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यूपीएससी एनडीए परीक्षा के बाद मेडिकल टेस्ट में अनफिट करने वाले 5 मुख्य शारीरिक कारण और नियमपरीक्षा
20 अग॰ 2026, 1:00 pm (66 दिन पहले)· 4

यूपीएससी एनडीए परीक्षा के बाद मेडिकल टेस्ट में अनफिट करने वाले 5 मुख्य शारीरिक कारण और नियम

नेशनल डिफेंस एकेडमी और नेवल एकेडमी परीक्षा के एसएसबी इंटरव्यू के बाद होने वाले मेडिकल राउंड में कई अभ्यर्थी छोटी शारीरिक कमियों से बाहर हो जाते हैं। जानिए विजन, बीएमआई, टैटू और फ्लैट फुट से जुड़े वे 5 कड़े नियम जो आपका चयन रोक सकते हैं।

भारतीय सशस्त्र बलों में बतौर सैन्य अधिकारी भर्ती होकर देश सेवा करना लाखों युवाओं का सपना होता है। संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी द्वारा आयोजित की जाने वाली नेशनल डिफेंस एकेडमी और नेवल एकेडमी परीक्षा इस सपने को पूरा करने का मुख्य जरिया है। हर साल देश भर से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी इस प्रतिष्ठित परीक्षा में हिस्सा लेते हैं। हालांकि लिखित परीक्षा में सफलता हासिल करना और उसके बाद 5 दिनों तक चलने वाले कठिन सर्विस सिलेक्शन बोर्ड यानी एसएसबी इंटरव्यू को क्रैक करना कोई आसान काम नहीं है। लेकिन इस लंबी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पार करने के बाद भी कई अभ्यर्थियों का सपना अंतिम चरण में टूट जाता है, जब वे मेडिकल बोर्ड के कड़े मानकों पर खरे नहीं उतर पाते।

सैन्य अधिकारियों को बेहद कठिन, दुर्गम और विषम परिस्थितियों में तैनात रहकर अपने कर्तव्यों का पालन करना होता है। इसी वजह से सशस्त्र बलों में शारीरिक फिटनेस के मानक बहुत कड़े और समझौता न करने योग्य रखे गए हैं। हर साल अनेक होनहार उम्मीदवार केवल इसलिए बाहर हो जाते हैं क्योंकि उन्हें समय रहते अपनी शारीरिक कमियों या मेडिकल संबंधी समस्याओं की सही जानकारी नहीं होती। यदि आप भी रक्षा बलों में अफसर बनने की तैयारी कर रहे हैं, तो उन 5 सबसे प्रमुख कारणों को विस्तार से समझना जरूरी है जिनके आधार पर मेडिकल बोर्ड उम्मीदवारों को अनफिट घोषित कर देता है।

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1. हड्डियों और पैरों की बनावट से जुड़ी समस्याएं: नॉक-नी और फ्लैट फुट

सेना में प्रवेश के लिए शारीरिक मजबूती और पैरों की सही बनावट को प्राथमिक पैमाना माना जाता है। नॉक-नी और फ्लैट फुट दो ऐसी शारीरिक समस्याएं हैं जो मेडिकल जांच के दौरान सबसे ज्यादा उम्मीदवारों के रिजेक्शन का कारण बनती हैं। जब कोई अभ्यर्थी सावधान की मुद्रा में सीधा खड़ा होता है और उसके दोनों घुटने आपस में टकराते हैं, तो इस स्थिति को नॉक-नी कहा जाता है। यह कमी सैन्य प्रशिक्षण के दौरान दौड़ने, कूदने और लंबी दूरी तक मार्च करने में बड़ी रुकावट पैदा करती है।

इसके अलावा, पैर के तलवे में सामान्य घुमाव या आर्क का न होना फ्लैट फुट कहलाता है। समतल तलवे वाले अभ्यर्थियों के लिए लंबी दूरी तक दौड़ना या भारी वजन उठाकर चलना बेहद कष्टदायक होता है। फ्लैट फुट की वजह से दौड़ते समय पैरों के जोड़ों और रीढ़ की हड्डी पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे भविष्य में गंभीर शारीरिक क्षति हो सकती है। यदि उम्मीदवार के पैरों में यह समस्याएं पाई जाती हैं, तो उसे सेना के सेट मानकों पर अयोग्य घोषित कर दिया जाता है।

2. कमजोर विजन, लेसिक और आंखों की बीमारियां

सशस्त्र बलों के तीनों अंगों यानी थल सेना, नौसेना और वायुसेना में उम्मीदवारों की आंखों की जांच के लिए बेहद सख्त और अलग-अलग मानक तय किए गए हैं। वायुसेना की फ्लाइंग ब्रांच के लिए विजन के नियम सबसे ज्यादा कठोर हैं। इस ब्रांच के अभ्यर्थियों के लिए आंखों की दृष्टि का पूरी तरह 6/6 होना अनिवार्य है। फ्लाइंग ब्रांच के लिए चश्मा लगाने वाले अभ्यर्थी योग्य नहीं माने जाते, और न ही इसमें लेसिक (LASIK) सर्जरी करवा चुके उम्मीदवारों को कोई छूट दी जाती है।

दृष्टि की कमजोरी के अलावा आंखों से जुड़ी अन्य बीमारियों को लेकर भी मेडिकल बोर्ड कोई समझौता नहीं करता। कलर ब्लाइंडनेस (रंगों की पहचान न कर पाना), भेंगापन (Squint) और नाइट ब्लाइंडनेस (रात में स्पष्ट न दिखना) जैसी समस्याओं से पीड़ित अभ्यर्थियों को री-मेडिकल का मौका दिए बिना सीधे परमानेंट अनफिट घोषित कर दिया जाता है। सैन्य अभियानों में सटीक नजर और रंगों की तुरंत पहचान बेहद निर्णायक होती है, इसीलिए आंखों के मानकों का कड़ाई से पालन किया जाता है।

3. शरीर का वजन और बीएमआई का असंतुलन

मेडिकल बोर्ड अभ्यर्थी की कुल लंबाई और उम्र के अनुपात में उसके शरीर के सही वजन की गहन जांच करता है। इसके लिए रक्षा बलों का एक तय ऑफिशियल बॉडी मास इंडेक्स (BMI) चार्ट होता है। यदि किसी उम्मीदवार का वजन इस ऑफिशियल चार्ट में दी गई मानक सीमा से 10% से अधिक कम या 10% से अधिक ज्यादा पाया जाता है, तो उसे पहली बार में अनफिट मान लिया जाता है।

हालांकि वजन से जुड़े मामलों में राहत की बात यह है कि इसे स्थायी रिजेक्शन नहीं माना जाता। अधिक या कम वजन वाले उम्मीदवारों को टेम्परेरी अनफिट घोषित किया जाता है और उन्हें री-मेडिकल का मौका दिया जाता है। इसके लिए अभ्यर्थियों को 42 दिनों का समय मिलता है, जिसके भीतर वे उचित खान-पान और कसरत के जरिए अपने वजन को नियंत्रित करके दोबारा मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित हो सकते हैं।

4. कान की स्वच्छता, अत्यधिक पसीना और डीएनएस

अक्सर देखा जाता है कि अभ्यर्थी बड़ी बीमारियों पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन शरीर की छोटी-छोटी समस्याओं को नजरअंदाज कर देते हैं, जो मेडिकल राउंड में रिजेक्शन का कारण बन जाती हैं। इनमें डीएनएस यानी नाक की हड्डी का टेढ़ा होना एक प्रमुख समस्या है। नाक की हड्डी टेढ़ी होने से सांस लेने में कठिनाई होती है, जो उच्च पर्वतीय या कठिन सैन्य इलाकों में घातक साबित हो सकती है।

इसी तरह हाइपरहाइड्रोसिस की समस्या भी रिजेक्शन की वजह बनती है, जिसमें हथेली और तलवों में सामान्य से बहुत ज्यादा पसीना आता है। अत्यधिक पसीने के कारण हथियार पकड़ने, रस्सियों पर चढ़ने या उपकरणों को संभालने में ग्रिप छूटने का खतरा रहता है। इसके अलावा कान के पर्दे में छेद होना या कान में अत्यधिक गंदगी व वैक्स जमी होना भी उम्मीदवार को शुरुआती जांच में ही अनफिट कर सकता है। कान में वैक्स जैसी साधारण चीज के लिए भी अभ्यर्थियों को पहली बार में री-मेडिकल थमा दिया जाता है।

5. शरीर पर टैटू और त्वचा संबंधी गंभीर रोग

भारतीय सेना में शरीर पर बने टैटू और टैटू की लोकेशन को लेकर बेहद कड़े और स्पष्ट नियम लागू हैं। कोहनी से लेकर हथेली के अंदरूनी हिस्से, हथेली के पिछले भाग और शरीर के किसी भी ऐसे हिस्से पर जो वर्दी पहनने के बाद दिखाई देता है, टैटू पूरी तरह प्रतिबंधित है। दिखाई देने वाले अंगों पर टैटू होने की स्थिति में अभ्यर्थी को सीधे अयोग्य ठहरा दिया जाता है।

टैटू के अलावा त्वचा से जुड़ी बीमारियां भी रिजेक्शन का बड़ा कारण बनती हैं। चेहरे या शरीर के किसी भी भाग पर एग्जिमा, सफेद दाग (Vitiligo) या अन्य कोई गंभीर और फैलने वाला संक्रामक त्वचा रोग होने पर मेडिकल बोर्ड उम्मीदवार को अनफिट घोषित कर देता है। सेना में अनुशासन, स्वच्छता और शारीरिक फिटनेस का विशेष महत्व है, इसलिए इन सभी नियमों का अक्षरशः पालन किया जाता है।

सवाल-जवाब

क्या चश्मा पहनने वाले अभ्यर्थी एनडीए के जरिए वायुसेना की फ्लाइंग ब्रांच में जा सकते हैं?
नहीं, वायुसेना की फ्लाइंग ब्रांच के लिए आंखों का विजन बिल्कुल 6/6 होना अनिवार्य है और इसमें चश्मा या लेसिक (LASIK) सर्जरी की अनुमति नहीं होती है।
एनडीए मेडिकल में वजन ज्यादा या कम होने पर क्या उम्मीदवार सीधे बाहर हो जाता है?
नहीं, ऑफिशियल बीएमआई चार्ट से 10% तक कम या ज्यादा वजन होने पर उम्मीदवार को टेम्परेरी अनफिट किया जाता है और वजन नियंत्रित करने के लिए 42 दिनों का री-मेडिकल समय दिया जाता है।
टैटू बनवाने वाले उम्मीदवारों के लिए एनडीए में क्या नियम हैं?
कोहनी से हथेली के अंदरूनी हिस्से, हथेली के पीछे और शरीर के किसी भी दिखाई देने वाले भाग पर टैटू पूरी तरह प्रतिबंधित है।
फ्लैट फुट और नॉक-नी क्या हैं और ये मेडिकल में क्यों रिजेक्ट होते हैं?
नॉक-नी में सीधे खड़े होने पर घुटने टकराते हैं और फ्लैट फुट में पैर के तलवे का घुमाव नहीं होता; इनसे लंबी दौड़ और मार्चिंग के दौरान पैरों तथा रीढ़ की हड्डी पर बुरा असर पड़ता है।
क्या कान की वैक्स जैसी छोटी समस्या के कारण भी मेडिकल में अनफिट किया जा सकता है?
हां, कान में अत्यधिक गंदगी या वैक्स जमी होने पर पहली बार में उम्मीदवार को अनफिट घोषित किया जा सकता है, इसलिए मेडिकल से पहले कान की सफाई जरूरी है।
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