उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के कल्याणपुर इलाके में स्थित सरकारी पूर्व माध्यमिक विद्यालय की जर्जर स्थिति ने बच्चों की सुरक्षा पर गहरा संकट खड़ा कर दिया है। विद्यालय की पुरानी इमारत के अत्यंत खस्ताहाल होने के कारण हादसे की आशंका बनी हुई थी, जिसके बाद प्रशासन ने मजबूरी में कक्षाओं को एक मंदिर परिसर में स्थानांतरित कर दिया। वर्तमान समय में स्कूली बच्चे मंदिर के प्रांगण में जमीन पर बैठकर अपनी दैनिक पढ़ाई पूरी कर रहे हैं, जबकि सरकारी स्कूल का जर्जर ढांचा पूरी तरह लावारिस स्थिति में पड़ा हुआ है।
जर्जर इमारत और टपकती छत ने बढ़ाया हादसे का खतरा
कल्याणपुर के पूर्व माध्यमिक विद्यालय की पुरानी इमारत की हालत पिछले काफी समय से बेहद दयनीय बनी हुई थी। बरसात और सामान्य दिनों में भी भवन की छत से पानी लगातार टपकता रहता था। इमारत के बाहरी हिस्सों के बारजे गिर चुके थे और दीवारों तथा लेंटर से कंक्रीट झड़ने के बाद अंदर लगी लोहे की सरिया साफ दिखाई देने लगी थी। इस तरह के खतरनाक माहौल में छोटे बच्चों को बैठाकर पढ़ाना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा था। विद्यालय प्रबंधन और शिक्षक बच्चों की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंतित थे, क्योंकि इमारत का कोई भी हिस्सा कभी भी गिर सकता था।
सुरक्षा संबंधी गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए विद्यालय प्रशासन ने उच्च अधिकारियों को स्थिति की गंभीरता से अवगत कराया। इसके बाद बच्चों की जान की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए कक्षाओं को मंदिर परिसर में चलाने का फैसला लिया गया। पूर्व माध्यमिक विद्यालय कल्याणपुर की इंचार्ज चंदा देवी ने बताया कि विद्यालय का संचालन 26 मार्च से मंदिर प्रांगण में किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पानी के भारी रिसाव और बारजे गिरने की वजह से बच्चों को वहां बैठाना संभव नहीं रह गया था, इसलिए अधिकारियों की सहमति के बाद यह वैकल्पिक कदम उठाया गया।
नामांकन बचाने के लिए कल्याणपुर में दोबारा शुरू हुआ था स्कूल
विद्यालय के संचालन का इतिहास भी चुनौतियों से भरा रहा है। इंचार्ज चंदा देवी के अनुसार, वर्ष 2024 में विद्यालय भवन की खराब स्थिति के कारण इसे अस्थायी रूप से निकटवर्ती गांव बीबीपुर में स्थानांतरित कर दिया गया था। हालांकि, स्थान बदलने का बुरा असर बच्चों की पढ़ाई और स्कूल के नामांकन पर पड़ा। कल्याणपुर से दूरी अधिक होने की वजह से कई बच्चों ने स्कूल आना छोड़ दिया और छात्र संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई। विद्यालय को बंद होने से बचाने और स्थानीय बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखने के उद्देश्य से इसे वापस कल्याणपुर लाया गया था।
कल्याणपुर वापस आने के बाद भी मूल भवन की मरम्मत या नए निर्माण की कोई व्यवस्था नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप, जर्जर इमारत में बच्चों को बैठाना असुरक्षित होने के कारण मंदिर ही एकमात्र सहारा बना। विद्यालय को बचाने की इस कवायद में शिक्षकों ने स्थानीय समुदाय के सहयोग से मंदिर परिसर को पठन-पाठन का केंद्र बनाया, ताकि बच्चे अपनी प्राथमिक शिक्षा से वंचित न रहें।
विभाग की कार्रवाई और राज्य परियोजना कार्यालय को भेजा गया प्रस्ताव
जर्जर भवन की गंभीर स्थिति के संबंध में विद्यालय इंचार्ज द्वारा बेसिक शिक्षा अधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारी को लिखित शिकायतें सौंपी गई थीं। इमारत की दयनीय अवस्था की तस्वीरें और रिपोर्ट मिलने के बाद उच्च अधिकारियों ने सख्त निर्देश जारी किए कि किसी भी परिस्थिति में जर्जर भवन के भीतर कक्षाएं संचालित न की जाएं। लंबे समय से खाली पड़े इस भवन की देखभाल न होने से इसकी स्थिति और अधिक खराब हो चुकी है तथा बच्चे लगातार खतरे के साए से दूर मंदिर में पढ़ रहे हैं।
जौनपुर के बेसिक शिक्षा अधिकारी समीर यादव ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि खंड शिक्षा अधिकारी के जरिए उन्हें कल्याणपुर पूर्व माध्यमिक विद्यालय के मंदिर में संचालित होने की सूचना प्राप्त हुई थी। उन्होंने बताया कि विभाग की तकनीकी जांच के बाद विद्यालय भवन को आधिकारिक तौर पर जर्जर घोषित कर दिया गया है। जर्जर इमारत के स्थान पर नए भवन के निर्माण या पुनर्निर्माण के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार करके राज्य परियोजना कार्यालय को भेज दिया गया है, ताकि वहां से बजट और प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त हो सके।
स्थायी भवन का इंतजार और भविष्य की चुनौतियां
बेसिक शिक्षा अधिकारी समीर यादव ने कहा कि विभाग की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि भवन की समस्या के कारण बच्चों के नामांकन और शैक्षणिक सत्र पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। इसी वजह से फिलहाल मंदिर के रूप में वैकल्पिक स्थान का चयन किया गया है। उन्होंने स्कूल के शिक्षकों को कड़े निर्देश दिए हैं कि पठन-पाठन का माहौल प्रभावित नहीं होना चाहिए और बच्चों की पढ़ाई में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जानी चाहिए। विभागीय स्तर पर जल्द ही किसी अन्य उपयुक्त सरकारी भवन या किराए के स्थान की व्यवस्था करने के प्रयास जारी हैं।
राज्य परियोजना कार्यालय से नए भवन के निर्माण अथवा बजट स्वीकृति के निर्देश मिलने तक यह अस्थायी व्यवस्था जारी रहेगी। हालांकि, मंदिर परिसर में पढ़ाई संचालित होना एक तात्कालिक समाधान तो है, लेकिन मौसम के बदलाव और अन्य व्यावहारिक कठिनाइयों के बीच यह दीर्घकालिक उपाय नहीं हो सकता। कल्याणपुर के ग्रामीण, अभिभावक और छात्र अब इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि कब शासन से नए भवन की मंजूरी मिलेगी और कब बच्चों को एक सुरक्षित, आधुनिक तथा स्थायी स्कूल भवन नसीब हो पाएगा।



















