फिल्म इंडस्ट्री में बड़े स्टार्स और जाने-माने डायरेक्टर्स के बीच बजट, सहूलियतों और शर्तों को लेकर होने वाली खींचतान नई बात नहीं है। हाल के दिनों में अभिनेत्री दीपिका पादुकोण और 'एनिमल' के डायरेक्टर संदीप रेड्डी वांगा के बीच आगामी फिल्म 'स्पिरिट' को लेकर हुई अनबन सुर्खियों में रही है। इस फिल्म में प्रभास मुख्य भूमिका में हैं, लेकिन 8 घंटे की काम की शिफ्ट, भारी-भरकम फीस और मुनाफे में हिस्सेदारी जैसी मांगों पर बात न बनने के बाद दीपिका ने यह प्रोजेक्ट छोड़ दिया। इस पूरे मामले को लेकर प्रोड्यूसर प्रणय रेड्डी वांगा ने सार्वजनिक रूप से कई दावे किए। हालांकि, भारतीय सिनेमा के इतिहास में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले देश की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में शामिल 'बाहुबली' के निर्माण के दौरान भी डायरेक्टर एसएस राजामौली और दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी के बीच इसी तरह का एक बड़ा विवाद सामने आया था।
राजामौली का दांव और श्रीदेवी से की गई बातचीत
एसएस राजामौली जब अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म 'बाहुबली' की स्टारकास्ट तय कर रहे थे, तब उनके दिमाग में राजमाता शिवगामी के दमदार किरदार के लिए श्रीदेवी पहली पसंद थीं। मेकर्स चाहते थे कि भारतीय सिनेमा की यह दिग्गज अभिनेत्री इस प्रतिष्ठित भूमिका को निभाए। हालांकि, जब दोनों पक्षों के बीच बातचीत शुरू हुई, तो मामला सुलझने के बजाय उलझ गया। राजामौली ने बाद में एक इंटरव्यू के दौरान खुलासा किया कि श्रीदेवी की ओर से रखी गई शर्तें फिल्म के बजट और व्यवस्थाओं के लिहाज से बहुत अधिक थीं, जिसकी वजह से उनके साथ समझौता नहीं हो पाया।
फीस और लग्जरी सहूलियतों की मांग पर राजामौली की नाराजगी
एक मीडिया इंटरव्यू में एसएस राजामौली ने अपनी नाखुशी जाहिर करते हुए उन मांगों का ब्योरा दिया था, जो श्रीदेवी की तरफ से आई थीं। राजामौली के अनुसार, अभिनेत्री ने इस रोल के लिए 8 से 10 करोड़ रुपये की फीस मांगी थी। इसके अलावा, शूटिंग के दौरान किसी लग्जरी होटल का पूरा फ्लोर बुक करने और 10 बिजनेस क्लास फ्लाइट टिकट्स की शर्त भी रखी गई थी। डायरेक्टर ने कहा कि किसी एक किरदार के लिए इतना बड़ा खर्च करना न तो व्यावहारिक था और न ही फिल्म के हित में था। राजामौली ने बताया कि मेकर्स ने इन अतिरिक्त खर्चों को उनकी मुख्य फीस में से काटने का प्रस्ताव भी दिया था, लेकिन अभिनेत्री इस बात पर सहमत नहीं हुईं। उन्होंने तंज कसते हुए यह तक कह दिया था कि यह उनका सौभाग्य था कि श्रीदेवी ने यह ऑफर स्वीकार नहीं किया, वरना हर बार 5 बिजनेस क्लास टिकट्स और लग्जरी होटल के सूइट्स बुक करने पड़ते। राजामौली का यह भी मानना था कि श्रीदेवी का स्वभाव काफी शांत और संयमित नजर आता है, इसलिए शायद वह इस उग्र किरदार को उस तरह से नहीं निभा पातीं।
श्रीदेवी का पलटवार और सार्वजनिक बयान पर दुख
जब राजामौली के ये आरोप सार्वजनिक हुए, तो श्रीदेवी ने एक चैनल को दिए इंटरव्यू में इन सभी दावों का सख्ती से खंडन किया। उन्होंने राजामौली के इस तरह मीडिया में आकर बात करने पर गहरी हैरानी और दुख व्यक्त किया। श्रीदेवी ने कहा कि वह राजामौली को एक बेहद शांत, गरिमापूर्ण और सम्मानित इंसान मानती थीं और उनके साथ काम करने को लेकर खुश थीं, लेकिन डायरेक्टर का यह रवैया उनके लिए काफी निराशाजनक था। श्रीदेवी ने यह अंदेशा जताया कि शायद फिल्म के प्रोड्यूसर ने राजामौली को गलत जानकारी दी थी या उनके दिमाग में ये बातें डाली थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर वह सच में अपने करियर में ऐसी अव्यावहारिक मांगें रखतीं, तो इंडस्ट्री के लोग उन्हें बहुत पहले ही काम से बाहर कर चुके होते। श्रीदेवी का मानना था कि कास्टिंग या फीस से जुड़े अंदरूनी मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से बयानबाजी करना पूरी तरह से अनुचित था।
राम्या कृष्णन की एंट्री और बाहुबली की ऐतिहासिक सफलता
श्रीदेवी के साथ बात न बनने के बाद मेकर्स ने राजमाता शिवगामी के किरदार के लिए राम्या कृष्णन को चुना। राम्या कृष्णन ने इस भूमिका में अपनी दमदार अदाकारी से जान फूंक दी और उनका यह अभिनय भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित किरदारों में शुमार हो गया। 'बाहुबली' ने रिलीज होने के बाद बॉक्स ऑफिस पर सफलता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए और हजारों करोड़ रुपये का बिजनेस करके एक नया इतिहास रचा। हालांकि, राजामौली और श्रीदेवी के बीच हुई यह अनबन आज भी सिनेमा प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बनी रहती है।
दीपिका पादुकोण और संदीप रेड्डी वांगा के ताजा विवाद से जुड़ाव
श्रीदेवी और राजामौली का यह पुराना किस्सा एक बार फिर तब याद किया जाने लगा, जब दीपिका पादुकोण और संदीप रेड्डी वांगा के बीच 'स्पिरिट' फिल्म को लेकर विवाद गरमाया। प्रोड्यूसर प्रणय रेड्डी वांगा के बयानों के मुताबिक, 8 घंटे की शिफ्ट और फीस संबंधी मांगों के चलते बात नहीं बन सकी और दीपिका इस फिल्म से अलग हो गईं। यह घटना दर्शाती है कि समय बदलने के बावजूद, भारतीय फिल्म उद्योग में बड़े निर्देशकों और शीर्ष कलाकारों के बीच शर्तों, बजट और कामकाजी व्यवस्थाओं को लेकर टकराव का दौर लगातार जारी है।



















