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उत्तर प्रदेश के मऊ में बोरे का बस्ता और टाट-पट्टी की पढ़ाई, बदहाली के बीच सपने संजो रहे प्राथमिक स्कूल के छात्रशिक्षा
15 अग॰ 2026, 11:14 am (73 दिन पहले)· 1

उत्तर प्रदेश के मऊ में बोरे का बस्ता और टाट-पट्टी की पढ़ाई, बदहाली के बीच सपने संजो रहे प्राथमिक स्कूल के छात्र

मऊ जिले के मधुबन क्षेत्र स्थित हरिजन मिश्रित प्राइमरी पाठशाला में मूलभूत सुविधाओं के अभाव और जर्जर भवन के बावजूद बच्चे पढ़ाई के प्रति समर्पित हैं। आर्थिक तंगी से जूझते दलित परिवारों के छात्र शिक्षा के जरिए अपना भविष्य सुधारने का प्रयास कर रहे हैं।

एक तरफ जहां देश भर में प्राथमिक शिक्षा को आधुनिक और डिजिटल बनाने की मुहिम चलाई जा रही है, वहीं ग्रामीण इलाकों के कई विद्यालयों में आज भी बुनियादी जरूरतों का भारी अभाव देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में स्थित एक प्राथमिक विद्यालय ऐसा भी है, जहां बच्चे बेहद कठिन परिस्थितियों और संसाधनों की कमी के बीच शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यहां पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर और दलित परिवारों से आते हैं, जिनके लिए स्कूल में मिलने वाली शिक्षा और दोपहर का भोजन ही आगे बढ़ने का एकमात्र संबल बना हुआ है।

अभावों के बीच शिक्षा हासिल करने की ललक

मऊ जनपद के मधुबन तहसील क्षेत्र अंतर्गत खैरा देवारा दुबारी में स्थित हरिजन मिश्रित प्राइमरी पाठशाला की स्थिति काफी चिंताजनक है। इस विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को बुनियादी फर्नीचर तक नसीब नहीं है और वे आज भी जमीन पर टाट बिछाकर बैठने को विवश हैं। विद्यालय की एक छात्रा ने अपनी स्थिति साझा करते हुए बताया कि उसका परिवार दलित समुदाय से आता है और उनकी आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि वे किसी निजी अथवा महंगे स्कूल का खर्च वहन करने में असमर्थ हैं। इसी मजबूरी के कारण वह इस सरकारी विद्यालय में पढ़ाई कर रही है। हालांकि, तमाम कठिनाइयों के बावजूद इस छात्रा का सपना है कि वह बेहतर शिक्षा हासिल करे ताकि भविष्य में अपने परिवार को गरीबी और सामाजिक भेदभाव के दौर से बाहर निकाल सके।

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प्लास्टिक के बोरे से बना बस्ता और गरीबी की हकीकत

विद्यालय में अध्ययनरत एक अन्य छात्रा की कहानी भी बुनियादी सुविधाओं की कमी को उजागर करती है। परिवार की बेहद खराब आर्थिक स्थिति के कारण उसके पास स्कूल जाने के लिए यूनिफॉर्म और कॉपी-किताबें रखने के लिए बस्ता तक उपलब्ध नहीं है। सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने के बाद भी उसकी दैनिक जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं। ऐसे में छात्रा की मां ने घरेलू स्तर पर ही प्लास्टिक के एक बोरे को सिलकर उसके लिए बस्ता तैयार कर दिया। वह इसी बोरे से बने बस्ते में अपनी कॉपियां और किताबें रखकर प्रतिदिन स्कूल आती है। छात्रा का कहना है कि यदि उसके परिवार की माली हालत ठीक होती, तो वह किसी बेहतर सुविधाओं वाले विद्यालय में दाखिल होती, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में वह इसी व्यवस्था में पढ़ाई करने को मजबूर है।

जर्जर भवन और बाहर पढ़ाई कराने की मजबूरी

विद्यालय में अध्यापन कार्य की जिम्मेदारी तीन शिक्षकों पर है। ये शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय पहुंचकर बच्चों को पढ़ाते हैं। विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक तारकेश्वर के अनुसार, शासन स्तर से जो भी सुविधाएं या सामग्री प्राप्त होती हैं, उन्हें बच्चों तक पहुंचाया जाता है। वर्तमान में छात्रों को पाठ्य पुस्तकें, कॉपियां और मिड डे मील उपलब्ध कराया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि विद्यालय की इमारत काफी जर्जर हो चुकी है। भवन की दयनीय स्थिति के कारण बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई बार कक्षाओं का संचालन भवन के बाहर खुले मैदान में करना पड़ता है।

शिक्षा के माध्यम से गरीबी और भेदभाव मिटाने का सपना

संसाधनों की घोर कमी और जर्जर बुनियादी ढांचे के बावजूद विद्यालय का स्टाफ छात्रों के मार्गदर्शन में जुटा हुआ है। शिक्षकों का प्रयास है कि विपरीत परिस्थितियों के बाद भी बच्चे अपनी पढ़ाई से दूर न हों। दूसरी ओर, विद्यार्थी भी अपनी आर्थिक तंगी और सामाजिक चुनौतियों को आड़े न आने देने का संकल्प लिए हुए हैं। इन बच्चों का मानना है कि केवल शिक्षा ही वह मार्ग है जिसके जरिए वे अपनी गरीबी, विषमता और भेदभाव को समाप्त कर समाज में एक सम्मानजनक स्थान हासिल कर सकते हैं।

सवाल-जवाब

यह मामला किस जिले और स्कूल का है?
यह मामला उत्तर प्रदेश के मऊ जिले की मधुबन तहसील स्थित खैरा देवारा दुबारी के हरिजन मिश्रित प्राइमरी पाठशाला का है।
स्कूल के बच्चों को पढ़ाई के दौरान किन मुख्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है?
छात्रों को बैठने के लिए टाट-पट्टी का सहारा लेना पड़ता है, स्कूल का भवन जर्जर है और कई बच्चों के पास स्कूल बैग व यूनिफॉर्म खरीदने के पैसे नहीं हैं।
बैग न होने पर एक छात्रा की मां ने क्या उपाय निकाला?
छात्रा के पास बैग न होने पर उसकी मां ने घर पर ही प्लास्टिक के बोरे को सिलकर उसके लिए बस्ता बनाया।
स्कूल में कितने शिक्षक नियुक्त हैं और प्रभारी प्रधानाध्यापक कौन हैं?
स्कूल में तीन शिक्षक नियुक्त हैं और इसके प्रभारी प्रधानाध्यापक तारकेश्वर हैं।
जर्जर भवन के कारण पढ़ाई किस तरह प्रभावित होती है?
भवन की हालत खराब होने के कारण सुरक्षा के लिहाज से बच्चों को अक्सर बाहर बैठाकर पढ़ाना पड़ता है।
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