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बायोलॉजी टीचर पर था क्रश और मां की सलाह पर बदला नाम, जानिए मेगास्टार चिरंजीवी के जीवन से जुड़े दिलचस्प किस्सेमनोरंजन
22 अग॰ 2026, 7:21 am (67 दिन पहले)· 4

बायोलॉजी टीचर पर था क्रश और मां की सलाह पर बदला नाम, जानिए मेगास्टार चिरंजीवी के जीवन से जुड़े दिलचस्प किस्से

साउथ सिनेमा के मेगास्टार चिरंजीवी के शुरुआती दिन बेहद दिलचस्प रहे हैं। कॉलेज के दिनों में बायोलॉजी टीचर पर क्रश से लेकर मां की सलाह पर नाम बदलने और पद्म विभूषण हासिल करने तक, जानिए उनकी जिंदगी का शानदार सफर।

साउथ सिनेमा के दिग्गज कलाकार चिरंजीवी आज जिस मुकाम पर हैं, वहां तक पहुंचने के लिए उन्होंने लंबा सफर तय किया है। लाखों प्रशंसकों के दिलों पर राज करने वाले इस सुपरस्टार के शुरुआती दिन बेहद सादगी भरे थे। कॉलेज के दिनों में पढ़ाई के साथ-साथ उनके जीवन में कई ऐसे दिलचस्प पल आए, जिन्होंने उनके व्यक्तित्व को गढ़ने में अहम भूमिका निभाई। इनमें से एक किस्सा उनकी कॉलेज लाइफ और बायोलॉजी टीचर के प्रति उनके मन में पनपे क्रश से जुड़ा हुआ है।

कॉलेज के दिन, बायोलॉजी टीचर का क्रश और अनकही भावनाएं

फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने से पहले चिरंजीवी अन्य युवाओं की तरह अपनी कॉलेज की पढ़ाई का लुत्फ उठा रहे थे। उन्हें बायोलॉजी विषय पढ़ने में काफी रुचि थी। इसी दौरान उन्हें बायोलॉजी पढ़ाने वाली टीचर बेहद पसंद आने लगी थीं। वह टीचर चिरंजीवी की पढ़ाई और लगन की हमेशा तारीफ किया करती थीं, जिससे उनके मन में टीचर के प्रति एक खास आकर्षण पैदा हो गया था।

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इसके बावजूद चिरंजीवी ने कभी अपनी टीचर के सामने इस बात को जाहिर नहीं होने दिया। उन्होंने न तो कभी अपने दिल की बात बयां की और न ही कभी कोई लव लेटर देने की हिम्मत जुटाई। उस समय उनका पूरा ध्यान केवल पढ़ाई, कॉलेज के नाटकों और अभिनय की कला को सीखने पर ही केंद्रित था। यह एक मासूम सा क्रश था, जो उनके कॉलेज के दिनों की खूबसूरत याद बनकर रह गया।

कोनिडेला शिवशंकर से चिरंजीवी बनने की कहानी और शुरुआती संघर्ष

22 अगस्त 1955 को आंध्र प्रदेश में जन्मे चिरंजीवी का असली नाम कोनिडेला शिवशंकर वरप्रसाद है। उनके पिता का नाम कोनिडेला वेंकट राव था, जो पुलिस विभाग में अपनी सेवाएं देते थे। पिता की नौकरी के चलते चिरंजीवी की शुरुआती शिक्षा अलग-अलग स्थानों पर पूरी हुई। इसके बाद उन्होंने कॉमर्स विषय में अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई संपन्न की।

पढ़ाई पूरी करने के बाद अभिनय के प्रति उनके जुनून ने उन्हें चेन्नई स्थित मद्रास फिल्म इंस्टीट्यूट पहुंचा दिया। चिरंजीवी नाम मिलने के पीछे भी एक खास पारिवारिक और धार्मिक वजह है। उनका परिवार भगवान हनुमान, जिन्हें अंजनेय भी कहा जाता है, का परम भक्त था। जब उन्होंने सिनेमा में प्रवेश करने का मन बनाया, तब उनकी मां ने उन्हें 'चिरंजीवी' नाम अपनाने का सुझाव दिया। 'चिरंजीवी' शब्द का अर्थ 'अमर' होता है। आगे चलकर यही नाम भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक महान पहचान बन गया।

'कैदी' से बदली किस्मत और पद्म विभूषण तक का शानदार सफर

चिरंजीवी के फिल्मी सफर की शुरुआत साल 1978 में रिलीज हुई फिल्म 'प्रणाम खरीदू' से हुई थी। हालांकि उन्होंने सबसे पहले 'पुनाधिरल्लू' फिल्म में अभिनय किया था, लेकिन यह फिल्म बाद में सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो सकी। अपने शुरुआती दौर में उन्होंने केवल मुख्य अभिनेता की भूमिकाएं ही नहीं निभाईं, बल्कि एंटी-हीरो और नकारात्मक किरदारों में भी अपनी अभिनय क्षमता साबित की।

साल 1983 में आई फिल्म 'कैदी' चिरंजीवी के करियर के लिए सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। इस फिल्म की अपार सफलता ने उन्हें तेलुगु सिनेमा के शीर्ष सितारों की कतार में ला खड़ा किया। इसके बाद उन्होंने 'स्वयं कृषी', 'रुद्रवीणा', 'गैंग लीडर', 'घराना मोगुडु', 'इंद्रा', 'टैगोर' और 'शंकर दादा एमबीबीएस' जैसी एक से बढ़कर एक सुपरहिट फिल्में दीं। फिल्म 'रुद्रवीणा' के लिए उन्हें अभिनय के साथ-साथ फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी काफी सराहना मिली। वहीं 'स्वयं कृषी' और 'इंद्रा' जैसी यादगार फिल्मों के लिए उन्हें प्रतिष्ठित नंदी पुरस्कार से नवाजा गया। इसके अतिरिक्त उन्होंने अपने करियर में कई बार फिल्मफेयर अवॉर्ड्स साउथ भी अपने नाम किए।

लगभग एक दशक तक फिल्मों से दूरी बनाए रखने के बाद, चिरंजीवी ने साल 2017 में फिल्म 'कैदी नंबर 150' से बड़े पर्दे पर धमाकेदार वापसी की। इस कमबैक के बाद उन्होंने 'सई रा नरसिम्हा रेड्डी', 'आचार्य', 'गॉडफादर' और 'वॉल्टेयर वीरय्या' जैसी बहुचर्चित फिल्मों में काम किया। कला के क्षेत्र में उनके अप्रतिम योगदान को देखते हुए साल 2024 में भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्म विभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया।

सवाल-जवाब

चिरंजीवी का जन्म कब और कहां हुआ था तथा उनका असली नाम क्या है?
चिरंजीवी का जन्म 22 अगस्त 1955 को आंध्र प्रदेश में हुआ था। उनका असली नाम कोनिडेला शिवशंकर वरप्रसाद है।
चिरंजीवी को उनका फिल्मी नाम कैसे मिला और इसका क्या अर्थ है?
उनके परिवार की भगवान हनुमान (अंजनेय) में गहरी आस्था थी। उनकी मां के सुझाव पर उन्होंने फिल्मों के लिए 'चिरंजीवी' नाम चुना, जिसका अर्थ 'अमर' होता है।
कॉलेज के दिनों में चिरंजीवी का क्रश किस पर था?
कॉलेज में पढ़ाई के दौरान चिरंजीवी को बायोलॉजी विषय पसंद था और उन्हें अपनी बायोलॉजी टीचर पर क्रश था, जो उनकी पढ़ाई की तारीफ किया करती थीं।
चिरंजीवी के करियर में किस फिल्म ने स्टारडम की शुरुआत की?
साल 1983 में रिलीज हुई फिल्म 'कैदी' की ऐतिहासिक सफलता ने चिरंजीवी को तेलुगु सिनेमा के बड़े सितारों में स्थापित कर दिया।
चिरंजीवी को वर्ष 2024 में किस सम्मान से नवाजा गया?
वर्ष 2024 में भारत सरकार ने चिरंजीवी को कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्म विभूषण सम्मान से सम्मानित किया।
एक दशक के ब्रेक के बाद चिरंजीवी ने किस फिल्म से वापसी की?
लगभग 10 साल के अंतराल के बाद चिरंजीवी ने साल 2017 में आई फिल्म 'कैदी नंबर 150' से बड़े पर्दे पर धमाकेदार वापसी की थी।
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