भोजन करने के तत्काल बाद बिस्तर पर लेट जाना या सोफे पर बैठ जाना अक्सर लोगों की आदत होती है, लेकिन यह स्वास्थ्य के लिए भारी पड़ सकता है। एम्स दिल्ली के विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की निष्क्रियता से शरीर को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है, विशेष तौर पर उन लोगों के लिए जो पहले से ही डायबिटीज या शुगर की समस्या का सामना कर रहे हैं। एम्स के एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. राजेश खड़गावत ने स्पष्ट किया है कि खाना खाने के बाद के शुरुआती तीस से नब्बे मिनट का अंतराल वह समय होता है जब रक्त में शर्करा का स्तर अत्यंत तीव्र गति से ऊपर उठ सकता है। यदि इस दौरान शरीर को बिना किसी गतिविधि के विश्राम की स्थिति में छोड़ दिया जाए, तो ग्लूकोज का स्तर अनियंत्रित हो जाता है।
दस मिनट की हल्की चहलकदमी है कारगर
इस स्थिति से बचने का सबसे सरल और प्रभावशाली उपाय यह है कि भोजन के बाद लेटने के बजाय दस से पंद्रह मिनट तक धीमी गति से टहल लिया जाए। जब कोई व्यक्ति हल्का-फुल्का चलता है, तो शरीर की मांसपेशियां अतिरिक्त ग्लूकोज को ऊर्जा के रूप में अवशोषित कर लेती हैं और उसका उपयोग करती हैं। इससे भोजन के बाद होने वाले शुगर के अचानक उछाल को बहुत आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। यह छोटी सी जीवनशैली की आदत उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी साबित होती है जिनका भोजन करते ही शुगर का स्तर तेजी से बढ़ने लगता है।
दैनिक दिनचर्या में वॉक और व्यायाम का महत्व
केवल भोजन के तुरंत बाद थोड़ा चल लेना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए रोजाना की आदतों में भी सुधार करना आवश्यक है। डॉ. राजेश खड़गावत की सलाह के अनुसार, प्रत्येक दिन सुबह और शाम को तीस से पैंतालीस मिनट की नियमित वॉक को अपनी दिनचर्या में शामिल करना बहुत जरूरी है। इससे शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार होता है और मधुमेह से जुड़ी जटिलताओं के साथ-साथ हृदय रोगों का जोखिम भी काफी हद तक कम हो जाता है।
जोड़ों के दर्द और दिल के रोगियों के लिए विशेष सलाह
यदि किसी व्यक्ति को घुटनों में गंभीर दर्द है या चलने-फिरने में शारीरिक कठिनाई है, तो उसे परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे लोग कुर्सी पर बैठकर या जरूरत पड़ने पर चिकित्सक के परामर्श से लेटकर भी अपने हाथ-पैरों की हल्की-फुल्की कसरत कर सकते हैं। कुल मिलाकर संदेश यह है कि शारीरिक गतिविधियों को पूरी तरह बंद करने के बजाय अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार उनके तौर-तरीकों में बदलाव कर लेना चाहिए। इसके अलावा, यदि आपको हृदय संबंधी कोई भी बीमारी है, तो किसी भी प्रकार की नई व्यायाम प्रक्रिया शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से अवश्य परामर्श करें।



















