दिल्ली में निर्दलीय लोकसभा सांसद पप्पू यादव के घर पर हुई हाथापाई और चप्पल फेंकने के मामले में कानून का शिकंजा कस गया है। इस घटना के दौरान सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डालने और उनसे मारपीट करने के आरोप में दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर अपनी तफ़तीश तेज कर दी है। रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हुए इस हंगामे के बाद पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयानों के जरिए पूरे घटनाक्रम की कड़ी से कड़ी जोड़ रही है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में हंगामा और चप्पल कांड
रविवार को जब पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव अपने दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर मीडियाकर्मियों से बातचीत कर रहे थे, तभी दो अज्ञात शख्स वहां पहुंच गए। इनमें से एक व्यक्ति ने सांसद पर भगवान राम के अपमान का आरोप लगाते हुए उनके हालिया विरोध प्रदर्शन को नाटक करार दिया। देखते ही देखते उस शख्स ने सांसद की तरफ चप्पल चला दी। इसके तुरंत बाद वहां मौजूद पप्पू यादव के समर्थकों और हमलावर के बीच तीखी बहस और हाथापाई शुरू हो गई। मौके पर मौजूद पुलिस टीम ने तुरंत स्थिति को संभाला और दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया।
लोक सेवकों पर हमले और बाधा पहुंचाने की एफआईआर
घटना के अगले दिन यानी सोमवार को पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सांसद के आवास पर तैनात पुलिसकर्मियों की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है। ऑन-ड्यूटी जवानों का आरोप है कि जब वे स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे थे, तब उनके साथ धक्का-मुक्की की गई और उनके काम में अड़चन डाली गई। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया है
- धारा 221: किसी लोक सेवक के सरकारी काम में जानबूझकर बाधा पहुंचाना।
- धारा 121 (1): लोक सेवक को अपनी सरकारी ड्यूटी निभाने से रोकने के इरादे से स्वेच्छा से चोट पहुंचाना।
- धारा 132: ड्यूटी पर तैनात किसी लोक सेवक पर हमला करना या आपराधिक बल का इस्तेमाल करना।
- धारा 3 (5): सामान्य मंशा के साथ मिलकर आपराधिक घटना को अंजाम देना।
सीसीटीवी जांच और हमले की वजह तलाशती पुलिस
इस पूरे मामले में जांच अधिकारी अब सांसद आवास परिसर और आसपास की सड़कों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रहे हैं। पुलिस का कहना है कि सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों, वहां मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और आरोपियों के बयानों का मिलान किया जा रहा है। जांच टीम इस बात का पता लगा रही है कि क्या इस हमले के पीछे कोई सुनियोजित साजिश थी या यह सिर्फ तात्कालिक प्रतिक्रिया थी। आरोपियों द्वारा दिए गए बयानों और दावों की सत्यता की जांच भी की जा रही है।
संसद में विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है विवाद का तार
इस पूरी घटना की पृष्ठभूमि शुक्रवार को संसद परिसर में हुए एक राजनीतिक प्रदर्शन से जुड़ी हुई है। बिहार के पूर्णिया से सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मुद्दे पर अन्य विपक्षी नेताओं के साथ संसद के मकर द्वार के सामने प्रदर्शन किया था। इस दौरान वे भगवा वस्त्र पहनकर पहुंचे थे। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित कई अन्य सांसदों ने दान पेटी में पैसे डाले थे, लेकिन पप्पू यादव ने मंदिर में हुई कथित चोरी का प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराने के लिए पैसे अपनी जेब में रख लिए थे। इसी घटनाक्रम को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोपी ने उन पर सवाल उठाए थे।



















