बॉलीवुड के इतिहास में साल 1991 का नवंबर महीना बॉक्स ऑफिस पर एक ऐसे अप्रत्याशित टकराव का गवाह बना था, जिसने फिल्म इंडस्ट्री के कई स्थापित समीकरण पूरी तरह बदल दिए। उस दौर में सिनेमाघरों के भीतर दो फिल्मों का आमना-सामना महज एक दिन के फासले पर हुआ था। एक तरफ यशराज फिल्म्स के विशाल बैनर तले बनी भव्य फिल्म 'लम्हे' मैदान में थी, तो दूसरी तरफ पहली बार निर्देशन की कमान संभाल रहे कुक्कू कोहली की एक्शन और रोमांस से भरी फिल्म 'फूल और कांटे' खड़ी थी। किसी को यह अंदेशा नहीं था कि बिल्कुल नए चेहरों के साथ आई एक फिल्म उस दौर के दिग्गज सितारों की चमक को फीका कर देगी।
यश चोपड़ा की भव्य 'लम्हे' बनाम नए कलाकारों की 'फूल और कांटे'
यश चोपड़ा के निर्देशन में बनी 'लम्हे' को लेकर दर्शकों और समीक्षकों के बीच भारी उत्सुकता थी, क्योंकि उस समय यशराज बैनर की फिल्में कामयाबी की पुख्ता गारंटी मानी जाती थीं। इस बड़े बजट की फिल्म की शूटिंग लंदन, यूनाइटेड किंगडम के अन्य हिस्सों और राजस्थान की खूबसूरत लोकेशंस पर की गई थी। फिल्म में अनिल कपूर मुख्य भूमिका में थे और उन्होंने अपने किरदार के साथ कई साहसिक प्रयोग किए थे। उनके साथ श्रीदेवी दोहरी भूमिका में नजर आई थीं। इसके अतिरिक्त अनुपम खेर, वहीदा रहमान, इला अरुण और मनोहर सिंह जैसे दिग्गज कलाकारों ने भी इसमें अहम किरदार निभाए थे। दूसरी तरफ, 'फूल और कांटे' पूरी तरह नए कलाकारों के कंधों पर टिकी थी, जिसके जरिए अजय देवगन और मधू ने हिंदी सिनेमा में अपना पहला कदम रखा था।
स्क्रीनिंग की चेतावनी और बॉक्स ऑफिस का अप्रत्याशित परिणाम
'फूल और कांटे' की रिलीज से पहले आयोजित एक स्क्रीनिंग के दौरान अनिल कपूर खुद वहां पहुंचे थे। उन्होंने फिल्म की गुणवत्ता देखने के बाद अजय देवगन और निर्देशक कुक्कू कोहली को यह सलाह दी थी कि वे अपनी रिलीज की तारीख आगे या पीछे खिसका लें। उनका मानना था कि दोनों फिल्मों के एक साथ आने से नया प्रोजेक्ट नुकसान में आ सकता है। हालांकि, निर्माताओं ने अपनी योजना नहीं बदली और दोनों फिल्में लगभग एक साथ सिनेमाघरों में उतरीं। जब टिकट खिड़की खुली तो सारे अनुमान धरे के धरे रह गए। प्रयोगधर्मिता से भरी 'लम्हे' दर्शकों को खींचने में नाकाम रही और फ्लॉप साबित हुई। वहीं कॉलेज जीवन की पृष्ठभूमि पर बनी 'फूल और कांटे' को दर्शकों ने हाथों-हाथ लिया और वह बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर बन गई।
डेब्यू से शुरू हुआ सफर और तीन दशकों का दबदबा
'फूल और कांटे' की जबर्दस्त कामयाबी ने अजय देवगन को पहली ही दस्तक में सीधे मुख्यधारा का सितारा बना दिया और स्थापित सुपरस्टार्स के लिए एक गंभीर चुनौती पेश कर दी। इस फिल्म की मुख्य अभिनेत्री मधू भी रातों-रात चर्चा के केंद्र में आ गईं, यद्यपि बाद के वर्षों में मनचाहे किरदार न मिल पाने के कारण उन्होंने फिल्म जगत से दूरी बना ली। अजय देवगन का अपने पहले ही कदम से शुरू हुआ यह सफर समय के साथ और मजबूत होता गया। तीन दशकों से अधिक समय से उद्योग पर अपनी छाप छोड़ रहे इस अभिनेता की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'दृश्यम द कन्क्लूजन' भी महज 24 घंटे के भीतर सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही है।


















