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भरतपुर में पारंपरिक मेला और दंगल का आयोजन, राजस्थान और पड़ोसी राज्यों के पहलवानों ने दिखाया दमखमराजस्थान
17 सित॰ 2026, 6:02 pm (1 दिन पहले)· 3

भरतपुर में पारंपरिक मेला और दंगल का आयोजन, राजस्थान और पड़ोसी राज्यों के पहलवानों ने दिखाया दमखम

भरतपुर जिले के रुदावल में पारंपरिक सिद्ध स्थल पर वार्षिक मेले का आयोजन किया गया, जिसमें पूजा-अर्चना के साथ-साथ एक बड़े दंगल में विभिन्न राज्यों के पहलवानों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया।

भरतपुर जिले के रुदावल क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध सिद्ध स्थल पर हर वर्ष आयोजित होने वाला पारंपरिक विशाल मेला इस बार भी भारी श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस आयोजन में हिस्सा लेने के लिए न केवल भरतपुर जिले बल्कि इसके आसपास के विभिन्न जिलों और अन्य पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक पहुंचे। सुबह से ही सिद्ध स्थल पर भक्तों का तांता लगा रहा और लोगों ने मंदिर में माथा टेककर पूजा-अर्चना की तथा अपने परिवार के लिए सुख-समृद्धि की कामना की।

स्थानीय स्तर पर रुदावल के इस सिद्ध स्थल को अगाध आस्था का मुख्य केंद्र माना जाता है। यहां हर साल लगने वाले इस वार्षिक मेले का स्थानीय लोगों को पूरे बारह महीने इंतजार रहता है। मेले के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों और आयोजनों के साथ-साथ कई तरह की अन्य गतिविधियां भी संचालित की जाती हैं, जो वहां आने वाले सभी लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनती हैं।

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विशाल दंगल बना मेले का मुख्य आकर्षण

इस पूरे मेले का सबसे बड़ा और मुख्य आकर्षण यहां आयोजित होने वाला विशाल दंगल होता है। दंगल के मुकाबलों को देखने के लिए अखाड़े के चारों ओर भारी भीड़ जमा हो गई थी। इस कुश्ती प्रतियोगिता में राजस्थान के स्थानीय क्षेत्रों के अलावा हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों से भी नामी पहलवानों ने हिस्सा लिया। अखाड़े में उतरे पहलवानों ने अपनी कुश्ती कला के दौरान बेहतरीन दांव-पेंच और अपने शारीरिक दमखम का भरपूर प्रदर्शन किया, जिसे देखकर दर्शक दंग रह गए।

रोमांचक मुकाबलों ने बढ़ाया दर्शकों का उत्साह

जैसे ही पहलवान कुश्ती के मुकाबले के लिए अखाड़े में उतरे, वहां मौजूद दर्शकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया। दर्शक लगातार हूटिंग कर और तालियां बजाकर अपने पसंदीदा पहलवानों का हौसला बढ़ाते हुए नजर आए। कई मुकाबले इतने कांटे के और रोमांचक रहे कि दर्शकों की सांसे थम गईं, जहां पहलवानों ने अपनी अद्भुत ताकत, फुर्ती और पैंतरेबाजी का शानदार नमूना पेश किया। रुदावल का यह दंगल भरतपुर जिले के सबसे बड़े और प्रमुख दंगलों में शुमार किया जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें न केवल राजस्थान के कोने-कोने से बल्कि पड़ोसी राज्यों के धुरंधर पहलवान भी अपनी कला दिखाने पहुंचते हैं।

धार्मिक आस्था के साथ दिखी ग्रामीण संस्कृति की झलक

यही एक मुख्य वजह है कि इस दंगल को देखने के लिए दूर-दराज के गांवों और शहरों से भी लोग खींचे चले आते हैं। इस मेले में एक तरफ जहां लोगों को अपनी धार्मिक आस्था से जुड़ने का मौका मिला, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण संस्कृति और पारंपरिक खेलों की अनूठी झलक भी देखने को मिली। वहां मौजूद श्रद्धालुओं और खेल प्रेमियों की भारी भीड़ ने पूरे आयोजन को एक भव्य उत्सव का रूप दे दिया। सिद्ध स्थल पर सुबह की पूजा-अर्चना से लेकर शाम तक अखाड़े में गूंजते पहलवानों के दांव-पेंच तक, पूरे मेले में दिनभर अभूतपूर्व उत्साह और मेले का सा माहौल बना रहा।

सवाल-जवाब

रुदावल का मेला कहाँ आयोजित किया गया?
यह मेला भरतपुर जिले के रुदावल क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध सिद्ध स्थल पर आयोजित किया गया।
मेले का मुख्य आकर्षण क्या था?
मेले का सबसे बड़ा आकर्षण यहाँ आयोजित होने वाला विशाल दंगल था।
दंगल में किन राज्यों के पहलवानों ने हिस्सा लिया?
दंगल में राजस्थान के अलावा हरियाणा और उत्तर प्रदेश सहित अन्य क्षेत्रों से आए पहलवानों ने हिस्सा लिया।
मेले में श्रद्धालुओं ने क्या किया?
श्रद्धालुओं ने मंदिर में पहुंचकर पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·16 घंटे पहले

भरतपुर के रुदावल में आयोजित इस पारंपरिक मेले और कुश्ती दंगल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलता है। इस तरह के आयोजनों में हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों की भागीदारी से क्षेत्रीय मेल-जोल मजबूत होता है। भविष्य में इस प्रकार के पारंपरिक स्थानीय आयोजनों को यदि खेल पर्यटन के रूप में विकसित किया जाए, तो यह ग्रामीण युवाओं के लिए आर्थिक अवसरों के नए द्वार खोल सकता है और स्थानीय खेल संस्कृति को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दिला सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·17 घंटे पहले

भरतपुर के रुदावल में आयोजित इस पारंपरिक मेले और दंगल जैसे आयोजन ग्रामीण अर्थव्यवस्था में स्थानीय पर्यटन, आतिथ्य और लघु व्यापार को गति देते हैं। पारंपरिक खेलों और मेलों का यह प्रारूप न केवल सांस्कृतिक विरासत को सहेजता है, बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के छोटे अवसरों को भी बढ़ावा देता है, जो ग्रामीण विकास के लिए सकारात्मक है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·17 घंटे पहले

रविकाश गुप्ता के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए यह रेखांकित करना आवश्यक है कि ऐसे ग्रामीण आयोजन जमीनी स्तर पर सांस्कृतिक जुड़ाव के साथ सामाजिक समरसता को भी सुदृढ़ करते हैं। जब राजस्थान के साथ हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों के पहलवान एक अखाड़े में उतरते हैं, तो यह अंतर-राज्यीय सांस्कृतिक और खेल आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है। इस प्रकार के पारंपरिक मेलों का संस्थागत समर्थन ग्रामीण भारत में सॉफ्ट पावर का सशक्त माध्यम बन सकता है, जिससे खेल पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ पारंपरिक विधाओं का संरक्षण भी सुनिश्चित होता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

भरतपुर के रुदावल में आयोजित इस पारंपरिक मेले और विशाल दंगल जैसे बड़े आयोजनों में उमड़ने वाली भारी भीड़ के मद्देनजर सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना जिला प्रशासन और पुलिस के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी होती है। हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों से आने वाले पहलवानों और भारी संख्या में दर्शकों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि इस प्रकार के आयोजनों के दौरान सुचारू यातायात प्रबंधन और संभावित भीड़ नियंत्रण के लिए पुलिस बल की पुख्ता तैनाती कितनी आवश्यक है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

क्षेत्रीय मेलों और दंगलों में सीमावर्ती राज्यों से आने वाली भीड़ का प्रबंधन स्थानीय पुलिस प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है। इस प्रकार के आयोजनों में उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों की सीमाओं से आने वाले भारी जनसमूह और पहलवानों की आवाजाही को देखते हुए, भविष्य के आयोजनों में खुफिया तंत्र और त्वरित प्रतिक्रिया दलों की सक्रियता बेहद जरूरी है, ताकि सांस्कृतिक व धार्मिक महत्व के इन मेलों में कानून व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद रह सके।

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