बीकानेर के स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले कृषि अनुसंधान केंद्र में एक अहम मासिक तकनीकी कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस बैठक के दौरान खरीफ फसलों के सामने आ रही कीट चुनौतियों और विभिन्न बीमारियों के प्रबंधन को लेकर गंभीर मंथन हुआ। कृषि वैज्ञानिकों और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने साझा तौर पर अन्नदाताओं को आगाह किया है कि खेतों में कातरा कीट का हमला और पोषक तत्वों की कमी चिंता का विषय बन सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब कातरा कीट का संक्रमण आर्थिक नुकसान के दायरे को पार कर जाता है, तो कुल पैदावार में भारी गिरावट दर्ज की जा सकती है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए खेतों की लगातार निगरानी करने और वक्त रहते उपयुक्त रासायनिक उपायों को आजमाने पर जोर दिया गया है ताकि फसलों को बचाया जा सके।
फसलों में पीलेपन से निपटने के लिए वैज्ञानिक फॉर्मूला
कार्यशाला में मौजूद कृषि वैज्ञानिकों ने इस बात पर रोशनी डाली कि कैसे पौधों में आयरन की कमी के चलते पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं। इस समस्या से निजात पाने के लिए उन्होंने एक सटीक घोल तैयार करने की सलाह दी है। यदि खेतों में फसलें पीली नजर आने लगें, तो 500 लीटर पानी के अंदर 5 प्रतिशत फेरस सल्फेट और 1 प्रतिशत सिट्रिक अम्ल को अच्छी तरह मिला लें। इस तैयार किए गए मिश्रण का खेतों में सही तरीके से छिड़काव करने से पीलेपन की समस्या को दूर किया जा सकता है।
कातरा कीट से सुरक्षा और सितंबर माह की कार्ययोजना
कार्यक्रम के दौरान प्रोफेसर एस.पी. सिंह, डॉक्टर एच.एल. देशवाल, डॉक्टर बी.डी.एस. नाथावत और डॉक्टर राजेन्द्र राठौड़ ने खरीफ फसलों के रख-रखाव के तरीकों और कीट नियंत्रण पर विस्तार से प्रकाश डाला। वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी कि वे अपने खेतों का नियमित मुआयना करें ताकि किसी भी कीट के पनपने की शुरुआत में ही उसकी पहचान की जा सके। कीटनाशकों का इस्तेमाल तभी किया जाना चाहिए जब कीटों की संख्या आर्थिक क्षति के स्तर से ऊपर निकल जाए और इसके लिए केवल कृषि विभाग द्वारा अनुशंसित दवाओं का ही चयन करना बेहतर है। इसके अलावा, बैठक में बीते महीने के कार्यों की समीक्षा के साथ-साथ सितंबर महीने के दौरान खेती और बागवानी में उठाए जाने वाले जरूरी कदमों पर भी विचार किया गया।
सब्जी उत्पादन और सरकारी योजनाओं पर जोर
कृषि विस्तार के अतिरिक्त निदेशक हिरेन्द्र शर्मा ने चर्चा के दौरान रेखांकित किया कि बीकानेर संभाग में बागवानी और सब्जियों की खेती के लिए असीम संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सब्जी उगाने वाले किसानों को सपोर्ट सिस्टम के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता और अनुदान का पूरा लाभ मिलना चाहिए। उद्यान विभाग से जुड़ी तमाम कल्याणकारी योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर धरातल पर उतारने की बात कही गई। साथ ही, उर्वरक विक्रेताओं और चुनिंदा प्रगतिशील किसानों को फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल के माध्यम से प्रशिक्षित करने के निर्देश भी दिए गए। इस पूरी कार्यशाला में भगवान सहाय यादव, मदनलाल, धर्मवीर डूडी, जयदीप दोगने, प्रेमाराम और सहायक निदेशक उद्यान मुकेश गहलोत सहित कृषि तथा उद्यानिकी महकमे के कई गणमान्य अधिकारी उपस्थित रहे।



















