भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर ने ऐसे कई गाने दिए हैं जो पीढ़ियों से लोगों के दिलों में बसे हुए हैं, लेकिन फिल्म 'सूरज' के गाने 'बहारों फूल बरसाओ' जैसी लोकप्रियता बहुत कम गानों को मिली है। मोहम्मद रफी की जादुई आवाज से सजे इस रोमांटिक गाने को एक बार BBC के रेडियो पोल में सबसे पसंदीदा बॉलीवुड गीत चुना गया था। इस लाजवाब गीत के लिए मोहम्मद रफी को साल 1966 में सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था। अभिनेता राजेंद्र कुमार और अभिनेत्री वैजयंतीमाला पर फिल्माया गया यह गीत आज भी प्यार के इजहार का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। इस कालजयी रचना को तैयार करने में गीतकार हसरत जयपुरी और संगीतकार जोड़ी शंकर-जयकिशन को जिस दौर से गुजरना पड़ा, उसकी कहानी भी इस गाने की तरह ही बेहद खूबसूरत है।
राजकुमार के इंतजार की कहानी
इस सदाबहार गीत के बनने की शुरुआत तब हुई जब फिल्म 'सूरज' के निर्देशक टी प्रकाश राव ने अपनी संगीत टीम के साथ एक विशेष बैठक की। उन्होंने संगीतकार जोड़ी शंकर-जयकिशन को फिल्म की परिस्थिति और दृश्य के बारे में विस्तार से समझाया। निर्देशक चाहते थे कि गाना एक ऐसे राजकुमार की भावनाओं को व्यक्त करे जो घने जंगल में अपनी राजकुमारी का इंतजार कर रहा है। वह राजकुमार वहां बहने वाली हवाओं, सुंदर नजारों और जंगल के फूल-पत्तियों से बात करते हुए उन्हें बता रहा है कि उसकी महबूबा आने वाली है। निर्देशक ने हसरत जयपुरी से इसी विषय पर एक भावुक और असरदार गीत लिखने का अनुरोध किया।
परियों को पसीना ला देने वाली चुनौती
पूरी स्थिति समझने के बाद भी हसरत जयपुरी के दिमाग में गाने की शुरुआती लाइनें नहीं आ पा रही थीं। वे काफी समय तक सोचते रहे और फिर उलझन में अपने होटल के कमरे में लौट आए। वे इस कशमकश में थे कि आखिर राजकुमार के फूल-पत्तियों से बात करने वाले इस अनोखे दृश्य को शब्दों में कैसे पिरोया जाए। इसी दौरान संगीतकार शंकर-जयकिशन ने हसरत जयपुरी के सामने एक बड़ी चुनौती रख दी। उन्होंने मजाकिया लेकिन गंभीर लहजे में कहा कि उन्हें एक ऐसा गीत लिखना होगा जिसे सुनकर आसमान की परियों को भी पसीना आ जाए। इस बात ने गीतकार के ऊपर बेहतरीन लिखने का दबाव और अधिक बढ़ा दिया।
मद्रास की पार्टी और एक खूबसूरत सलाम
हसरत जयपुरी लगातार इस गाने के मुखड़े को लेकर उधेड़बुन में थे और कोई भी पंक्ति उनके दिमाग में क्लिक नहीं कर रही थी। इसी बीच, फिल्म के निर्देशक और निर्माता ने मद्रास के एक होटल में एक शानदार पार्टी का आयोजन किया, जिसमें हसरत जयपुरी भी शामिल हुए। पार्टी में तमाम मेहमान मौजूद थे। उसी समय हसरत जयपुरी के पास से एक बेहद खूबसूरत लड़की गुजरी और उसने मुस्कुराते हुए उन्हें सलाम किया। हसरत साहब ने भी तुरंत उस सलाम का जवाब दिया, लेकिन उसी जादुई पल में उनके दिमाग में इस कालजयी गाने की पहली लाइन यानी मुखड़ा 'बहारों फूल बरसाओ' कौंध गया। इस तरह एक छोटे से वाकये ने भारतीय संगीत इतिहास के सबसे बड़े रोमांटिक गाने को जन्म दे दिया।



















