फिल्म समीक्षकों की नजर से देखें तो दायरा रिव्यू कानून व्यवस्था और त्वरित न्याय की जटिलताओं को सामने लाता है। 'सैम बहादुर' के तीन साल बाद निर्देशक मेघना गुलजार की नई क्राइम थ्रिलर 'दायरा' सिनेमाघरों में आ चुकी है। इस फिल्म में पृथ्वीराज सुकुमारन और करीना कपूर खान मुख्य किरदारों में नजर आ रहे हैं। कहानी एक चर्चित एनकाउंटर मामले के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जो कानूनी प्रक्रिया, नैतिक मूल्यों और पुलिस मुठभेड़ों की जमीनी हकीकत पर तीखे सवाल खड़े करती है। हालांकि, गंभीर और जरूरी विषय पर आधारित होने के बाद भी यह फिल्म दर्शकों पर अपेक्षित गहरा प्रभाव छोड़ने में सफल नहीं हो पाती।
एनकाउंटर और नैतिक द्वंद्व की कहानी
फिल्म की पटकथा में पृथ्वीराज सुकुमारन ने डीसीपी रमन कुमार की भूमिका निभाई है, जो एक मुठभेड़ के दौरान चार आरोपियों को मार गिराते हैं और रातों-रात जनता की नजरों में नायक बन जाते हैं। दूसरी तरफ, मामले की निष्पक्ष जांच का जिम्मा डीसीपी अजूनी यानी करीना कपूर खान को सौंपा जाता है। शुरुआत में कहानी यह गंभीर सवाल उठाती है कि क्या त्वरित न्याय को वास्तव में सही न्याय माना जा सकता है। लेकिन जैसे-जैसे कथा आगे बढ़ती है, पटकथा अपने ही उठाए सवालों के जाल में उलझ जाती है और अंत में दर्शकों को अधूरापन महसूस होता है।















