बाल्टिक सागर में रूस और जर्मनी के बीच बिछी नॉर्ड स्ट्रीम प्राकृतिक गैस पाइपलाइनों को विस्फोट से उड़ाने के बहुचर्चित मामले में जर्मनी की एक अदालत में ऐतिहासिक सुनवाई शुरू हुई है। हैम्बर्ग की अदालत में पेश किए गए यूक्रेनी नागरिक सेरही के, जिन्हें अदालत के दस्तावेजों में सेरही कुजनेत्सोव के नाम से दर्ज किया गया है, पर आरोप है कि उन्होंने अन्य यूक्रेनी सैन्य कर्मियों के साथ मिलकर इन पाइपलाइनों को नष्ट करने की साजिश रची थी। जर्मन अभियोजकों का दावा है कि इस तोड़फोड़ का प्राथमिक मकसद रूस को गैस राजस्व से होने वाली कमाई को रोकना था, जिसका इस्तेमाल वह युद्ध के वित्तपोषण के लिए कर रहा था। इस पूरे मामले को जर्मनी के लिए बेहद संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि फरवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर किए गए पूर्ण सैन्य आक्रमण के बाद से बर्लिन को कीव के सबसे प्रमुख सहयोगियों में गिना जाता रहा है। यह हमला युद्ध शुरू होने के लगभग सात महीने बाद अंजाम दिया गया था, और सेरही कुजनेत्सोव इस विस्फोट कांड में औपचारिक मुकदमे का सामना करने वाले पहले संदिग्ध बन गए हैं। उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से स्पष्ट इनकार किया है, जबकि क्रोएशिया में पकड़ा गया एक अन्य संदिग्ध भी अपने प्रत्यर्पण के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहा है।
बाल्टिक सागर में विस्फोट और शुरुआती कूटनीतिक तनाव
यह घटनाक्रम 26 सितंबर 2022 का है, जब बोर्नहोम द्वीप के निकट बाल्टिक सागर की गहराइयों में स्थित चार में से तीन गैस पाइपलाइनों को शक्तिशाली पानी के नीचे किए गए विस्फोटों से नष्ट कर दिया गया था। इन हमलों के तुरंत बाद के महीनों में पश्चिमी देशों का प्रारंभिक संदेह सीधे तौर पर मास्को की ओर उठा, हालांकि किसी भी देश ने आधिकारिक तौर पर रूस पर सीधा आरोप लगाने से परहेज किया। इस संदेह के पीछे ठोस भू-राजनीतिक संदर्भ भी मौजूद था। रूस ने इस हमले से कुछ ही हफ्ते पहले नॉर्ड स्ट्रीम 1 के जरिए जर्मनी को दी जाने वाली गैस आपूर्ति पूरी तरह रोक दी थी, जबकि नॉर्ड स्ट्रीम 2 को कभी चालू ही नहीं किया गया था। बर्लिन ने रूसी आक्रमण से ठीक पहले कई अरब डॉलर की लागत वाली इस विशाल बुनियादी ढांचा परियोजना को औपचारिक रूप से ठंडे बस्ते में डाल दिया था। इसके अलावा, विस्फोटों से ठीक पहले इलाके में रूसी नौसैनिक जहाजों की संदिग्ध गतिविधियों की जानकारियां भी सामने आई थीं। दूसरी ओर, स्वीडन, डेनमार्क और जर्मनी की संयुक्त व स्वतंत्र जांच एजेंसियों द्वारा साजिशकर्ताओं की पहचान करने की कोशिशों के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक अलग ही रुख अपनाया। पुतिन ने सार्वजनिक रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके सहयोगी यूनाइटेड किंगडम पर उंगली उठाई और इसके लिए एंग्लो-सैक्सन ताकतों को जिम्मेदार ठहराया, जिसके जवाब में दोनों देशों ने इन दावों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया।
रोस्टॉक से शुरू हुई जांच और नौका से मिले सबूत
समय बीतने के साथ जांच का स्वरूप नाटकीय रूप से बदल गया। जब डेनमार्क और स्वीडन के जांच अधिकारियों ने औपचारिक रूप से अपनी अलग-अलग जांच प्रक्रियाओं को बंद कर दिया, तब जर्मन अभियोजकों ने एक विशिष्ट सुराग पर ध्यान केंद्रित करना शुरू किया। जांचकर्ताओं की नजर गहरे पानी के गोताखोरों के एक दल पर टिकी, जिन्होंने उत्तरी जर्मन बंदरगाह शहर रोस्टॉक से एंड्रोमेडा नाम की एक निजी नौका किराए पर ली थी। जर्मन अभियोजन पक्ष ने बाद में खुलासा किया कि एंड्रोमेडा नौका से एकत्र किए गए भौतिक नमूनों की फॉरेंसिक जांच में पानी के भीतर इस्तेमाल होने वाले विस्फोटकों के अवशेष पाए गए थे। इस साक्ष्य ने पूरी जांच की दिशा को पश्चिमी और रूसी दावों से हटाकर यूक्रेनी सैन्य कर्मियों से जुड़े एक स्वतंत्र अभियान की तरफ मोड़ दिया।
जर्मनी का अभियोग और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध का दावा
जर्मन अभियोजकों द्वारा तैयार किए गए औपचारिक आरोपपत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि तोड़फोड़ करने वाले समूह ने इस योजना को यूक्रेनी सरकारी एजेंसियों के आदेश पर काम करते हुए अंजाम दिया था। अभियोजन का यह तर्क है कि यह मामला जर्मनी के अंतरराष्ट्रीय अपराध कानून संहिता के तहत आता है और इसे नागरिक संपत्तियों पर सैन्य साधनों से किए गए हमले के रूप में एक युद्ध अपराध माना जाना चाहिए। हालांकि, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने लगातार इस बात को दोहराया है कि नॉर्ड स्ट्रीम विस्फोटों से यूक्रेन का कोई लेना-देना नहीं था। इस अदालती कार्रवाई ने बर्लिन और कीव के बीच कानूनी और राजनीतिक दृष्टिकोण के गहरे अंतर को सतह पर ला दिया है। यूक्रेन की संसद की विदेश मामलों की समिति के प्रमुख ऑलेक्ज़ेंडर मेरेझको ने स्पष्ट किया कि ये विस्फोट रूस के साथ युद्ध के दौरान हुए थे और नॉर्ड स्ट्रीम 2 रूस के लिए युद्ध की तैयारी करने का एक साधन मात्र था। मेरेझको ने यह भी रेखांकित किया कि यूक्रेन के पास जर्मन पक्ष के दावों की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं है और वे इसे महज एक संभावित संस्करण मानते हैं।
मामले का गैर-राजनीतिकरण और कूटनीतिक संतुलन की कोशिश
इस पूरे मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बर्लिन में मौजूद जर्मन चांसलरों ने इसे राजनीतिक विवाद बनने से बचाने की पूरी कोशिश की है। जर्मन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के विश्लेषक स्टीफन मिस्टर ने बताया कि सरकार की ओर से लगातार यह प्रयास किया गया कि इस मुद्दे को जरूरत से ज्यादा तवज्जो न दी जाए और इसे मीडिया की सनसनी बनने से रोका जाए। जर्मन नेतृत्व ने इस पूरे मामले को देश की स्वतंत्र न्यायिक संस्थाओं और अदालतों के हवाले कर दिया ताकि यह संदेश दिया जा सके कि यह कोई राजनीतिक बदला नहीं बल्कि विशुद्ध आपराधिक जांच है। इस कूटनीतिक असहजता के बावजूद यूक्रेनी सांसद ऑलेक्ज़ेंडर मेरेझको को यह विश्वास है कि इस मुकदमे से दोनों देशों के संबंधों में कोई दरार नहीं आएगी, क्योंकि यूक्रेन को लगातार सैन्य और आर्थिक सहयोग प्रदान करना जर्मनी के अपने सर्वोच्च राष्ट्रीय हितों में शामिल है।
इटली, पोलैंड और क्रोएशिया में कानूनी खींचतान
सेरही कुजनेत्सोव को अदालत तक पहुंचाने की राह कई देशों में लंबी कानूनी लड़ाइयों से होकर गुजरी है। अगस्त 2025 में, जर्मनी के संघीय अभियोजकों द्वारा जारी यूरोपीय गिरफ्तारी वारंट के आधार पर इतालवी पुलिस ने सेरही के को एड्रियाटिक तट पर स्थित लोकप्रिय पर्यटन स्थल रिमिनी के पास एक होटल में चेक-इन करते समय हिरासत में ले लिया था। इतालवी अदालतों में अपने प्रत्यर्पण को रोकने के लिए कई हफ्तों तक चले कड़े कानूनी संघर्ष के बाद अंततः पिछले साल के अंत में उन्हें औपचारिक रूप से जर्मनी प्रत्यर्पित कर दिया गया। इसी बीच, वोलोडिमिर ज़ुरावलोव नाम के एक अन्य यूक्रेनी नागरिक के मामले में भी कानूनी जटिलताएं देखने को मिलीं। जब जर्मनी ने पोलैंड से वोलोडिमिर ज़ुरावलोव के प्रत्यर्पण की मांग की, तो वारसॉ की एक अदालत ने इटली की सर्वोच्च अदालत से बिल्कुल विपरीत फैसला सुनाया। पोलिश न्यायाधीश ने अक्टूबर 2025 में ज़ुरावलोव की रिहाई का आदेश देते हुए ऐतिहासिक टिप्पणी की कि पाइपलाइनों पर किया गया हमला गैरकानूनी नहीं था, और यदि यूक्रेन ने इस तरह के किसी सशस्त्र अभियान का आयोजन किया भी था, तो वह न्यायसंगत, तर्कसंगत और उचित था। पोलैंड में रिहाई मिलने के बावजूद ज़ुरावलोव को पिछले साल अगस्त में क्रोएशिया में फिर से गिरफ्तार कर लिया गया, जहां उन पर इस तोड़फोड़ के लिए आवश्यक गहरे समुद्र में गोताखोरी में भाग लेने का संदेह है। पिछले महीने क्रोएशियाई प्रशासन ने ज़ुरावलोव के जर्मनी प्रत्यर्पण को औपचारिक मंजूरी दे दी है, हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उन्हें वास्तव में जर्मनी कब स्थानांतरित किया जाएगा और क्या उनके मामले को भी हैम्बर्ग में चल रहे मुकदमे का हिस्सा बनाया जाएगा।



















