मणिपुर सरकार ने राज्य भर के सभी शैक्षणिक संस्थानों को 20 अगस्त से 22 अगस्त 2026 तक पूरी तरह से बंद रखने का निर्देश जारी किया है। राज्य प्रशासन ने कानून और व्यवस्था की नाजुक स्थिति तथा बढ़ते नागरिक असंतोष को ध्यान में रखते हुए छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय लिया है। तीन दिनों का यह अवकाश प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों से लेकर उच्च शिक्षण संस्थानों तथा विश्वविद्यालयों तक सभी पर समान रूप से लागू रहेगा।
आदेश का दायरा और प्रशासनिक निर्देश
शिक्षा विभाग द्वारा बुधवार को जारी इस आदेश को मणिपुर के राज्यपाल की औपचारिक स्वीकृति प्राप्त हुई है। यह निर्देश सरकारी, सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त (निजी) सभी क्षेत्रों के संस्थानों पर लागू होता है। इस आदेश के तहत माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) सहित अन्य सभी बोर्डों से संबद्ध स्कूल 20 अगस्त 2026 (गुरुवार) से 22 अगस्त 2026 (शनिवार) तक पूरी तरह बंद रहेंगे। इसके साथ ही राज्य के सभी कॉलेजों, उच्च शिक्षा संस्थानों और विश्वविद्यालयों में भी शिक्षण कार्य स्थगित रहेगा।
राज्य के सभी जिलों में इस निर्णय का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग ने क्षेत्रीय अधिकारियों को तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। सभी उपायुक्तों, क्षेत्रीय शिक्षा अधिकारियों (ZEO) और संबंधित निदेशकों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी शैक्षणिक संस्थानों तक इस सरकारी आदेश को पहुंचाने और लागू कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सुरक्षा स्थिति और छात्रों की सुरक्षा पर जोर
तीन दिनों की इस तालाबंदी की घोषणा राज्य में लगातार बदलते और संवेदनशील सुरक्षा माहौल की पृष्ठभूमि में की गई है। हाल के दिनों में नए सिरे से हुए नागरिक विरोध प्रदर्शनों और अशांति के कारण सड़कों पर आवाजाही करने वाले विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई थीं। प्रशासन ने संभावित हिंसा या सड़कों पर व्यवधान से बच्चों को बचाने के एहतियाती उपाय के रूप में यह कदम उठाया है।
JFD का आंदोलन और NRC अपडेट की मांग
शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने का यह फैसला राज्य में जारी अन्य बड़े राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों से भी जुड़ा हुआ है। गुरुवार 20 अगस्त से कैंपेन फॉर जस्ट एंड फेयर डिलिमिटेशन (JFD) ने पूरे मणिपुर में राज्य और केंद्र सरकार के कार्यालयों के खिलाफ असहयोग आंदोलन की शुरुआत की है। इस आंदोलन के कारण प्रशासनिक कार्यों में बड़ी बाधा आने की आशंका जताई जा रही है।
यह असहयोग आंदोलन हाल ही में आयोजित 48 घंटे की उस आम हड़ताल के बाद आया है, जिसमें राष्ट्रीय जनगणना प्रक्रिया शुरू होने से पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को अद्यतन करने की मांग की गई थी। एनआरसी और परिसीमन से जुड़ी मांगों को लेकर बने तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए अधिकारियों ने माना कि आगामी दिनों में सामान्य रूप से कक्षाएं संचालित करना संभव नहीं होगा।



















