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द वन फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट का छठी मैया गीत बना चर्चा का केंद्र, तमन्ना भाटिया के भक्ति अवतार ने बनाया रिकॉर्डमनोरंजन
20 सित॰ 2026, 1:41 am (38 दिन पहले)· 0

द वन फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट का छठी मैया गीत बना चर्चा का केंद्र, तमन्ना भाटिया के भक्ति अवतार ने बनाया रिकॉर्ड

फिल्म द वन फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट के भक्ति गीत छठी मैया में तमन्ना भाटिया के पारंपरिक अवतार ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया है। मात्र बहत्तर घंटों में सत्ताईस मिलियन से ज्यादा व्यूज हासिल कर यह ट्रैक व्यापक स्तर पर पसंद किया जा रहा है।

भारतीय सिनेमा के लंबे इतिहास में तीज त्योहारों और सांस्कृतिक पर्वों को हमेशा से एक बेहद खास मुकाम हासिल रहा है। रूपहले पर्दे पर करवा चौथ, ईद, दिवाली और होली जैसे अवसरों पर तैयार किए गए अनगिनत सदाबहार नगमे दशकों से दर्शकों के दिलों पर राज करते रहे हैं। इसके विपरीत, लोक आस्था और कठिन तप के महापर्व छठ की पावन परंपराएं लंबे अरसे तक मुख्यधारा के हिंदी सिनेमा के केंद्र से अमूमन दूर ही नजर आती रही हैं। हालांकि क्षेत्रीय स्तर पर भोजपुरी संगीत उद्योग हर साल हजारों छठ गीतों का निर्माण करता आया है, जो करोड़ों श्रद्धालुओं की अगाध आस्था और भावनाओं को अभिव्यक्त करते हैं। ऐसे दौर में आगामी फिल्म ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ के गीत ‘छठी मैया’ का सामने आना और उसमें शीर्ष बॉलीवुड अभिनेत्री तमन्ना भाटिया का पूरी श्रद्धा से सराबोर दिखाई देना, एक युगांतरकारी सांस्कृतिक परिघटना के रूप में स्थापित हो चुका है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सार्वजनिक होने के महज तीन दिनों यानी बहत्तर घंटों के भीतर 27 मिलियन से अधिक दर्शकों द्वारा इसे देखा जाना साफ तौर पर जाहिर करता है कि लोग इस सिनेमाई पहल को सिर्फ सराह ही नहीं रहे हैं, बल्कि दिल की गहराइयों से इससे जुड़ भी चुके हैं। तमन्ना भाटिया द्वारा अपनाए गए इस पारंपरिक रूप और भावपूर्ण अदायगी को मिल रहे अपार स्नेह के पीछे कई सामाजिक, सिनेमाई और भावनात्मक पहलू छिपे हुए हैं।

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मुख्यधारा की शीर्ष अभिनेत्री का ऐतिहासिक कदम

सिनेमाई इतिहास के पन्नों को पलटें तो यह पहला ऐसा अवसर है जब मुख्यधारा की ए-लिस्ट बॉलीवुड अभिनेत्री किसी बड़े बजट की हिंदी फीचर फिल्म के जरिए सीधे स्क्रीन पर छठी मैया की आराधना करते हुए सामने आई है। पूर्व में छठ महापर्व के दृश्य बड़े पर्दे पर या तो बेहद सतही अंदाज में एकाध प्रसंग तक सीमित रहते थे, या फिर उनकी संपूर्ण अभिव्यक्ति केवल क्षेत्रीय सिनेमा तक ही सिमट कर रह जाती थी। संपूर्ण भारत में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाली वैश्विक स्तर की चर्चित कलाकार तमन्ना भाटिया को इस पावन पर्व की वेशभूषा, कठोर आस्था और सहज सादगी को साकार करते देखना दर्शकों के लिए एक अप्रतिम अनुभव साबित हुआ है। जब एक स्थापित अभिनेत्री पारंपरिक रीति के अनुसार हाथों में सूप और दौरा थामे पर्दे पर छठी मैया को नमन करती है, तो यह हिंदी फिल्म उद्योग की उत्तर भारतीय संस्कृति और जनमानस की आस्था के प्रति गहरी आत्मीयता को रेखांकित करता है।

आस्था की पावनता और तमन्ना का सहज समर्पण

छठ महापर्व सामान्य उत्सवों से अलग असीम अनुशासन, निष्ठा और आत्मिक पवित्रता का अनुष्ठान माना जाता है। इस प्रस्तुति में तमन्ना भाटिया की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह रही कि उन्होंने इसे किसी व्यावसायिक सिनेमाई गीत की तरह लेने के बजाय एक गहरे आध्यात्मिक अनुभव की तरह आत्मसात किया। उनके चेहरे पर झलकता अगाध भक्ति भाव, नयनों में समर्पण और मांग में सिंदूर के साथ लाल-पीली साड़ी तथा पारंपरिक आभूषणों का पहनावा इतना प्रामाणिक और सहज जान पड़ता है कि देखने वाले को किसी अभिनय का आभास तक नहीं होता। तमन्ना की इसी स्वाभाविकता और श्रद्धा ने जन-जन के मन को छू लिया है।

क्षेत्रीय सीमाओं से निकलकर राष्ट्रीय पटल पर छाने का गौरव

भोजपुरी संगीत जगत बीते कई दशकों से अत्यंत कर्णप्रिय और मनभावन छठ गीतों का सृजन करता रहा है, जिन्हें पर्व के दौरान देश-विदेश में करोड़ों बार सुना जाता है। इसके बावजूद, एक भव्य और बड़े बजट की हिंदी सिनेमाई परियोजना के भीतर छठ गीत को केंद्रीय स्थान मिलना भोजपुरी और पूर्वांचल की समृद्ध लोक परंपरा के लिए अत्यंत गौरवशाली पल बन गया है। यह गीत अब केवल बिहार अथवा उत्तर प्रदेश के भौगोलिक दायरे तक सीमित न रहकर अपनी भव्य प्रस्तुति और व्यापक पहुंच के दम पर समूचे देश सहित सात समंदर पार बसे भारतीय समुदायों में भी शीर्ष ट्रेंड्स में शामिल हो चुका है। जब किसी लोक परंपरा को मुख्यधारा के मंच पर ऐसा सम्मानजनक स्थान दिया जाता है, तो लोकमानस का भावविभोर होना स्वाभाविक है।

डिजिटल कीर्तिमान और कलात्मक संतुलन

धार्मिक और आध्यात्मिक परिवेश पर केंद्रित ‘हनुमान अंश’ जैसी फिल्मों के कर्णप्रिय संगीत ने भक्ति रचनाओं के लिए सफलता का एक नया पैमाना तय किया था। उसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए ‘छठी मैया’ गीत ने रिलीज के शुरुआती 72 घंटों में ही 27 मिलियन से अधिक बार देखे जाने का नया कीर्तिमान स्थापित कर दिखाया है। यह कीर्तिमान न केवल तमन्ना भाटिया की व्यापक स्टार अपील को प्रमाणित करता है, बल्कि इस तथ्य को भी उजागर करता है कि आज का दर्शक वर्ग अपनी सांस्कृतिक जड़ों और पावन परंपराओं से जुड़ने के लिए पूरी तरह तत्पर है। फिल्म में अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा की मौजूदगी और तमन्ना के सशक्त अभिनय ने इस रचना के प्रभाव को कई गुना विस्तृत कर दिया है।

गीत की इस असाधारण सफलता का बड़ा श्रेय इसके संगीत संयोजन, भावपूर्ण बोल और विजुअल प्रस्तुति को भी जाता है। पारंपरिक लोक धुनों की मूल आत्मा को संरक्षित रखते हुए आधुनिक वाद्ययंत्रों का जो मधुर समन्वय साधा गया है, वह बेहद कर्णप्रिय बन पड़ा है। नदी घाट का जीवंत दृश्य, अस्ताचलगामी और उदीयमान भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के पलों का सजीव चित्रण और उसमें तमन्ना का तन्मय भाव हर दृश्य में जान फूंक देता है। यह रचना न केवल सुनने में मधुर है, बल्कि दृश्यों के स्तर पर भी चित्त को पावन शांति प्रदान करती है।

सांस्कृतिक समावेशन की नई राह

‘छठी मैया’ में तमन्ना भाटिया का यह पावन रूप महज एक लोकप्रिय गीत भर नहीं है, बल्कि हिंदी सिनेमा के भीतर सांस्कृतिक समावेशन का एक नया अध्याय है। इस गीत की अभूतपूर्व स्वीकार्यता यह सिद्ध करती है कि जब मुख्यधारा की फिल्में लोकजीवन से जुड़ी गहरी परंपराओं को बिना किसी मिलावट, पूरे आदर और सच्चाई के साथ पेश करती हैं, तो दर्शक उसे खुले दिल से अपनाते हैं। यही बड़ा कारण है कि तमन्ना भाटिया के इस भक्ति रूप को देश और दुनिया के हर कोने से इतना असीम आदर मिल रहा है।

सवाल-जवाब

छठी मैया गीत किस फिल्म से संबंधित है?
यह पावन गीत आगामी फिल्म 'द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट' का हिस्सा है, जिसमें तमन्ना भाटिया और सिद्धार्थ मल्होत्रा नजर आ रहे हैं।
इस गीत को रिलीज के बाद कितने समय में रिकॉर्ड व्यूज मिले?
गाने ने सार्वजनिक होने के महज 72 घंटों यानी तीन दिनों के भीतर 27 मिलियन से अधिक व्यूज हासिल कर लिए हैं।
तमन्ना भाटिया के इस अभिनय को ऐतिहासिक क्यों माना जा रहा है?
सिनेमा इतिहास में यह पहली बार है जब बॉलीवुड की किसी मुख्यधारा की ए-लिस्ट अभिनेत्री ने बड़े बजट की हिंदी फिल्म में छठ पूजा की रस्में निभाई हैं।
गाने में तमन्ना भाटिया का लुक किस तरह तैयार किया गया है?
तमन्ना पारंपरिक लाल-पीली साड़ी, बालों की मांग में सिंदूर और पारंपरिक आभूषण पहने हाथों में सूप और दौरा थामे नजर आई हैं।
इस गीत की सफलता का श्रेय किन प्रमुख तत्वों को दिया गया है?
गाने की सफलता में इसके कर्णप्रिय संगीत, पारंपरिक व आधुनिक वाद्ययंत्रों के संगम, घाट के विजुअल दृश्यों और तमन्ना के भक्ति भाव का बड़ा योगदान है।
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टिप्पणियाँ 5

Priya Sharma@priya-sharma·37 दिन पहले

मुख्यधारा के सिनेमा में लोक आस्था का यह समावेश सांस्कृतिक बदलाव का एक बड़ा संकेत है। जब तमन्ना भाटिया जैसी ए-लिस्ट अभिनेत्री ने इस कठोर अनुष्ठान को पर्दे पर उतारा, तो इसने क्षेत्रीय संस्कृति और वैश्विक दर्शकों के बीच की दूरी को पाटने का काम किया है। बहत्तर घंटों में मिले सत्ताईस मिलियन व्यूज यह साबित करते हैं कि आज का दर्शक अपनी जड़ों से जुड़ी प्रामाणिक और गंभीर सामग्री को दिल से अपना रहा है। आगे चलकर यह प्रवृत्ति अन्य निर्माताओं को भी मुख्यधारा में पारंपरिक और लोक आधारित विषयों पर बड़े पैमाने पर निवेश करने के लिए प्रेरित करेगी।

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·38 दिन पहले

मुख्यधारा की फिल्मों में क्षेत्रीय लोक आस्था का यह समावेश भारतीय सिनेमा के बदलते दौर का मजबूत प्रमाण है। तमन्ना भाटिया के इस गीत को 72 घंटों में मिले 27 मिलियन से अधिक व्यूज यह साबित करते हैं कि दर्शक अब अपनी जड़ों से जुड़ी प्रामाणिक कहानियों और संस्कृति को बड़े पर्दे पर देखना चाहते हैं। यह ट्रेंड भविष्य में बॉलीवुड और क्षेत्रीय संस्कृति के बीच की दूरी को और तेजी से पाटने का काम करेगा, जिससे ऐसी कहानियों को पैन-इंडिया स्तर पर बड़े बजट में पेश करने का नया रास्ता खुलेगा।

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·38 दिन पहले

जैसे खेल जगत में किसी स्थानीय प्रतिभा को वैश्विक मंच मिलने पर पूरा खेल तंत्र बदल जाता है, वैसा ही बदलाव इस सिनेमाई प्रयोग से मनोरंजन उद्योग में दिख रहा है। 72 घंटों में 27 मिलियन व्यूज का यह आंकड़ा इस बात का ठोस प्रमाण है कि दर्शक अब मुख्यधारा के सिनेमा में क्षेत्रीय संस्कृति की प्रामाणिक और अनुशासित प्रस्तुति को हाथों-हाथ ले रहे हैं। यह रिकॉर्ड भविष्य के बड़े बजट के प्रोजेक्ट्स के लिए एक नया मानदंड तय करेगा, जहाँ लोक आस्था और वैश्विक अपील का यह अनूठा संयोजन बॉक्स ऑफिस पर गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

Tanvi Desai@tanvi-desai·38 दिन पहले

यह गीत इस बात का उदाहरण है कि डिजिटल युग में क्षेत्रीय संस्कृतियों और ग्लोबल स्टार पावर का मेल कितनी तेजी से व्यूज बटोर सकता है। मात्र बहत्तर घंटों में सत्ताईस मिलियन से अधिक व्यूज यह साबित करते हैं कि ओटीटी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के इस दौर में दर्शक प्रामाणिक और सांस्कृतिक रूप से जुड़ी सामग्री को हाथों-हाथ ले रहे हैं। आने वाले समय में यह ट्रेंड मनोरंजन जगत को लोक संस्कृति आधारित बड़े बजट की कहानियों की ओर और अधिक आकर्षित करेगा।

Aisha Khan@aisha-khan·38 दिन पहले

तमन्ना भाटिया के इस पारंपरिक अवतार ने यह साबित कर दिया है कि जब कोई स्थापित सितारा जमीनी संस्कृति से जुड़ता है, तो दर्शक स्वतः खिंचे चले आते हैं। बहत्तर घंटों में सत्ताईस मिलियन व्यूज का यह आंकड़ा केवल एक रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि इस बात का स्पष्ट संकेत है कि कंटेंट आधारित और सांस्कृतिक रूप से प्रामाणिक प्रोजेक्ट्स अब बॉक्स ऑफिस और डिजिटल स्पेस पर नया मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।

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