सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन यानी सिंटा के भीतर मचे घमासान के बीच अभिनेता मुकेश ऋषि ने पूरी स्थिति पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। संस्था की एग्जीक्यूटिव कमेटी से जुड़े घटनाक्रमों ने हर किसी का ध्यान खींचा है, और इसी सिलसिले में मुकेश ऋषि ने अंदरूनी हालात पर प्रकाश डाला है। उन्होंने खुलकर बताया कि आखिर किन परिस्थितियों के चलते सदस्यों को पद छोड़ने का यह बड़ा कदम उठाना पड़ा और इस पूरी उठापटक की पृष्ठभूमि क्या रही थी।
कमेटी के भीतर क्यों बढ़ने लगा था तनाव
मुकेश ऋषि ने बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि जैसे-जैसे वक्त बीतता गया, वैसे-वैसे बोर्डरूम के भीतर वैचारिक दूरियां और असहजता महसूस होने लगी थी। उन्होंने कहा कि समय के साथ कमेटी के अंदर यह अहसास पुख्ता होने लगा था कि सभी लोग एक समान विजन या दिशा में आगे नहीं बढ़ रहे हैं। शुरुआत में जब इस संगठन की रूपरेखा तय की गई थी, तब सोच बिल्कुल अलग थी और हर उस कलाकार का स्वागत करने का मन था जो यूनियन के लिए कुछ करना चाहता था।
शुरुआती दौर में व्यवस्था बेहद लचीली और सरल रखी गई थी। कलाकारों की वित्तीय स्थिति चाहे जैसी भी हो, उनके लिए कमेटी में आकर सक्रिय भूमिका निभाने के रास्ते हमेशा खुले रहते थे। जो भी शख्स संस्था तक पहुंचकर अपना योगदान देना चाहता था, उसके लिए कोई बड़ी बाधा नहीं थी। लेकिन जैसे-जैसे समय आगे बढ़ा, प्राथमिकताओं और कार्यप्रणाली में बदलाव आने शुरू हो गए, जिससे धीरे-धीरे अंदरूनी तनाव भी गहराई लेने लगा।
सामूहिक इस्तीफे का फैसला और अंदरूनी उठापटक
मुकेश ऋषि ने विस्तार से बताते हुए कहा कि कार्यकुशलता और इच्छाशक्ति के स्तर पर भी कई तरह की कमियां महसूस होने लगी थीं, जिससे माहौल लगातार बिगड़ता चला गया। उन्होंने एक मिसाल देते हुए साझा किया कि यदि किसी एक सदस्य को उसके पद से हटा दिया जाता था, तो दूसरा साथी भी बिना किसी पद के रह जाता था। इस तरह की अप्रत्याशित घटनाओं ने सदस्यों के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या इस ढांचे के भीतर अब भी बने रहना समझदारी है या फिर अलग हो जाना चाहिए।
परिस्थितियां जब असहनीय होने लगीं, तब कई सदस्यों ने आपसी मेल-मिलाप कर एक साझा राय बनाने की ठानी। सभी ने मिलकर पूरी स्थिति का जायजा लिया और एक ही बिंदु पर सहमति जताई। इसके बाद तमाम सदस्यों ने एकमत होकर सामूहिक इस्तीफे के दस्तावेजों पर अपने हस्ताक्षर किए। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने इस कड़े फैसले के पीछे के कारणों को भी खुलकर सामने रखा ताकि किसी भी तरह का भ्रम न रहे।
सिंटा का पक्ष और बाहरी दखल का मुद्दा
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सिंटा के भीतर कुल ग्यारह इस्तीफे सामने आने की चर्चा तेज हो गई थी, जिनमें से आठ सदस्य एग्जीक्यूटिव कमेटी के निर्वाचित सदस्य बताए गए। इन ताबड़तोड़ इस्तीफे की खबरों के बाद यह बहस छिड़ गई कि क्या पूरी कार्यकारिणी भंग हो चुकी है और अब संस्था का कामकाज कैसे आगे बढ़ेगा। इसी बीच टीवी अभिनेत्री उपासना सिंह ने भी अपनी बात रखी और सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया कि अध्यक्ष पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे अपने पदों का दुरुपयोग कर रही हैं।
इन तमाम अटकलों के बीच सिंटा की ओर से एक आधिकारिक सार्वजनिक नोटिस जारी किया गया, जिसमें कार्यकारिणी के भंग होने की सभी खबरों को सिरे से खारिज कर दिया गया। संस्था का कहना था कि कुछ नाखुश लोग अनावश्यक रूप से असमंजस का माहौल बना रहे हैं, जबकि यूनियन पूरी तरह सक्रिय रहकर अपने सामान्य तरीके से काम कर रही है। इस विवाद में फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज यानी एफडब्ल्यूआईसीई की भूमिका पर भी सवाल उठे, और सिंटा ने यह आपत्ति जताई कि फेडरेशन के पास उसके आंतरिक मामलों में दखل देने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है।



















