हिन्दी सिनेमा जगत में 15 अगस्त या स्वतंत्रता दिवस के आसपास का हफ्ता हमेशा से फिल्मों की बंपर कमाई और सफलता के लिए सबसे बेहतरीन दौर माना जाता है। हालांकि, अगर तारीखों के लिहाज से बात करें तो 17 अगस्त का दिन बॉलीवुड के इतिहास में बेहद मायूसी भरा साबित हुआ है। जब भी इस विशेष तारीख पर बड़े सितारों से सजी फिल्में सिनेमाघरों में उतरीं, दर्शकों ने उन्हें सिरे से खारिज कर दिया। सलमान खान और आमिर खान जैसे नामचीन सुपरस्टार्स से लेकर इंडस्ट्री के मंझे हुए निर्देशकों तक, इस तारीख को बॉक्स ऑफिस पर केवल असफलता ही हाथ लगी। आइए विस्तार से जानते हैं उन चार बड़ी फिल्मों के बारे में जो 17 अगस्त को रिलीज होने के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर असफल रहीं।
जवानी जिंदाबाद और आमिर खान का दौर (1990)
साल 1990 में आमिर खान का फिल्मी करियर अपने चरम पर था। कयामत से कयामत तक और दिल जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में देने के बाद, उनकी अगली फिल्म जवानी जिंदाबाद ठीक 17 अगस्त 1990 को सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई थी। निर्देशक अरुण भट्ट के निर्देशन में बनी इस मूवी में आमिर खान के साथ फराह नाज ने मुख्य भूमिका निभाई थी। इस पूरी फिल्म की पटकथा दहेज जैसी गंभीर सामाजिक कुरीति के खिलाफ युवाओं के संघर्ष और विरोध के इर्द-गिर्द बुनी गई थी। उस दौर में आमिर खान की जबरदस्त लोकप्रियता और फिल्म में दिए गए एक मजबूत सामाजिक संदेश के बावजूद, इसका कमजोर संगीत और ढीला स्क्रीनप्ले दर्शकों को थिएटर्स तक लाने में पूरी तरह असफल रहा। परिणामस्वरूप, स्वतंत्रता दिवस के ठीक बाद 17 अगस्त को रिलीज हुई आमिर खान की यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर धड़ाम हो गई और फ्लॉप फिल्मों की सूची में शामिल हो गई।
मेरी प्यारी बहिनिया बनेगी दुल्हनिया की नाकामी (2001)
नए दशक की शुरुआत यानी 17 अगस्त 2001 को रिलीज हुई मेरी प्यारी बहिनिया बनेगी दुल्हनिया बॉक्स ऑफिस पर बेहद बुरी तरह असफल रही। निर्देशक जयंत गिलाटर द्वारा बनाई गई इस पारिवारिक ड्रामा फिल्म में डिस्को डांसर के रूप में मशहूर मिथुन चक्रवर्ती और राजेश्वरी सचदेव ने भाई-बहन की भूमिका अदा की थी। इस प्रोजेक्ट में भाई और बहन के पवित्र रिश्ते के साथ-साथ एक पारिवारिक ड्रामा का तड़का लगाने का प्रयास किया गया था, लेकिन इसकी बेहद पुरानी नब्बे के दशक वाली घिसी-पिटी कहानी और लचर प्रोडक्शन को मिलेनियल दर्शकों ने पहले ही दिन नकार दिया। फिल्म का कोई भी गीत या संवाद दर्शकों के दिलों पर छाप नहीं छोड़ पाया, जिसके चलते यह तारीख एक बार फिर एक और बड़ी फ्लॉप फिल्म की गवाह बनी।
मैरीगोल्ड और सलमान खान का अंतरराष्ट्रीय प्रयोग (2007)
सलमान खान की लोकप्रियता को हमेशा से बॉक्स ऑफिस पर सफलता की पक्की गारंटी माना जाता रहा है, लेकिन 17 अगस्त 2007 को पर्दे पर आई उनकी फिल्म मैरीगोल्ड एन एडवेंचर इन इंडिया उनके करियर के सबसे बड़े असफल प्रोजेक्ट्स में से एक साबित हुई। निर्देशक विलार्ड कैरोल के निर्देशन में तैयार यह एक क्रॉस-कल्चरल रोमांटिक कॉमेडी थी जिसमें सलमान खान के साथ अमेरिकी अभिनेत्री अली लार्टर ने अभिनय किया था। हॉलीवुड और बॉलीवुड शैलियों का यह अनोखा मेल भारतीय दर्शकों के गले नहीं उतरा। फिल्म का कमजोर स्क्रीनप्ले, बेहद धीमी गति और कहानी के विभिन्न पहलुओं में तालमेल का भारी अभाव होने की वजह से दर्शकों ने इसे पूरी तरह से नकार दिया। भारी-भरकम बजट में बनी मैरीगोल्ड 17 अगस्त को सिनेमाघरों में उतरते ही बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिर गई।
बुड्ढा मर गया और मल्टी-स्टारर कॉमेडी की असफलता (2007)
वर्ष 2007 में 17 अगस्त का दिन बॉलीवुड के लिए दोहरी निराशा लेकर आया था। सलमान खान की मैरीगोल्ड के साथ-साथ निर्देशक राहुल रवैल की डार्क कॉमेडी बुड्ढा मर गया भी बिल्कुल उसी दिन थिएटर्स में रिलीज हुई थी। इस मल्टी-स्टारर फिल्म में परेश रावल, अनुपम खेर, ओम पुरी और राखी सावंत जैसे इंडस्ट्री के दिग्गज और जाने-माने कलाकार शामिल थे। इस फिल्म की पूरी कहानी एक अमीर उद्योगपति की अचानक रहस्यमयी मौत और उसकी संपत्ति की वसीयत को लेकर परिवार के भीतर होने वाले घमासान के इर्द-गिर्द घूमती थी। इतने बड़े कलाकारों की फौज होने के बावजूद, फिल्म का अटपटा हास्य और बोरिंग प्लॉट दर्शकों को बिल्कुल रास नहीं आया। सिनेमाघरों में दर्शकों की भारी कमी के चलते यह कॉमेडी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पिट गई।
क्यों पनौती साबित होती है 17 अगस्त की तारीख
बॉलीवुड में फिल्म निर्माता अक्सर स्वतंत्रता दिवस के लंबे वीकेंड का पूरा आर्थिक लाभ उठाने के लिए अपनी फिल्मों को 15 से 17 अगस्त के बीच रिलीज करना पसंद करते हैं। हालांकि, अगर 17 अगस्त के पूरे बॉक्स ऑफिस इतिहास पर गहरी नजर डाली जाए तो यह साफ हो जाता है कि यह तारीख कई बड़े मेकर्स के लिए बहुत खराब किस्मत लेकर आई है। चाहे वह आमिर खान का कोई सामाजिक सरोकार वाला ड्रामा हो, सलमान खान का कोई अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट हो या फिर परेश रावल और अनुपम खेर जैसे दिग्गजों की मल्टी-स्टारर कॉमेडी हो, इस विशेष तारीख पर किया गया हर प्रयोग बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फेल हुआ है। इसके पीछे की मुख्य वजहों में लचर प्रचार, पुराना पड़ चुका कंटेंट और एक बड़े फेस्टिवल वीकेंड का रणनीतिक रूप से सही इस्तेमाल न कर पाना शामिल है। यही मुख्य वजह है कि 17 अगस्त का यह दिन बॉलीवुड के इतिहास में फ्लॉप फिल्मों का एक बड़ा खजाना बनकर रह गया है।



















