असम के तियाक में स्थित चंद्र कमल बेजबरुआ कॉलेज (सीकेबी कॉलेज) के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित होने वाली उपलब्धि सामने आई है, जहां इस प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से आधिकारिक रूप से स्वायत्त दर्जा दे दिया गया है। इस नई मान्यता के मिलने से संस्थान के शैक्षणिक सफर में एक नया अध्याय जुड़ गया है और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में इसकी स्थिति और अधिक मजबूत हुई है।
शिक्षा मंत्री ने दी शुभकामनाएं
इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के सामने आने के तुरंत बाद असम के शिक्षा मंत्री रनोज पेगू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि वह इस शानदार सफलता पर कॉलेज के सभी शिक्षकों, विद्यार्थियों, पूर्व छात्रों और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं। उन्होंने कहा कि यह मान्यता संस्थान की अकादमिक उत्कृष्टता के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
अकादमिक विकास के खुलेंगे नए रास्ते
शिक्षा मंत्री रनोज पेगू ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उम्मीद जताई कि यह नया दर्जा कॉलेज के लिए विकास, शैक्षणिक नवाचार और समग्र प्रगति के नए रास्ते खोलेगा। स्वायत्तता मिलने के बाद संस्थान को अपने स्तर पर पाठ्यक्रम तैयार करने, परीक्षा आयोजित करने और शैक्षणिक नीतियां तय करने में अधिक स्वतंत्रता और लचीलापन प्राप्त होगा, जिससे छात्र-छात्राओं को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा।
कॉलेज का इतिहास और अवस्थिति
अगर बात करें इस शिक्षण संस्थान की भौगोलिक स्थिति की, तो चंद्र कमल बेजबरुआ कॉलेज, तियाक असम के जोरहाट जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 715 के बिल्कुल किनारे पर स्थित है। यह एक सह-शिक्षा संस्थान है जो अपने परिसरों में कला और वाणिज्य दोनों प्रमुख धाराओं में विभिन्न पाठ्यक्रम संचालित करता है। कॉलेज के कला संकाय को वर्ष 1972 में डेफिसिट प्रणाली के अंतर्गत लाया गया था, जबकि इसके वाणिज्य संकाय को वर्ष 1996 में इसी व्यवस्था के तहत शामिल किया गया था।
वर्तमान शैक्षणिक ढांचा और संख्या
वर्तमान समय में इस संस्थान का शैक्षणिक और प्रशासनिक ढांचा काफी विस्तृत हो चुका है। कॉलेज के परिवार में कुल 1500 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जो यहां अपनी शिक्षा पूरी कर रहे हैं। इनके मार्गदर्शन और पठन-पाठन के लिए 34 स्थायी एसोसिएट और असिस्टेंट प्रोफेसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा शिक्षण कार्यों में सहयोग के लिए 14 शिक्षक तदर्थ यानी एडहॉक आधार पर नियुक्त किए गए हैं, जबकि संस्थान के सुचारू संचालन के लिए 13 गैर-शैक्षणिक कर्मचारी भी कार्यरत हैं।



















