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छत्तीसगढ़ के स्कूलों में दिन में तीन बार होगा मंत्र पाठ, 2026-27 सत्र से लागू होगा नया नियम, उल्लंघन पर कार्रवाई तयशिक्षा
17 जून 2026, 3:03 am (133 दिन पहले)· 3

छत्तीसगढ़ के स्कूलों में दिन में तीन बार होगा मंत्र पाठ, 2026-27 सत्र से लागू होगा नया नियम, उल्लंघन पर कार्रवाई तय

छत्तीसगढ़ सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन सभी स्कूलों में सुबह, दोपहर और शाम को राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत और विभिन्न मंत्रों के पाठ को 2026-27 सत्र से अनिवार्य कर दिया है। पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने इसे थोपा गया कदम बताकर आदेश वापस लेने की मांग की है।

छत्तीसगढ़ के स्कूलों में अब हर दिन की शुरुआत और अंत एक तय धार्मिक एवं सांस्कृतिक दिनचर्या के साथ होगा। राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग ने अपने अधीन आने वाले सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि 2026-27 शैक्षणिक सत्र से वे प्रतिदिन सांस्कृतिक, शैक्षिक और मूल्य आधारित गतिविधियां संचालित करें। इन गतिविधियों में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के साथ गायत्री, दीप, भोजन समेत कई मंत्रों का पाठ शामिल रहेगा। अधिकारियों के मुताबिक इस कदम के पीछे सोच यह है कि छात्रों के बौद्धिक विकास को गति मिले और उनका नाता भारतीय संस्कृति तथा परंपराओं से और गहरा हो।

एक दिन में तीन बार तय हुआ कार्यक्रम

एक अधिकारी ने बताया कि विभाग ने 12 जून को सभी जिला शिक्षा अधिकारियों के नाम आदेश जारी किया, जिसके तहत अब स्कूलों को दिन में तीन बार ये गतिविधियां अनिवार्य रूप से करानी होंगी। नई व्यवस्था के अनुसार दिन की शुरुआत सुबह की प्रार्थना से होगी, जिसमें राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र के साथ-साथ महान विभूतियों की जीवनियों का पाठ रहेगा। दोपहर में भोजन के समय छात्र एक साथ भोजन मंत्र बोलेंगे। वहीं दिन ढलने पर, छुट्टी के वक्त राज्य गीत, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र का पाठ कराया जाएगा।

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निरीक्षण होगा, चूक पर कार्रवाई

सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में देशभक्ति, अनुशासन, नैतिक मूल्य और सांस्कृतिक चेतना का संचार करना है, साथ ही उन्हें भारतीय परंपराओं और राष्ट्रीय आदर्शों से जोड़ना है। आदेश को कागजी रहने से रोकने के लिए अधिकारी समय-समय पर स्कूलों का निरीक्षण भी करेंगे। जिस किसी स्कूल में नियमों का पालन होता नहीं पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

पूर्व उपमुख्यमंत्री ने जताई आपत्ति

दूसरी ओर इस फैसले पर सियासी सवाल भी उठने लगे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने अंबिकापुर में TrendKia से बातचीत में कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता एक मौलिक संवैधानिक अधिकार है और किसी भी धर्म से जुड़ी प्रार्थना या मंत्र का पाठ व्यक्ति की अपनी इच्छा पर ही होना चाहिए। उनके मुताबिक जो लोग अपने देवताओं की पूजा करना या धार्मिक मंत्रों का उच्चारण करना चाहते हैं, उन्हें इसकी पूरी आजादी मिलनी चाहिए, लेकिन ऐसी प्रथाओं को किसी पर थोपा नहीं जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी व्यक्ति को दूसरे धर्म की परंपराओं या प्रार्थनाओं में शामिल होने के लिए बाध्य करना पूरी तरह अनुचित है।

आदेश वापस लेने की मांग

सिंह देव ने राज्य सरकार से यह आदेश वापस लेने की अपील की। उन्होंने सुझाव दिया कि जो छात्र और शिक्षक इस तरह की प्रार्थनाओं में हिस्सा नहीं लेना चाहते, उन्हें इससे दूर रहने का विकल्प दिया जाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि राज्य में नया शैक्षणिक सत्र मंगलवार से शुरू हो चुका है।

सवाल-जवाब

छत्तीसगढ़ का यह नया नियम कब से लागू होगा?
यह नियम 2026-27 शैक्षणिक सत्र से लागू होगा, और इससे जुड़ा आदेश 12 जून को सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को जारी किया गया।
दिन में कितनी बार और कौन से मंत्र पाठ कराए जाएंगे?
दिन में तीन बार: सुबह राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीप मंत्र, सरस्वती वंदना और गुरु मंत्र; दोपहर भोजन के समय भोजन मंत्र; और शाम को छुट्टी के समय राज्य गीत, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र।
नियम का पालन न करने पर क्या होगा?
अधिकारी स्कूलों का निरीक्षण करेंगे और जिस स्कूल में नियमों का पालन नहीं होता पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इस फैसले का विरोध किसने और क्यों किया?
पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने इसका विरोध किया, उनका कहना है कि धार्मिक प्रार्थना अपनी इच्छा से होनी चाहिए और किसी पर थोपी नहीं जा सकती, इसलिए सरकार को आदेश वापस लेना चाहिए।
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