्कि पड़ोसी राज्यों के धुरंधर पहलवान भी अपनी कला दिखाने पहुंचते हैं।
धार्मिक आस्था के साथ दिखी ग्रामीण संस्कृति की झलक
यही एक मुख्य वजह है कि इस दंगल को देखने के लिए दूर-दराज के गांवों और शहरों से भी लोग खींचे चले आते हैं। इस मेले में एक तरफ जहां लोगों को अपनी धार्मिक आस्था से जुड़ने का मौका मिला, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण संस्कृति और पारंपरिक खेलों की अनूठी झलक भी देखने को मिली। वहां मौजूद श्रद्धालुओं और खेल प्रेमियों की भारी भीड़ ने पूरे आयोजन को एक भव्य उत्सव का रूप दे दिया। सिद्ध स्थल पर सुबह की पूजा-अर्चना से लेकर शाम तक अखाड़े में गूंजते पहलवानों के दांव-पेंच तक, पूरे मेले में दिनभर अभूतपूर्व उत्साह और मेले का सा माहौल बना रहा।






















