शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के आगामी शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और रूस के बीच उच्चस्तरीय कूटनीतिक संवाद आयोजित होने जा रहा है। विदेश मंत्रालय (MEA) की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच एक अहम द्विपक्षीय बैठक संपन्न होगी। वैश्विक स्तर पर जारी रणनीतिक बदलावों और जियो-पॉलिटिकल परिस्थितियों के बीच दोनों शीर्ष नेताओं की यह मुलाकात वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
द्विपक्षीय संबंधों और रणनीतिक प्राथमिकताओं पर मंथन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की इस बैठक में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नया आयाम देने पर विस्तृत चर्चा होगी। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस संवाद के दौरान विशेष रूप से व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार, ऊर्जा क्षेत्र में आपसी सहयोग तथा वैश्विक सुरक्षा तंत्र से जुड़े प्रमुख विषयों पर गंभीर मंथन किया जाएगा। वर्तमान में चल रही वैश्विक उथल-पुथल के दौर में दोनों राष्ट्रों के बीच यह उच्चस्तरीय बातचीत आपसी आर्थिक हितों की रक्षा करने और द्विपक्षीय संबंधों को अधिक मजबूती प्रदान करने में सहायक साबित होगी।
सीमा पार आतंकवाद पर भारत की जीरो टॉलरेंस नीति
इस शिखर सम्मेलन में भारत के एजेंडे को स्पष्ट करते हुए विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सीबी जॉर्ज ने भारत के दृढ़ संकल्प को सामने रखा है। उन्होंने कहा कि भारत इस मंच का उपयोग आतंकवाद और सीमा पार आतंकवाद के विरुद्ध अपनी जीरो टॉलरेंस की नीति को पूरी मजबूती से व्यक्त करने के लिए करेगा। भारत का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि आतंकवाद किसी एक देश की समस्या न होकर संपूर्ण मानवता के लिए एक बड़ी साझा चुनौती है। इसलिए, इस वैश्विक संकट से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को पूरी तरह एकजुट होकर आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ एक कठोर और सुस्पष्ट संदेश देने की आवश्यकता है।





















