रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मध्य प्रदेश के जबलपुर में सैन्य टैंकों के नवीनीकरण से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परियोजना का शिलान्यास किया। 472 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाली इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना के बख्तरबंद बेड़े को मजबूती प्रदान करना है। शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय सेना विश्व की सबसे ताकतवर सेनाओं में शामिल है, जिससे इसकी रक्षा आवश्यकताएं भी व्यापक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्य युद्धक टैंक, विशेषकर T-72 और T-90 के विभिन्न संस्करण, मैदानी युद्ध में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और सीमा पर सुरक्षा की लोहे की दीवार की तरह तैनात रहते हैं।
बदलती तकनीक के बीच युद्धक टैंकों की प्रासंगिकता
जबलपुर में जनसमूह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि आधुनिक युद्ध शैली में आ रहे बदलावों के बावजूद टैंकों की उपयोगिता कम नहीं हुई है। प्रौद्योगिकी के विकास के साथ युद्ध के तौर-तरीके जरूर बदल रहे हैं, लेकिन मैदानी इलाकों में लड़ाई के दौरान टैंकों का महत्व बना हुआ है। इसी सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए देश की रक्षा नीति को नई दिशा दी जा रही है।
रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि सैन्य तैयारियों में किसी एक हथियार को दूसरे का विकल्प नहीं माना जा सकता। भारतीय सेना को सिर्फ टैंक या सिर्फ ड्रोन के बीच चुनाव करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि दोनों प्रणालियों का एक साथ होना जरूरी है। सेना को आधुनिक टैंकों के साथ-साथ ड्रोन, तोपखाना, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, मिसाइलें और निर्देशित ऊर्जा हथियार भी चाहिए। बख्तरबंद बेड़े और ड्रोन तकनीक के बीच बेहतर तालमेल बिठाना वर्तमान समय की प्रमुख आवश्यकता है, और जबलपुर की यह नई ओवरहाल सुविधा इसी एकीकृत रणनीति को आगे बढ़ाएगी।
जबलपुर और अवाड़ी से हर साल 230 टैंकों का होगा नवीनीकरण
जबलपुर में स्थापित की जा रही इस नई इकाई से प्रतिवर्ष 80 टैंकों के ओवरहाल की अतिरिक्त क्षमता जुड़ जाएगी। यह क्षमता चेन्नई के पास स्थित भारी वाहन कारखाना अवाड़ी की मौजूदा 150 टैंकों की वार्षिक नवीनीकरण क्षमता के साथ जोड़ी जाएगी। जब जबलपुर की परियोजना पूरी तरह से काम करने लगेगी, तो अवाड़ी की 150 और जबलपुर की 80 टैंकों की क्षमता मिलकर हर साल कुल 230 T-72 और T-90 टैंकों का नवीनीकरण कर सकेगी। इससे सेना को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार समय पर अपग्रैडेड टैंक उपलब्ध हो सकेंगे।
उल्लेखनीय है कि भारी वाहन कारखाना अवाड़ी पिछले 40 वर्षों से भारतीय सेना को बख्तरबंद वाहन मुहैया कराता रहा है। इन चार दशकों में अवाड़ी कारखाने ने सेना को लगभग 4,400 टैंकों की आपूर्ति की है। रक्षा मंत्री ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि ये टैंक सीमा पर दुश्मनों के खिलाफ मजबूत ढाल बनकर खड़े हैं और जवानों के मनोबल को ऊँचा रखते हैं। 472 करोड़ रुपये की इस परियोजना से स्थानीय तकनीकी प्रतिभाओं को रोजगार और कौशल विकास के नए अवसर मिलेंगे।
रक्षा उत्पादन और निर्यात में एक दशक की बड़ी छलांग
भारत के रक्षा क्षेत्र की प्रगति का उल्लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों की तुलना प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन मात्र 46,000 करोड़ रुपये का था। बीते दशक में आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत की गई मेहनत के बल पर अब घरेलू रक्षा उत्पादन बढ़कर 1 लाख 77 हजार करोड़ रुपये से अधिक के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया है।
इसी तरह रक्षा निर्यात के क्षेत्र में भी ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2014 के आसपास भारत से रक्षा सामानों का निर्यात 1,000 करोड़ रुपये से भी कम होता था। आज यह आंकड़ा बढ़कर रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। रक्षा मंत्री ने कहा कि आज वैश्विक समुदाय भारत को एक प्रमुख निर्माण शक्ति, विश्वसनीय प्रौद्योगिकी साझेदार और भरोसेमंद रक्षा आपूर्तिकर्ता के रूप में देख रहा है।
मध्य प्रदेश को रक्षा विनिर्माण केंद्र बनाने का विजन
जबलपुर की यह ओवरहाल परियोजना केवल सैन्य आवश्यकताओं की पूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। इस परियोजना से जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों के किसानों, मजदूरों, युवाओं और छोटे उद्यमियों के लिए समृद्धि तथा रोजगार के नए अवसर खुलने की उम्मीद है। स्थानीय कार्यबल को आधुनिक तकनीक और सही पारिस्थितिकी तंत्र उपलब्ध कराकर राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनाया जाएगा।
मध्य प्रदेश को रक्षा विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश की योजना पर काम चल रहा है। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में रक्षा विनिर्माण की संभावनाओं को देखते हुए 3,073 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की गई है, जहाँ 16,960 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। यह कदम मध्य प्रदेश को देश का प्रमुख रक्षा और एयरोस्पेस विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में मजबूत आधारशिला रख रहा है।



















