भारतीय सिनेमा का नब्बे का दशक संगीत प्रेमियों के लिए एक बेहद स्वर्णिम काल माना जाता है। इस समयावधि में कई ऐसे बेहतरीन गीतों की रचना हुई जिनकी धुनें और शब्द आज भी श्रोताओं के दिलों में ताज़ा हैं। चाहे प्रेम की गहराई हो या फिर अलगाव का दर्द, उस समय के संगीत में भावनाओं का एक अनूठा संसार बसता था। इसी अनमोल दौर की सूची में दुनिया भुला दूंगा गीत का नाम भी शामिल है जिसे अपनी जादुई गायकी से अमर कर दिया था। निर्देशक महेश भट्ट ने अपनी फिल्म आशिकी के जरिए एक ऐसी संगीत परंपरा की नींव रखी जिसकी चमक आज भी धुंधली नहीं पड़ी है।
फिल्म और कलाकारों की जबरदस्त सफलता
महेश भट्ट ने अपनी इस रोमांटिक म्यूजिकल फिल्म के माध्यम से दो नए चेहरों को सिनेमा की दुनिया में उतारा था। इस सिनेमाई सफर में राहुल रॉय और अनु अग्रवाल को मुख्य भूमिकाएं सौंपी गई थीं। सिनेमाघरों में यह फिल्म ऐतिहासिक रूप से ब्लॉकबस्टर साबित हुई और इसकी अभूतपूर्व सफलता ने दोनों नए कलाकारों को एक ही रात में शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचा दिया। जहाँ अभिनय के स्तर पर इन कलाकारों की किस्मत चमक उठी, वहीं इसके संगीत ने बाजार में तहलका मचा दिया और हर तरफ इसी की चर्चा होने लगी।
गली-मोहल्लों में गूंजता संगीत और लव एंथम
फिल्म के ऑडियो कैसेट इतनी भारी मात्रा में बिके कि देश के हर कोने और हर गली-मोहल्ले में इसी एल्बम के गीत गूंजते हुए सुनाई देते थे। इस फिल्म का सबसे खास गाना यानी मैं दुनिया भूला दूंगा रिलीज होते ही रातोंरात संगीत प्रेमियों की जुबान पर चढ़ गया। यह गाना उस दौर के युवा लड़कों के बीच एक तरह का लव एंथम बन चुका था। माहौल ऐसा था कि जैसे इस गीत को सुनकर ही युवाओं ने प्रेम के मार्ग पर चलने का पक्का इरादा कर लिया हो। गीतों में इतनी शिद्दत और गहराई थी कि सुनने वाले अपने प्रेम के लिए हर हद पार करने को तैयार नजर आते थे।
कुमार सानू का रातोंरात सुपरस्टार बनना
इस लोकप्रिय गीत ने पार्श्व गायक कुमार सानू के करियर को पूरी तरह बदल दिया और उन्हें तुरंत ही संगीत की दुनिया का शीर्ष सितारा बना दिया। जैसे ही गीत ने लोकप्रियता के सारे रिकॉर्ड तोड़े, वैसे ही कुमार सानू का नाम हर संगीत प्रेमी की जुबान पर आ गया। उनके पास नए गानों के प्रस्तावों की कतार लग गई और वे उद्योग के सबसे उभरते हुए सितारे बन गए। परदे पर यह गीत अनु अग्रवाल और राहुल रॉय पर फिल्माया गया था जिसे अपनी सुरीली आवाज से अनुराधा पौडवाल और कुमार सानू ने सजाया था। इस धुन को संगीतकार जोड़ी नदीम और श्रवण ने तैयार किया था जबकि इसके खूबसूरत बोल गीतकार समीर ने लिखे थे।
बदलाव लाने वाला संगीतमय सफर
फिल्म की इस बड़ी सफलता के पीछे इसके गानों का बहुत बड़ा योगदान था जिन्होंने नौजवानों के दिलों में गहरी पैठ बनाई। नदीम-श्रवण की जोड़ी ने इस परियोजना के लिए ऐसा जादुई संगीत रचा जिसने हिंदी सिनेमा के संगीत की धारा को ही हमेशा के लिए मोड़ दिया। आज भी जब कभी पिछले दशक के सबसे बेहतरीन रोमांटिक गानों की चर्चा होती है, तो इस एल्बम का नाम सबसे पहले आदर के साथ लिया जाता है।



















