सिनेमा जगत के दो सबसे बड़े दिग्गज, अमिताभ बच्चन और रजनीकांत, दशकों पुरानी एक अटूट मित्रता साझा करते हैं। हाल ही में फिल्म 'जेलर 2' के माहौल के बीच रजनीकांत का एक पुराना वाकया इंटरनेट पर फिर से चर्चा का विषय बन गया है। इस संस्मरण में उन्होंने विस्तार से बताया था कि जब अमिताभ बच्चन अपने जीवन के सबसे गहरे वित्तीय भंवर में फंस गए थे, तब उन्होंने किस असाधारण लगन के साथ उस दलदल से खुद को बाहर निकाला था।
सफलता के शिखर से भारी वित्तीय संकट का सफर
रजनीकांत के अनुसार, अमिताभ बच्चन जब अपनी शोहरत और कामयाबी के चरम मुकाम पर थे, तब उन्होंने अपने करियर की राह बदलते हुए एक व्यावसायिक उपक्रम की नींव रखी थी। उन्होंने अमिताभ बच्चन कॉर्पोरेशन लिमिटेड नाम की प्रोडक्शन कंपनी स्थापित की। हालांकि, यह महत्वाकांक्षी व्यापारिक कदम सफल नहीं हो सका और धीरे-धीरे कंपनी गंभीर नुकसान में चली गई। इस विफलता ने उन्हें दिवालियेपन के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया और उनके सिर पर तकरीबन 90 करोड़ रुपये की विशाल देनदारी आ गई।
उस दौर की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए रजनीकांत ने बताया कि आर्थिक दबाव इतना बढ़ गया था कि बिग बी को अपनी निजी संपत्तियों पर समझौता करना पड़ा। उन्हें जुहू स्थित अपना प्रतिष्ठित मकान और मुंबई की कई अन्य अचल संपत्तियां तक बेचनी पड़ी थीं। अपने सारे दायित्वों और कर्ज को उतारने के लिए उन्होंने दिन-रात एक कर दिया और कठोर परिश्रम की राह चुनी।
64 की उम्र में कड़ा परिश्रम और जुहू में तीन संपत्तियां
उद्योग जगत के कई लोग इस अचानक आए संकट को देखकर स्तब्ध थे और तरह-तरह की बातें बना रहे थे। ऐसी विषम परिस्थितियों में भी अमिताभ बच्चन विचलित नहीं हुए। रजनीकांत ने बताया कि उस समय अमिताभ बच्चन की आयु 64 वर्ष थी और उनका शरीर कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहा था, फिर भी वे लगातार तीन वर्षों तक रोजाना 18-18 घंटे काम करते रहे। इस अटूट निष्ठा का नतीजा यह निकला कि उन्होंने अपनी पूरी 90 करोड़ रुपये की देनदारी चुका दी।
‘यही तो अमिताभ बच्चन हैं!’
रजनीकांत ने इस अदम्य साहस को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने न केवल कर्ज मुक्त होकर अपना पुराना घर वापस हासिल किया, बल्कि उसी सड़क पर कुल तीन संपत्तियां खरीदकर अपनी गरिमा फिर स्थापित की।
चार दशकों की दोस्ती और साथ में की गई फिल्में
दोनों महानायकों के आपसी सहयोग की शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी। वर्ष 1983 में आई फिल्म 'अंधा कानून' से रजनीकांत ने हिंदी सिनेमा में अपना पहला कदम रखा था। अमिताभ बच्चन के साथ की गई यह फिल्म टिकट खिड़की पर बेहद सफल रही और 1983 की पांचवीं सर्वाधिक कमाई करने वाली भारतीय फीचर फिल्म बनी। इसके बाद 1985 की फिल्म 'गिरफ्तार' में दोनों ने फिर पर्दे पर मौजूदगी दर्ज कराई, जिसमें रजनीकांत ने एक विशेष भूमिका निभाई थी। नब्बे के दशक में यह जोड़ी बेहद लोकप्रिय फिल्म 'हम' में एक साथ दिखाई दी थी।
लंबे अंतराल के बाद, निर्देशक टीजे ज्ञानवेल की फिल्म 'वेट्टैयन' के जरिए दोनों कलाकार 33 साल बाद एक बार फिर बड़े पर्दे पर साथ आए। इस परियोजना की घोषणा के दौरान रजनीकांत ने सोशल मीडिया पर अमिताभ बच्चन के साथ एक तस्वीर साझा करते हुए उन्हें अपना गुरु बताया था और उनके साथ दोबारा काम करने पर गहरी प्रसन्नता व्यक्त की थी।
मौजूदा दौर के प्रोजेक्ट्स
अमिताभ बच्चन की कार्यशैली आज भी नए कलाकारों के लिए एक मिसाल बनी हुई है। वे हालिया समय में प्रभास, दीपिका पादुकोण और कमल हासन के साथ बड़े बजट की फिल्म 'कल्कि 2898 एडी' में नजर आए थे। इसके अतिरिक्त, वे भारतीय टेलीविजन के लोकप्रिय क्विज शो 'कौन बनेगा करोड़पति' के मेजबान के रूप में दर्शकों से लगातार जुड़े हुए हैं।
















