नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अब अपनी सहूलियत या मजबूरी के हिसाब से अजीबोगरीब समय पर इंटरव्यू देने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। अटलांटा के कम्युनिकेशंस और मार्केटिंग एक्सपर्ट मिलार्ड ने जब रात के 9:30 बजे अपने लिविंग रूम में लैपटॉप सेट किया, तो उन्हें लगा कि इस अवसर को गंवाना ठीक नहीं होगा। उनके पास आए ईमेल में इंटरव्यू का समय खुला रखा गया था, इसलिए उन्होंने सोचा कि इसे जल्द से जल्द पूरा कर लेना ही बेहतर है। लेकिन इस प्रक्रिया का अनुभव उनके लिए बिल्कुल नया और असामान्य था। स्क्रीन पर एक के बाद एक सवाल आ रहे थे और सोचने के लिए उनके पास महज आधा मिनट यानी 30 सेकंड का समय था।
सवाल पूरी तरह से नौकरी के पद से जुड़े हुए थे, जैसे मीडिया में किसी कहानी को कैसे पेश किया जाए या स्थानीय पत्रकारों के साथ रिश्ते कैसे बनाए जाएं। लेकिन सिस्टम का तरीका काफी दबाव बनाने वाला था। स्क्रीन पर 30 सेकंड का टाइमर खत्म होते ही एक बीप की आवाज आती थी और उम्मीदवार के पास अपना जवाब रिकॉर्ड करने के लिए केवल दो मिनट का समय होता था। मिलार्ड ने इस पूरी प्रक्रिया को बिल्कुल अलग दुनिया का अनुभव बताया। हालांकि, इस साल जनवरी में दिए गए इस देर रात के इंटरव्यू के बाद मार्च में उन्हें एक ऑटोमेटेड रिजेक्शन ईमेल मिल गया। यह अकेला मामला नहीं है, बल्कि आज के जॉब मार्केट में देर रात एआई और ऑटोमेटेड वीडियो टूल्स के जरिए इंटरव्यू देने का चलन तेजी से बढ़ रहा है।
देर रात इंटरव्यू देने के आंकड़ों में भारी उछाल
वॉयस-एआई रिक्रूटमेंट सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी रिबन के सह-संस्थापक अर्शम गहरामानी ने बताया कि जब उन्होंने अपना प्लेटफॉर्म लॉन्च किया, तो उन्हें तुरंत देर रात के इंटरव्यू का यह ट्रेंड नजर आने लगा। रिबन का इस्तेमाल करने वाली 500 से अधिक कंपनियों के डेटा के अनुसार, लगभग 24 प्रतिशत एआई इंटरव्यू स्थानीय समय के हिसाब से रात 10 बजे से तड़के 2 बजे के बीच होते हैं। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के ग्राहकों के मामले में तो यह आंकड़ा बढ़कर 35 प्रतिशत तक पहुंच जाता है।
इसी तरह, प्रमुख हायरिंग प्लेटफॉर्म ग्रीनहाउस के आंकड़ों से पता चलता है कि उनके वॉयस एजेंट द्वारा इंटरव्यू दिए जाने वाले उम्मीदवारों में से लगभग 15 से 20 प्रतिशत लोग रात के समय अपना इंटरव्यू शेड्यूल करते हैं। मई में ग्रीनहाउस द्वारा एक स्टार्टअप के अधिग्रहण के बाद कंपनी के वॉयस एआई विभाग के प्रमुख बने ओफिर सैमसन का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को इंसान द्वारा लिए जाने वाले इंटरव्यू का पूरी तरह विकल्प नहीं बनना चाहिए। लेकिन इसके बावजूद इस तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।
आखिर उम्मीदवार रात 1:00 बजे इंटरव्यू देने के लिए क्यों मजबूर हैं?
देर रात इंटरव्यू के इस ट्रेंड के पीछे उम्मीदवारों की व्यावहारिक मजबूरियां और व्यक्तिगत जरूरतें मुख्य वजह हैं। बहुत से माता-पिता दिन भर काम और बच्चों की देखभाल में इतने व्यस्त रहते हैं कि वे रात 10 बजे से पहले 30 मिनट का समय भी नहीं निकाल सकते। यही स्थिति उन कर्मचारियों की है जो प्रति घंटे के हिसाब से वेतन पाते हैं या जो किसी शोर-शराबे वाली फैक्ट्री या किचन में काम कर रहे होते हैं। उनके पास अपनी मौजूदा नौकरी के समय पर इंटरव्यू देने का कोई विकल्प नहीं होता।
विशेषज्ञों के अनुसार, एआई टूल्स ने उन लोगों को एक नया विकल्प दिया है जिनके पास समय की बेहद कमी होती है। हालांकि, कई मामलों में उम्मीदवार सहूलियत से ज्यादा मजबूरी में रात के समय इंटरव्यू देते हैं ताकि वे इस मुश्किल जॉब मार्केट में किसी भी अवसर से न चूकें।
एआई इंटरव्यू का मूल्यांकन कैसे होता है?
ऑटोमेटेड वीडियो और वॉयस एआई इंटरव्यू में मूल्यांकन के लिए अलग-अलग नियम और रूब्रिक तय किए जाते हैं जो नौकरी के पद पर निर्भर करते हैं। रिबन के सह-संस्थापक अर्शम गहरामानी के अनुसार, किसी वेल्डर का इंटरव्यू लेते समय एआई उनसे तकनीकी कौशल और प्रमाणपत्रों से जुड़े सवाल पूछ सकता है, जबकि सेल्स से जुड़े पद के लिए उम्मीदवार के उत्साह का स्कोर मापा जाता है।
एआई उम्मीदवार के जवाबों और फुटेज का विश्लेषण करके यह जांचता है कि वह तय रूब्रिक पर कितना खरा उतरता है, और फिर उन्हें एक स्कोर दिया जाता है। यह स्कोर और रिकॉर्ड की गई फुटेज रिक्रूटर को भेज दी जाती है। हालांकि, वास्तविकता यह भी है कि कई बार इंसान उन रिकॉर्ड की गई वीडियो को कभी देखते भी नहीं हैं और केवल एआई द्वारा दिए गए स्कोर के आधार पर फैसला ले लिया जाता है।
उम्मीदवारों की आशंकाएं और घटता भरोसा
तकनीक के इस प्रसार के बावजूद जॉब सीकर्स में एआई इंटरव्यू को लेकर काफी आशंकाएं और हिचकिचाहट है। मई में ग्रीनहाउस द्वारा किए गए एक सर्वे में सामने आया कि लगभग दो-तिहाई उम्मीदवारों का इंटरव्यू किसी एआई एजेंट द्वारा लिया गया है, जो छह महीनों में 13 प्रतिशत की वृद्धि दिखाता है। इसके बावजूद अधिकतर लोग इस बदलाव से खुश नहीं हैं।
सर्वे में शामिल 38 प्रतिशत अमेरिकी उम्मीदवारों ने कहा कि वे एआई द्वारा इंटरव्यू दिए जाने के बजाय नौकरी की आवेदन प्रक्रिया से पीछे हट गए। वहीं 12 प्रतिशत लोगों ने कहा कि अगर एआई इंटरव्यू अनिवार्य किया जाता है, तो वे आवेदन ही नहीं करेंगे। उम्मीदवारों के बीच सबसे बड़ा तनाव इस बात का है कि उनकी फुटेज का इस्तेमाल किस तरह होगा और क्या किसी खास शब्द या 'बज़वर्ड' का इस्तेमाल न करने पर एआई उन्हें सीधे खारिज कर सकता है।
जॉब मार्केट की कड़वी सच्चाई और बढ़ता मानसिक तनाव
ग्रीनहाउस के ओफिर सैमसन का तर्क है कि एआई इंटरव्यू इंसानों की जगह लेने के लिए नहीं, बल्कि रिज़्यूमे के विशाल ढेर में से योग्य उम्मीदवारों को ढूंढने का एक जरिया है। आज के समय में हजारों लोग एआई की मदद से अपना रिज़्यूमे बना रहे हैं, जिससे कंपनियों के पास आवेदनों की बाढ़ आ जाती है। ऐसे में उम्मीदवारों का रिज़्यूमे किसी 'ब्लैक होल' में गायब हो जाता है। सैमसन के मुताबिक, एआई इंटरव्यू उम्मीदवारों को सीधे रिजेक्ट होने या उत्तर न मिलने के बजाय अगले दौर में किसी इंसान से बात करने का बेहतर मौका देता है।
हालांकि, उम्मीदवारों के लिए यह दौर काफी थका देने वाला और निराशाजनक साबित हो रहा है। अपनी नौकरी गंवाने के एक साल बाद भी मिलार्ड लगातार काम की तलाश कर रहे हैं। इस प्रक्रिया के मानसिक और भावनात्मक तनाव से प्रेरित होकर उन्होंने 'आफ्टर केयरफुल कंसीडरेशन' नाम से एक वन-मैन शो लिखा, जिसका प्रीमियर मई में अटलांटा फ्रिंज फेस्टिवल में हुआ। मिलार्ड के अनुसार, आज के जॉब मार्केट में ऐसा महसूस होता है जैसे आप खालीपन में चिल्ला रहे हैं और आपकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं है।



















