भारत अब स्वदेशी मानवरहित विमानों यानी ड्रोन और काउंटर ड्रोन प्रणालियों के विकास की रफ्तार को काफी तेज कर रहा है, जिसका सीधा फायदा घरेलू रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कई दिग्गज कंपनियों को मिल रहा है। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य देश की सामरिक क्षमताओं को मजबूत करने के साथ ही वैश्विक बाजार में रक्षा साजो-सामान का निर्यात बढ़ाना है। सरकार की ओर से अब केवल रक्षा नीतियों को कागजों तक सीमित रखने के बजाय जमीनी स्तर पर ठोस रक्षा खरीद और ठेके देने पर पूरा जोर दिया जा रहा है, जिससे उन कंपनियों के लिए कारोबार के नए रास्ते खुल गए हैं जो मानवरहित विमानों, गाइडेड म्यूनिशन, एंटी ड्रोन प्रणालियों, रडार और इलेक्ट्रॉनिक युद्धक उपकरणों के निर्माण में जुटी हुई हैं।
स्वदेशी रक्षा तकनीक पर सरकार का बड़ा फोकस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को अपने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया था कि भारत को न केवल खुद के लिए आधुनिक रक्षा तकनीकें विकसित करनी चाहिए, बल्कि उनका निर्यात भी करना चाहिए। रक्षा मंत्रालय ने इसी दिशा में बड़ा कदम बढ़ाते हुए 14 अगस्त को भारतीय सेना के लिए लगभग 1,577 करोड़ रुपये के गाइडेड म्यूनिशन सिस्टम के अनुबंधों पर औपचारिक हस्ताक्षर किए। इसके अलावा, डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने पिछले दिनों यानी 3 जुलाई को लगभग 52,000 करोड़ रुपये के बड़े पूंजीगत खरीद प्रस्तावों को अपनी मंजूरी दी थी। इन प्रस्तावों में भारतीय सेना के लिए आकाश तरंग एंटी यूएवी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, एक जेट आधारित सुसाइड ड्रोन सिस्टम और नौसेना के जहाजों पर तैनात होने वाले मानवरहित एरियल सिस्टम जैसी अत्याधुनिक तकनीकें शामिल हैं।
एनआईबीई लिमिटेड का बड़ा रक्षा ऑर्डर
इस पूरे घटनाक्रम में एनआईबीई को सेना के ताजा ऑर्डर से सबसे सीधा और बड़ा फायदा मिला है। कंपनी ने 14 अगस्त को शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि उसे भारतीय सेना से 563.35 करोड़ रुपये का एक बड़ा ठेका मिला है। इस अनुबंध के तहत सेना को 30 सेट गाइडेड म्यूनिशन सिस्टम की आपूर्ति करनी है, जिसमें कुल 300 गाइडेड म्यूनिशन, टेस्टिंग उपकरण और अन्य जरूरी सहायक उपकरण शामिल हैं। कंपनी ने इस विशेष प्लेटफॉर्म का नाम वायुअस्त्र बताया है, जो रक्षा निर्माण के क्षेत्र में उसकी बढ़ती साख को दर्शाता है।
जेन टेक्नोलॉजीज और आइडियाफोर्ज की स्थिति
जेन टेक्नोलॉजीज का मुख्य कारोबार काउंटर ड्रोन और एंटी यूएवी तकनीकों के विकास पर केंद्रित है। वित्तीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही में इस कंपनी ने 141.64 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया, जबकि इसका एबिटा 57.88 करोड़ रुपये और कर पश्चात लाभ यानी पैट 34.46 करोड़ रुपये रहा। दूसरी ओर, आइडियाफोर्ज ड्रोन का विनिर्माण करती है और वर्तमान में अटैक ड्रोन तथा गाइडेड म्यूनिशन सहित कई नई तकनीकों पर काम कर रही है। पहली तिमाही में इस कंपनी का राजस्व 68.59 करोड़ रुपये रहा, जिसमें पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 436.7 प्रतिशत की जोरदार छलांग दर्ज की गई, हालांकि इस दौरान कंपनी को 2.59 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा भी उठाना पड़ा।
डाटा पैटर्न्स और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स का प्रदर्शन
डाटा पैटर्न्स देश की रक्षा सेनाओं को रडार, इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस और जैमिंग सिस्टम जैसे तकनीकी समाधान मुहैया कराती है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी ने 116 करोड़ रुपये का राजस्व और 22.1 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया। इसके अलावा, 30 जून तक कंपनी के पास करीब 530 करोड़ रुपये की नकदी, बैंक बैलेंस और निवेश उपलब्ध थे और इसके ऊपर कोई भी शुद्ध कर्ज नहीं था। वहीं, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स यानी बीईएल रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्धक प्रणालियों और अन्य रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर काम कर रही है। बीईएल ने पहली तिमाही में 5,533.06 करोड़ रुपये का भारी-भरकम राजस्व और 1,048.33 करोड़ रुपये का शानदार शुद्ध लाभ हासिल किया है।
पारस डिफेंस और बाजार की स्थिति
पारस डिफेंस की मौजूदगी एंटी ड्रोन सिस्टम, ड्रोन प्लेटफॉर्म और पेलोड के निर्माण में है। वित्तीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही के दौरान कंपनी का राजस्व 38 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 128 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जबकि इसका समेकित शुद्ध लाभ 40 प्रतिशत बढ़कर 21 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। रक्षा क्षेत्र में सरकार की आत्मनिर्भर नीतियों और लगातार मिल रहे बड़े ऑर्डर्स की वजह से इन सभी सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों पर निवेशकों की पैनी नजर बनी हुई है।



















