वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अनिश्चितताओं के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए कच्चे तेल की आपूर्ति में तेजी से सुधार देखने को मिल रहा है। आपूर्ति व्यवस्था के पटरी पर लौटने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर बना जोखिम प्रीमियम कम होने लगा है। बीएनवाई के बाजार विश्लेषक जेफ यू के अनुसार, इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से कच्चे तेल का प्रवाह बढ़ने से ब्रेंट क्रूड की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। कुवैत और कतर जैसे प्रमुख उत्पादक देशों ने अपने निर्यात को युद्ध-पूर्व स्तर के लगभग 70 प्रतिशत तक बहाल कर दिया है। इसके चलते हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कुल तेल प्रवाह में बड़ा इजाफा हुआ है, जिसने वैश्विक आपूर्ति संकट की आशंकाओं को काफी हद तक शांत किया है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति की स्थिति और तेल की कीमतें
व्यापारिक आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाला कच्चा तेल अब दैनिक आधार पर 70 लाख से 80 लाख बैरल के स्तर पर पहुंच गया है। जुलाई के मध्य में यह आपूर्ति घटकर लगभग 40 लाख बैरल प्रति दिन के निचले स्तर पर आ गई थी। इस महत्वपूर्ण सुधार के कारण ब्रेंट क्रूड का भाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। यह कीमत अप्रैल के उत्तरार्ध में दर्ज किए गए 120 डॉलर प्रति बैरल से अधिक के उच्चतम स्तर की तुलना में काफी कम है। मध्य पूर्व से वैश्विक बाजारों तक कच्चे तेल की निर्बाध आवाजाही शुरू होने से ऊर्जा कीमतों में आ रही इस नरमी को व्यापक समर्थन मिल रहा है।
वाशिंगटन-तेहरान तनाव और जोखिम प्रीमियम में कमी
हालांकि वाशिंगटन और तेहरान के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य के नियंत्रण को लेकर कूटनीतिक और सैन्य गतिरोध बरकरार है, फिर भी खाड़ी देशों से अधिक मात्रा में कच्चे तेल के बाजार में पहुंचने के कारण सप्लाई डिस्रप्शन प्रीमियम कम हो रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच राजनीतिक खींचतान के बावजूद भौतिक रूप से तेल की खेप लगातार गंतव्य तक पहुंच रही है। खाड़ी के जहाजरानी मार्गों पर पैदा हुआ तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, लेकिन आपूर्ति के व्यावहारिक आंकड़ों ने निवेशकों और आयातक देशों को बड़ी राहत दी है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की किल्लत की तात्कालिक चिंताएं दूर हुई हैं।
विदेशी मुद्रा बाजार: जीबीपी और यूरो की स्थिति
कच्चे तेल के बाजार में जारी हलचल का असर विदेशी मुद्रा बाजार पर भी देखा जा रहा है। यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान GBP/USD की जोड़ी अपनी साप्ताहिक सीमा के निचले स्तर के करीब 1.3600 के अंक से नीचे कारोबार करती नजर आई। हालांकि, अमेरिकी केंद्रीय बैंक के भावी कदमों को लेकर अनिश्चितता के कारण इस जोड़ी में और बड़ी गिरावट नहीं देखी गई। निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉर्श के आगामी संबोधन का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी ओर EUR/USD का स्तर 1.1650 के आसपास बना हुआ है। यूरोपीय केंद्रीय बैंक यानी ईसीबी की ओर से सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों से यूरो को सहारा मिल रहा है, जिससे अमेरिकी डॉलर की मजबूती का प्रभाव संतुलित बना हुआ है। बाजार प्रतिभागी मध्य पूर्व के घटनाक्रमों और अमेरिका के नए जॉबलेस क्लेम्स डेटा पर भी नजर बनाए हुए हैं।
सोने के भाव पर दबाव और जैक्सन होल सम्मेलन का असर
कीमती धातुओं के बाजार में सोने की कीमतें यूरोपीय सत्र के दौरान 4,600 डॉलर प्रति औंस के आसपास सुस्त बनी रहीं। यह स्तर पिछले दिन दर्ज किए गए साप्ताहिक निचले स्तर के करीब है। सोने के भाव में ज्यादा बड़ी गिरावट की संभावना इसलिए रुकी हुई है क्योंकि व्यापारी और निवेशक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के भाषण से पहले कोई बड़ा जोखिम लेने से बच रहे हैं। शुक्रवार को आयोजित होने वाले जैक्सन होल संगोष्ठी में केविन वॉर्श का वक्तव्य अमेरिकी डॉलर की विनिमय दरों और बिना ब्याज देने वाली कीमती धातुओं की भविष्य की दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
केविन वॉर्श का पहला भाषण और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति
फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष के रूप में केविन वॉर्श का जैक्सन होल संगोष्ठी में यह पहला औपचारिक संबोधन होगा। वित्तीय जगत की नजरें केवल इस बात पर नहीं टिकी हैं कि सितंबर की नीतिगत बैठक में ब्याज दरों में वृद्धि होगी या उन्हें यथावत रखा जाएगा, बल्कि बाजार प्रतिभागी केंद्रीय बैंक के दीर्घकालिक आर्थिक दृष्टिकोण को भी समझने का प्रयास कर रहे हैं। अमेरिका में हाल ही में जारी हुए पीसीई मुद्रास्फीति आंकड़ों के बाद डॉलर सूचकांक में स्थिरता देखी गई है। ऐसे समय में फेड अध्यक्ष का यह संबोधन वैश्विक बाजारों की भावी दिशा तय करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।



















