गुवाहाटी की एक यूनिवर्सिटी में बुधवार को किताबों और लाइब्रेरी के नाम एक खास शाम रही, जहां लेखक और पत्रकार बिकाश सरकार ने कहा कि डिजिटल दौर की तमाम उठापटक के बावजूद किताबों के प्रति लोगों का लगाव कम नहीं हुआ है।
एडीटीयू यानी असम डाउन टाउन यूनिवर्सिटी के हरिनारायण दत्तबरुआ सेंट्रल लाइब्रेरी में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में सरकार मुख्य वक्ता थे। यह आयोजन राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस के मौके पर रखा गया था।
"किताबों का मंदिर"
सरकार ने कहा कि किताबें इंसानी सभ्यता को आगे बढ़ाने की एक बड़ी ताकत रही हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक ने भले ही किताबों की दुनिया को काफी हद तक बदल दिया हो, लेकिन उनका असली आकर्षण आज भी बरकरार है, और लाइब्रेरी ने इस निरंतरता को बचाए रखने में अहम भूमिका निभाई है। अपनी बात को उन्होंने एक लाइन में समेटते हुए कहा, "एक लाइब्रेरी किताबों का मंदिर है, और लाइब्रेरियन उस मंदिर के रखवाले हैं।"
रंगनाथन को याद किया गया
इसी कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरियन डॉ. रूबी गोस्वामी ने डॉ. एस.आर. रंगनाथन के जीवन और उनके काम पर बात की। डॉ. रंगनाथन को भारत में लाइब्रेरी साइंस का जनक माना जाता है, और गोस्वामी ने छात्रों के सामने उनके योगदान को विस्तार से रखा।
कार्यक्रम की शुरुआत में एडीटीयू के वाइस चांसलर डॉ. नारायण चंद्र तालुकदार ने मुख्य वक्ता बिकाश सरकार को सम्मानित किया। इसके बाद यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. नरेंद्रनाथ दत्ता ने छात्रों को संबोधित करते हुए बताया कि पढ़ाई और निजी विकास, दोनों में लाइब्रेरी की भूमिका आज भी उतनी ही जरूरी है।
कार्यक्रम की अन्य झलकियां
कार्यक्रम का समापन डॉ. संतोष मोहन उपाध्याय के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ, जबकि शुरुआत में सरस्वती वंदना ब्रिष्टि मौसम कश्यप ने प्रस्तुत की। पूरे कार्यक्रम का संचालन सहायक प्राध्यापक पंखी कश्यप ने किया।
आयोजकों के मुताबिक, इस कार्यक्रम का मकसद छात्रों में पढ़ने की आदत बढ़ाना और ज्ञान व सीखने की संस्कृति को बनाए रखने में लाइब्रेरी की भूमिका को रेखांकित करना था।


















