बिहार के जहानाबाद जिले में एक सरकारी नर्सरी इन दिनों चर्चा में है, जहां किसानों को बेहद कम समय में सब्जियों के मजबूत पौधे मिल रहे हैं. यहां काम करने वाले किसान सुरेंद्र शर्मा बताते हैं कि सही तरीके से बेड तैयार किया जाए तो सब्जी का पौधा महज 8 दिन में अंकुरित हो जाता है और 15 दिन के भीतर पूरी तरह बुआई लायक बन जाता है. सुरेंद्र शर्मा पिछले एक साल से घोसी प्रखंड की इस नर्सरी में अलग-अलग तरह के पौधे तैयार करने का काम कर रहे हैं, और उन्होंने नर्सरी बेड बनाने की पूरी प्रक्रिया कदम दर कदम समझाई.
सुरेंद्र शर्मा के मुताबिक सब्जियों की नर्सरी तैयार करने से पहले सबसे जरूरी काम सीजन को समझना है. हर सीजन में अलग-अलग तरह की सब्जी की फसल उगती है, इसलिए मौसम के हिसाब से ही बीज चुनना चाहिए. अगर किसान सीजन के अनुसार सब्जियां तैयार करते हैं तो उन्हें बाजार में मांग भी आसानी से मिल जाती है और उपज बेचने में दिक्कत नहीं होती.
बेड बनाने से पहले मिट्टी की तैयारी
नर्सरी का बेड तैयार करने के लिए सबसे पहले जिस जगह बीज बोए जाने हैं, वहां की मिट्टी की कोड़ाई या गोड़ाई की जाती है. इसके बाद उस मिट्टी को वहां से हटाकर किसी अलग जगह पर रख दिया जाता है. ऐसा करने से जिस जगह से मिट्टी हटाई गई है, वहां सूरज की रोशनी बराबर पहुंचती है. साथ ही कुछ दिन तक धूप में रहने से मिट्टी में मौजूद हानिकारक कीड़े भी खत्म हो जाते हैं, जिससे पौधों को शुरुआत में ही सुरक्षा मिल जाती है.
खाद का सही अनुपात कितना जरूरी
जो मिट्टी अलग रखी गई थी, उसे अब खाद मिलाकर तैयार किया जाता है. सुरेंद्र शर्मा के अनुसार इसके लिए डीएपी (DAP) और पोटास खाद का इस्तेमाल किया जाता है. एक कट्ठा जमीन के लिए करीब 2 से ढाई किलो तक इस मिश्रण की जरूरत पड़ती है. मिट्टी और खाद का यह मिश्रण जब पूरी तरह तैयार हो जाता है, तभी उसमें बीज डालने का काम शुरू किया जाता है.
बीज बोने से लेकर सिंचाई तक की प्रक्रिया
मिट्टी तैयार होने के बाद उसमें बीज डाला जाता है और फिर उसे ट्यूब में भरकर लगाया जाता है. जब तक पौधा अंकुरित नहीं हो जाता, तब तक स्प्रिंकलर के जरिए ही पानी दिया जाता है, ताकि नाजुक बीज को नुकसान न पहुंचे. एक बार पौधा जमीन से बाहर आ जाए, उसके बाद सामान्य तरीके से पानी का पटवन किया जा सकता है.
धूप से बचाव क्यों है जरूरी
सुरेंद्र शर्मा एक और अहम बात पर जोर देते हैं. उनका कहना है कि तैयार हो रहे पौधों पर सूरज की सीधी किरणें नहीं पड़नी चाहिए, क्योंकि इससे कोमल पौधों को नुकसान पहुंच सकता है. इससे बचाव के लिए हरे रंग के नेट का इस्तेमाल किया जाता है. इस पूरी प्रक्रिया को अगर सही तरीके से अपनाया जाए, तो पौधा सिर्फ 8 दिन में अंकुरित हो जाता है और महज 15 दिन में पूरी तरह तैयार होकर खेत में लगाने या बेचने लायक बन जाता है.













