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छत्तीसगढ़: अगले शैक्षणिक सत्र से स्कूलों में गायत्री मंत्र और भोजन मंत्र पढ़ना जरूरी, तीन समय होंगी अनिवार्य गतिविधियांशिक्षा
17 जून 2026, 12:28 am (88 दिन पहले)· 3

छत्तीसगढ़: अगले शैक्षणिक सत्र से स्कूलों में गायत्री मंत्र और भोजन मंत्र पढ़ना जरूरी, तीन समय होंगी अनिवार्य गतिविधियां

छत्तीसगढ़ सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से सभी स्कूलों में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के साथ गायत्री मंत्र, भोजन मंत्र और अन्य हिंदू प्रार्थनाओं का रोजाना पाठ अनिवार्य कर दिया है, जिस पर कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया है।

छत्तीसगढ़ के सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ाई का ढांचा अगले शैक्षणिक सत्र से बदलने जा रहा है। राज्य सरकार ने तय किया है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से हर स्कूल में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के अलावा गायत्री मंत्र और कई दूसरी हिंदू प्रार्थनाओं का पाठ रोज होगा, और यह पूरी तरह अनिवार्य रहेगा। दिलचस्प बात यह है कि राज्य में नया शैक्षणिक सत्र मंगलवार से ही शुरू हो चुका है।

सरकार का तर्क है कि स्कूलों में रोज सांस्कृतिक, शैक्षिक और मूल्यों पर आधारित गतिविधियां कराने के पीछे एक साफ मकसद है। इसके जरिए छात्रों में देशभक्ति की भावना जगाना, उनके बौद्धिक विकास को आगे बढ़ाना और उन्हें भारतीय संस्कृति तथा परंपराओं से जोड़ना चाहती है।

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दिन में तीन बार होंगी तय गतिविधियां

एक अधिकारी के मुताबिक, स्कूल शिक्षा विभाग ने 12 जून को सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) को इस बारे में आदेश भेज दिया है। इसी आदेश के तहत अब हर स्कूल को दिन में तीन अलग-अलग समय पर ये अनिवार्य गतिविधियां करानी होंगी।

नई गाइडलाइंस के हिसाब से सुबह की प्रार्थना सभा सबसे लंबी रहेगी। इसमें राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र के साथ-साथ महान हस्तियों की जीवनियों का पाठ शामिल किया गया है। इसके बाद दोपहर के भोजन के वक्त सभी छात्र मिलकर भोजन मंत्र पढ़ेंगे। वहीं स्कूल के दिन के आखिरी सेशन में राज्य गीत, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र का पाठ होगा।

लापरवाही पर होगी प्रशासनिक कार्रवाई

अधिकारी ने बताया कि इस पूरी पहल का उद्देश्य छात्रों में देशभक्ति, अनुशासन, नैतिक मूल्य और सांस्कृतिक जागरूकता पैदा करना है, साथ ही उन्हें भारतीय परंपराओं और राष्ट्रीय आदर्शों से जोड़ना है।

सरकार ने इस मामले में ढिलाई बरतने की गुंजाइश नहीं छोड़ी है। DEO को निर्देश दिया गया है कि वे आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। अधिकारी समय-समय पर स्कूलों का निरीक्षण भी करेंगे, और जो स्कूल प्रबंधन या प्रिंसिपल तय गाइडलाइंस का उल्लंघन करते मिलेंगे, उनके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।

कांग्रेस ने उठाए सवाल, संविधान की भावना के खिलाफ बताया

सरकार के इस फैसले के सामने आते ही कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया। पार्टी का सवाल है कि जब स्कूलों में दूसरे धर्मों के छात्र भी पढ़ते हैं, तो वहां हिंदू प्रार्थनाओं का पाठ अनिवार्य करने की जरूरत आखिर क्या है। कांग्रेस ने BJP सरकार पर आरोप लगाया कि वह स्कूलों के जरिए RSS का एजेंडा थोपने की कोशिश कर रही है।

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था हमेशा से सभी धर्मों को बराबर सम्मान देती आई है। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकारी स्कूलों में हिंदू धार्मिक मंत्रों का अनिवार्य पाठ दूसरे समुदायों के लोगों को भी कुरान, गुरबानी या बाइबिल की आयतें शामिल करने की मांग करने के लिए प्रेरित कर सकता है।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंह देव ने भी इस कदम पर नाराजगी जताई। उन्होंने इसे सीधे तौर पर संविधान की भावना के खिलाफ बताया।

सवाल-जवाब

छत्तीसगढ़ में नया नियम कब से लागू होगा?
यह नियम शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगा, जबकि राज्य में नया सत्र मंगलवार से शुरू हो चुका है।
स्कूलों में दिन में कब-कब पाठ कराया जाएगा?
दिन में तीन बार: सुबह की सभा में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीप मंत्र, सरस्वती वंदना और गुरु मंत्र; दोपहर के भोजन पर भोजन मंत्र; और आखिरी सेशन में राज्य गीत, गायत्री मंत्र तथा शांति मंत्र।
आदेश कब और किसे जारी किया गया?
स्कूल शिक्षा विभाग ने 12 जून को सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) को यह आदेश जारी किया।
कांग्रेस इसका विरोध क्यों कर रही है?
कांग्रेस का कहना है कि स्कूलों में दूसरे धर्मों के छात्र भी पढ़ते हैं, इसलिए हिंदू प्रार्थनाओं को अनिवार्य करना सही नहीं है और यह संविधान की भावना के खिलाफ है।
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